Oru Vadakkan Veeragatha (ஒரு வடக்கன் வீரகாத)

मलयालम फिल्म Oru Vadakkan Veeragatha (ஒரு வடக்கன் வீரகாத) जिसका इंग्लिश में अर्थ है “A northern ballad of valour” यह एक सुपर हिट ऐतिहासिक फिल्म है जिसका निर्देशन टी हरिहरन ने किया है।  यह फिल्म 14 अप्रैल 1989 को भारतीय सिनेमा में रिलीज़ हुयी।

2013 में आई बी एन लाइव ने एक पोल करवाया था जिसमे Oru Vadakkan Veeragatha फिल्म 3 सबसे बड़ी और बेहद लोकप्रिय फिल्मों में से एक बनी। इस फिल्म एक अनाथ व्यक्ति की कहानी पर आधारित है जो बचपन से लेकर अपनी मृत्यु तक सिर्फ संघर्ष करता है।  

Story – कहानी शुरू होती है 16 वी सदी से जहाँ पर केरल के एक गांव के प्रसिद्ध व्यक्ति कन्नप्पन चेकावर से , जो अपनी बहन के मरने के बाद उसके बेटे को गोद लेता है जिस बच्चे का नाम चंदू है और वह भी अपने ममेरे भाई – बहनो के साथ पलता है जो की चंदू को बिलकुल भी पसंद नहीं करते थे क्योकि चंदू बहुत समझदार और सभी कामों में निपुण था और हमेशा उसको कन्नप्पन से प्यार और शाबाशी ही मिलती थी। 

धीरे – धीरे सभी बच्चे बड़े होने लगते हैं मगर चंदू के ममेरे भाई अरोमल की नफरत और भी बढ़ती जा रही थी। और वह हर बात और काम में चंदू को एकदम किनारा कर दिया करता था। उसके बाद वह सभी अरिंगोडर चेकावर के मार्गदर्शन में कलारी (भारतीय मार्शल आर्ट ) सीखते हैं। 

चंदू को अपने जीवन में हमेशा हार का ही सामना करना पड़ता है वो भी अरोमल की वजह से और अरोमाल चंदू को दुःख देने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता।  चंदू की मंगनी अरोमल की बहन अन्नियारचा से होती है मगर अरोमल यह शादी नहीं होने देता और वह खुद कुन्जिनोली के साथ शादी कर लेता है जो चंदू से बेहद प्रेम करती थी। उसके बाद चंदू कलारी में महारत हासिल करने में व्यस्त हो जाता है। 

एक दिन फ्यूडल लॉर्ड अनइंडहैंडर चंदू के गुरु अरिंगोडर के सामने अपने भाई उन्नीकोनार के साथ मॉप्पू के झगड़े के खिलाफ एक एंगम खेलने का प्रस्ताव रखता है और उन्नीकोनार की जगह अरोमल और  मॉप्पू की जगह अरिंगोडर को युद्ध करने का भी प्रस्ताव रखता है , जिसको वह मान जाता है।  अरोमल के पिता यह कहते हैं कि चंदू अरोमल का साथ दे। ना चाहते हुए भी चंदू को अपने गुरु को छोड़कर अपने भाई का साथ देना पड़ता है। 

युद्ध प्रारम्भ होने से पहले चंदू अरोमल की तलवार बनाने के लिए लोहार के पास जाता है और उसी समय अरिंगोडर की बेटी कुंजजी लोहार को रिश्वत देती है और अरोमल की तलवार को बेकार करने को कहती है। दूसरे दिन युद्ध आरम्भ होता है और युद्ध में अरोमल की तलवार टूट जाती है और उसी समय चंदू बीच में आ जाता है और अरिंगोडर को रोकता है उतने में ही अरोमल अरिंगोडर को धोखे से मार देता है और अरोमल विजेता घोषित हो जाता है। 

अरोमल अपने विश्राम स्थल की तरफ जाता है और उसके पीछे चंदू भी जाता है और वहां पहुंचकर चंदू उस पर धोखा देने का इलज़ाम लगता है मगर उसके बदले अरोमल चंदू पर धोखा देने का आरोप लगता है कि उसी ने लोहार से कहकर तलवार को इतना बेकार बनवाया था कि वह इतनी जल्दी टूट गयी। दोनों के झगडे से दीपक की लौ गिर जाती है और टेंट में आग लग जाती है जिससे अरोमल की मृत्यु हो जाती है। 

चंदू लोहार का पीछा करता है और उसको यह पता चलता है कि रिश्वत कुंजजी ने दी थी।  उसके बाद चंदू कुंजजी की खोज करते हुए अरिंगोडर के घर जाता है तो वहां उसको पता चलता है कि कुंजजी ने आत्महत्या कर ली है। 

कुछ वर्षों बाद बदला लेने के लिए अरोमल उन्नी और कन्नपन उन्नी ( अरोमल चेकावर के बेटे ) अरिंगोडर के विद्यालय आते हैं, चंदू उन दोनों को समझाता है कि वह ऐसा कुछ भी न करे।  मगर वह दोनों नहीं मानते और चंदू को लड़ने के लिए आह्वान करते हैं चांदी उन दोनों से युद्ध करता है और दोनों को हरा देता है। मगर दोनों नहीं मानते, हारने के बाद भी फिर से द्वन्द करना चाहते हैं , इसी बीच चंदू को पता चलता है कि वह कन्नप्पन के पोते हैं तो चंदू रुक जाता है क्योकि वह उसके पुत्रों के जैसे ही हैं और वह युद्ध करने से मना कर देता है और तलवार से खुद को मार लेता है।  इसी के साथ फिल्म का अंत हो जाता है।

Songs & Cast – इस फिल्म के संगीतकार बॉम्बे रवि ने 5 सुपर हिट गानों से फिल्म को आनंदमयी बनाया है। “चंदनलेप सुगंधम ചന്ദനലേപ സുഗന്ധം“, “उन्नी गणपति थम्बुराने ഉണ്ണി ഗണപതി തമ്പുരാനെ“, “इंदुलेखा कंथुरन्नु ഇന്ദുലേഖ കന്തുരാന്നു“, “कलारिविलक्कू थेलिनजथानो കളരിവിലക്കു തെലിഞ്ചതാനോ” और इन गानों में आवाज़ दी है – के जे येसुदास, के एस चित्रा और आशा लता ने। 

 किसी भी फिल्म को सुपर हिट बनाने में उनके कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान होता है, इस फिल्म में भी ममूट (चंदू चेकावर ), बालन (कन्नप्पन चेकावर ), सुरेश गोपी (अरोमल चेकावर ),माधवी (उन्नाव ),कैप्टन राजू (अरिंगोडर चेकावर ), गीता ( कुंती ) और अन्य कलाकारों ने इस फिल्म में बेमिसाल अदाकारी की है। 
   
 इस फिल्म की अवधि 2 घंटे और 50 मिनट्स हैं (170 मिनट्स )और यह फिल्म गृहलक्ष्मी प्रोडक्शन कमपनी के तहत बनी है।  

Location – इस फिल्म को दर्शाया गया है दक्षिण भरता के बेहद खूबसूरत प्रदेश केरल के त्रिशूर जिले के कोट्ट्पडी में स्थित पुन्नाथुरकोटा किले और महल में।

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