Keelu Gurram (బాన్ గుర్రామ్) – A Super Hit Telugu Film

 Keelu Gurram బాన్ గుర్రామ్ एक तेलुगु फिल्म है जिसका अर्थ इंग्लिश में Magic Horse से है। यह फिल्म 19 फरवरी 1949 को दक्षिण सिनेमा में आयी थी। इस फिल्म का निर्देशन राजा साहेब ऑफ मिर्ज़ापुर ने किया था और यह पहली फिल्म थी जो किसी  में डब की गयी यह तमिल में  Mayakkudira नाम से रिलीज़ हुयी। 

 यह एक एडवेंचर फेंटेसी फिल्म जो एक राजा, रानी, उसके पुत्र और एक राजकुमारी पर आधारित है। किस तरह से  एक राजा अपनी ही रानी को मरवाने की कोशिश करता है और किस तरह एक साधारण सा वीर राजकुमारी को बचाता है।  

Story –  फिल्म की कहानी शुरू होती है विरुद्ध के राजा के साथ जो अपने साथी के साथ आखेट पर गए हैं।  एक हिरन का पीछा करते करते वह घने जंगल के भीतर चले जाते हैं , वहां पर दो राक्षस पशु पक्षियों को मारकर खा रही होती हैं जब उनका पेट भर जाता है तो वह अपने मनोरंजन के लिए रूप बदलकर नृत्य करने लगती है।उसी समय राजा वहां आ जाता है और सुंदरी का रूप और नृत्य देखकर इतना मोहित हो जाता है कि उसे अपनी रानी बनाकर महल में लेकर आता है। सुंदरी राजा की दूसरी पत्नी होती है पहली पत्नी सुंदरी का स्वागत करती है और उसको अपनी छोटी बहन की तरह रखती है। 

विवाह के पश्चात् सुंदरी की बहन भी उसके साथ  महल में आती है उसकी दासी बनकर। सुंदरी दिन में अपने भ्रमित रूप में रहकर सबका प्रेम बटोरती है और रात  के अँधेरे में अपने असली रूप में आकर किले के हाथी और घोड़ों को मारकर उनका मांस कहती हैं दोनों बहिने। किले में रोज़ मर रहे हाथी और घोड़ों से राजा और दरबान के सभी लोग चिंतित होते हैं और उस कातिल को पकड़ने के लिए एक योजना बनायीं जाती है. जिसके तहत एक दिन सुंदरी हाथी और घोड़ों को मारकर खाने का इलज़ाम बड़ी रानी पर लगा देती है और यह भी साबित करती है कि वह ही एक राक्षस है। 

राजा क्रोध में आकर अपने सैनिको को आदेश देते हैं कि रानी  को कहीं दूर जंगल में ले जाकर उसकी हत्या कर दी जाये।  मगर सैनिकों को उस पर दया आ जाती है वह रानी को जीवन दान देते हैं यह जानकर कि वह गर्भवती है और बस उसकी आँखे निकालकरले जाते हैं राजा के सामने उसकी मृत्यु का प्रमाण देने के लिए। और दूसरी तरफ सुंदरी ने अपने भ्रमित रूप से राजा को अपने वष में कर लिया था। कुछ समय बाद रानी एक प्यारे से बालक को जन्म देती है जिसका नाम विक्रम होता है। 

 रानी  की मदद जंगल में रहने वाले आदिवासी करते हैं वह उसको आश्रय देते हैं।  समय चलता रहता है और उस के साथ साथ विक्रम भी बड़ा होता रहता है। एक दिन कबीले के एक छोटे से झगडे ने विक्रम को अपनी माँ के द्वारा अपनी और माँ की सारी सच्चाई पता लग जाती है उसके बाद विक्रम बिना कुछ बताये माँ को अकेला छोड़कर चला जाता है। 

राज्य में एक घोषणा होती है कि अनगा राज्य की राजकुमारी को एक चुड़ैल ने अपहरण कर लिया है और जो भी उसको बचा कर लाएगा उसे राजा का आधा राज्य मिलेगा और राजकुमारी के साथ विवाह होगा। राज्य के तीन सबसे बुद्धिमान एक लौहार , एक ज्योतिष और एक पुजारी,  तीनो इनाम के लालच में  मिलकर एक जादुई घोडा बनाते हैं जो उड़ सकता है और वह तीनों अपनी जादुई शक्तियों के माध्यम से यह जान लेते हैं कि राजकुमारी को खतरनाक जीवों से घिरे एक पहाड़ पर तीन समुद्रों से बहुत दूर छिपाया हुआ है। 

घोडा तो बन जाता है मगर उस पर बैठने में वह तीनों बहुत डरते हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए वह राजा के पास जाते हैं और वहां जाकर पूछते हैं कि क्या राज्य में कोई बहादुर जवान है जो उस पर सवारी कर सकता है। उसी समय विक्रम राज्य में प्रवेश करता है और यह बात सुनकर वह राजा के महल में जाता है और घोड़े पर बैठने की इच्छा जाहिर करता है और वह घोड़े पर बैठकर उड़ने लगता है।  राजा उसकी बहादुरी देखकर उसको अपनी सेना का प्रमुख बना देते हैं और वह प्रण लेताहै कि राक्षसों द्वारा हाथी और घोड़ों को मारने का सिलसिला रोक कर रहेगा। 

और वही दूसरी तरफ विक्रम की चौकसी से सुंदरी और उसकी बहन का राक्षस बनकर जीवो को मारने की ख्वाइश मुश्किल होती जा रही थी।  इसके लिए एक दिन सुंदरी सर दर्द का बहाना बनाकर विक्रम को जड़ी बूटी लाने के लिए बहुत दूर जंगल में भेज देती है एक पत्र के साथ और वह जगह भी बताती है जहाँ पर उसको वह जड़ी बूटी मिलेगी। विक्रम अपने जादुई घोड़े से जाता है कि रास्ते में उसे एक राजकुमारी  दिखती है जिसको एक ब्राह्मण मारना चाहता है, वह राजकुमारी की जान बचाता है और उसको उसके महल छोड़ने जाता है राजकुमारी के आग्रह पर विक्रम रात्रि विश्राम के लिए रुक जाता है।  राजकुमारी को उसके पास से एक पत्र मिला जिसमे लिखा था कि प्रिय बड़ी बहन, जो कोई भी आपके लिए यह पत्र लाता है, मुझे बहुत तकलीफ दे रहा है तो उसको मार दो। राजकुमारी वह पत्र बदल देती है और उसमे लिख देती है कि जो भी ये पत्र ला रहा है उसको स्वागत करो। 

सुबह विक्रम जाता है और उस जगह पहुंचकर वह पत्र देता है जैसा पत्र में लिखा था सुंदरी की बड़ी बहन विक्रम का स्वागत करती है और उसका बहुत ख्याल रखती है अपनी दासियों के साथ।  विक्रम किसी तरह से उन सभी को चकमा देकर भाग जाता है दोनों राजकुमारियों के साथ और अपने साथ दो कीड़े भी ले जाता है क्योंकि उसको यह पता चल जाता है कि इन राक्षसों की जान एक कीड़े में होती है। वहीँ दूसरी तरफ राजा के सैनिक रानी को पकड़ लेते हैं और उसको फांसी की सजा होने वाली होती है सभी के सामने उतने में ही विक्रम आ जाता है और अपनी माँ को बचा लेता है। उसके बाद वह सुंदरी की सच्चाई सबको बताता है और उस कीड़े की मदद से सुंदरी की हत्या कर देता है। उसके बाद  राजा रानी और अपने पुत्र से माफ़ी मांगता है और विक्रम को राजा बना देता है।  

Songs & Cast – इस फिल्म में घण्टासाला ने संगीत दिया है और गानों को लिखा है तापी धर्मा राव ने – “आहा अहो आनंदम ఆహా అహో ఆనందం “, “भगामयु नादेनोई భాగ్యము నాదెనోయి “, “चुचि तेरावाकाडा చూచి తీరవకడ “, “कैदुसुमा कला कादुसुमा కడుసుమ కలా కడుసుమా “, “एवरू चेसीना कर्म ఎవారు చెసినా కర్మ”,”नीरा ने बांधी  నేరా నేరా బండి”, “तेलियावसमा पलुकतरमा తెలియవసామ పలుకటరామ”  और इन सभी गानों को गाया है घण्टासाला , वी सरला राव ,और कृष्णा वेनी ने। 

अक्किनेनी नागेश्वर राव ने विक्रम का किरदार इस तरह से निभाया है कि उन्हें फिल्म के बाद विक्रम के रूप में एक पहचान भी मिली और अन्य कलाकारों ने अपने किरदार को फिल्म में जीवित किया है – अंजलि देवी (गुना सुंदरी, यक्षिणी), ए वी सुब्बा राव (प्रचंड महाराज), रिंगली (गोविंदुडु)  

यह ब्लैक & वाइट फिल्म 3 घंटे और 40 मिनट्स की है और इसका निर्माण हुआ है शोभनाचला पिक्चर्स बैनर के तहत। 

 

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