Mindapennu (മിൻഡാപെന്നു) – गलतफहमी से बर्बाद होता एक खूबसूरत रिश्ता

Mindapennu एक सुपर हिट क्लासिक मलयालम फिल्म है जो  14 नवम्बर 1970 में रिलीज़ हुयी और इसका निर्देशन के.एस. सेतुमाधवन ने किया था, जो प्रसिद्ध है सुपरहिट फिल्मे देने के लिए। सेतुमाधवन को केरल सर्कार से इस फिल्म के लिए बेस्ट निर्देशक का भी अवार्ड मिला था। 
  यह फिल्म आधारित है ऐसे युवा जोड़े की जो जीवन की शुरुवात तो साथ करते हैं मगर उनके जीवन की कश्ती हर आने वाले झोंकों से हिल जाती है।  किस तरह यह झोंके शक पैदा करते हैं और वह शक हज़ारों गलतफहमियां अपने साथ लेकर आता है और हर गलतफहमी आपके रिश्तों को ख़तम करती  है।   
Story –  फिल्म की कहानी शुरू होती है चन्द्रन से गांव के एक होनहार युवा से,जो गांव में अपने एक रिश्तेदार के घर में रहता है, जहाँ पर उसकी हम उम्र बचपन की दोस्त कुंजुलक्ष्मी, जो मन ही मन चंद्रन से प्रेम करती है। चंद्रन की नौकरी शहर में एक कंपनी में लगती है और वह गांव से शहर जाता है। जहाँ पर चंद्रन की मुलाकात अपने साथ काम करने वाली कमला से होती है जो उसकी हर काम में मदद करती है। 
कमला चंद्रन को अपने घर ले जाती है और अपने माता पिता से मिलवाती है।  कुछ ही समय में दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन जाते हैं और कुछ समय बाद यह दोस्ती प्यार में बदल जाती है और दोनों विवाह करने के बारे में सोचते हैं। यह बात चंद्रन कमला के माता पिता से करता है और वह दोनों मान जाते हैं।  यह ख़ुशी की खबर देने वह गांव जाता है जहाँयह बात जानकर कुंजुलक्ष्मी और उसका परिवार बहुत दुखी होता है मगर वह कुछ भी नहीं कहते हैं। 
कुछ दिनों में चंद्रन का विवाह कमला से हो जाता है और वह दोनों ख़ुशी ख़ुशी अपना नया जीवन शुरू करते हैं। दोनों में बेहद प्रेम होता है और यह प्रेम तब तक ही रहता है जब तक कि चंद्रन के दिमाग में कमला को लेकर शक पैदा नहीं होता है। चंद्रन को कमला का ऑफिस में काम करने वाले पुरुषों से उसका मज़ाक करना पसंद नहीं आता है।  वह इसके लिए उसको कई बार मना भी करता है मगर वह नहीं मानती है। 
और दोनों में झगड़े होने शुरू हो जाते हैं। कुंजुलक्ष्मी गांव से शहर आती है कुछ काम से तो वह चंद्रन के घर पर ही रूकती है वह दोनों को समझाती हैऔर उसी बीच में कमला को कुंजुलक्ष्मी के एक तरफ़ा प्रेम के बारे में पता चलता है मगर वह किसी से नहीं कहती है। कुंजुलक्ष्मी अपना काम करके वापस अपने पिता के साथ गांव चली जाती है। 
चंद्रन और कमला के बीच गलतफहमियां इतनी बढ़ जाती हैं कि वह अपना घर छोड़कर गांव चला आता है कुंजुलक्ष्मी के घर। परिवार के सभी लोग उसे बहुत समझाते हैं और कुंजुलक्ष्मी चंद्रन को अपने साथ शहर लेकर आती है कमला के पास। कमला को दुखी देखकर चंद्रन को अपनी गलती का अहसास हो जाता है और वह उससे माफ़ी मांगता है। 
 
दोनों एक दूसरे से माफ़ी मंगाते हैं और कुंजुलक्ष्मी का शुक्रिया अदा करते हैं कि उसकी समझदारी से उनका रिश्ता बच गया।  उसी समय कमला चंद्रन से कुंजुलक्ष्मी के मन में उसके लिए प्रेम की बात को बताती है मगर चंद्रन कहता है कि वह उसकी सबसे अच्छी दोस्त है यह बात कुंजुलक्ष्मी सुन लेती है और बिना बताये वहां से चली जाती है।
Songs & Cast –   इस फिल्म में संगीतकार जी देवराजन ने 7 बेहद सुरीले गाने दिए हैं जो सभी सुपर हिट रहे हैं – “आरंगगम कन्निल അനുരാഗം കണ്ണിൽ”, “कंदल नल्लोरु കാണ്ഡാൽ നല്ലോരു”, “पोमोनिमारेंटे कोविल  പൂമാനിമാറന്റ് കോവിലിൽ”, “इनाकिल्ली इनककिली  ഇനാക്കിലി ഇനാക്കിലി “, और इन सभी गानों को गाया है एस जानकी , के जे येसुदास, पी सुशीला, पी लीला और एल आर ईसवारी ने।
 
 प्रेम नज़ीर ने फिल्म में चन्द्रन के किरदार इस तरह से निभाया ही नहीं है बल्कि जीवंत किया है और उनका साथ दिया है शीला (कमला ), शारदा ( कुंजुलक्ष्मी), सुकुमारी (पंकजाक्षी), टी आर ओमाना (दक्षिणायणी), परजूर भरत (कुंजप्पन) और अन्य कलाकार।
इस फिल्म की अवधि 2 घंटे और 1 मिनट (121 मिनट्स ) है और फिल्म का निर्माण वी एम श्रीनिवासन ने अम्बिली फिल्म्स कंपनी के तहत किया है।
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