Andaz – ग़लतफ़हमी में लिए गए एक गलत फैसले से बदलता जीवन

 जिंदगी हर पल बदलती रहती है कभी यह खुशियां लेकर आती है तो कभी हज़ारों गम और कभी तो हमारी सोच हमें एक में ले जाती है जहाँ पर जाने का तो रास्ता होता है मगर लौटने का नहीं। हमारा लिया गया एक फैसला कभी कभी सब कुछ आबाद कर देता है तो कभी सब कुछ बर्बाद। ऐसा ही कुछ एक हिंदी फिल्म में दिखाया गया है जिसका नाम अंदाज़ है और  निर्देशक ने यह बताया है इस फिल्म के जरिये कि किस तरह आपका लिया गया एक गलत फैसला आपसे जुड़े हुओं की जिंगदी ही ख़तम कर देता है।  

अंदाज़ फिल्म भारतीय सिनेमा में 26 अगस्त 1949 को तीन बड़े कलाकारों के साथ रिलीज़ हुयी। इसका निर्देशन महबूब खान ने किया और इस फिल्म से नरगिस, दिलीप कुमार और राज कपूर के फ़िल्मी सफर ने इसकी सफलता के साथ एक नए आयाम की रचना की। यह एक ही ऐसी फिल्म बनी जिसमे दो दिग्गजों दिलीप कुमार और राज कपूर ने एक साथ काम किया, इसके बाद यह दोनों कभी साथ नहीं आये। 

Story –

फिल्म की कहानी शुरू होती है एक अमीर बाप की बिगड़ी हुयी बेटी नीना से, जो अपना जीवन बड़े ही आनंद से जी रही होती है। एक दिन वह घुड़सवारी करते समय घोड़े पर से अपना नियंत्रण खो देती है और उसकी जान बचाता है एक युवा दिलीप। नीना की जान बचाते समय दिलीप अपना दिल भी खो बैठता है और वह नीना से प्रेम करने लगता है। जान बचाने की वजह से नीना उसको अपना अच्छा दोस्त बना लेती है और शुरू होता है दिलीप का नीना के घर पर आना जाना। 

जहाँ एक तरफ दिलीप नीना की सहेली शीला की संगीत सीखने में मदद करता है तो वहीँ दूसरी तरफ नीना के पिता को दिलीप का यू उनके साथ घुलना मिलना पसंद नहीं आता, वह कई बार नीना से इस बारे में बात भी कर चुके हैं कि दिलीप तुम्हारी दोस्ती को प्यार समझ सकता है मगर नीना के लिए तो वह सिर्फ एक दोस्त ही होता है और उसको यह लगता है कि दिलीप भी उसे सिर्फ एक दोस्त ही समझता है। 

शीला के जन्मदिन की पार्टी में दिलीप नीना को अपने प्रेम के बारे में बताने का निर्णय लेता है और वह यह बात नीना को बताने की कोशिश भी करता है मगर उसी समय नीना के पिता की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो जाती है। नीना पूरी तरह से बिखर जाती है तब दिलीप उसको संभालता है और तब नीना दिलीप से उसके पिता का कारोबार सँभालने को कहती है क्योंकि नीना को उस पर पूरा विश्वास होता है, दिलीप भी हामी भर देता है और सोचता है कि जब सब कुछ ठीक हो जायेगा तो फिर वह अपने दिल की बात नीना को बताएगा। 

मगर उसका यह भ्रम शीघ्र ही टूट जाता है जब नीना का मंगेतर राजन लन्दन से लौटता है और कुछ समय बाद दोनों विवाह कर लेते हैं।  विवाह वाले दिन दिलीप नीना को अपने दिल की बात बताता है तो नीना हैरान हो जाती है क्योंकि दिलीप उसके लिए एक दोस्त से ज्यादा नहीं था।  नीना दिलीप को समझती है कि वह सिर्फ राजन से ही प्यार करती है और दिलीप से उसको भूलने की बात कहती है। 

समय बीतता है और राजन और नीना एक बेटी के माता पिता बन जाते हैं और अपना जीवन ख़ुशी से बिता रहे थे। अपनी बेटी के जन्मदिन पर दिलीप को देखकर नीना परेशां हो जाती है। फिर एक दम से घर की बिजली चली जाती है और नीना दिलीप समझकर राजन से प्रार्थना करती है उसको भूल जाने की।  यह बात सुनकर राजन को बहुत गुस्सा आता है और वह नीना पर बेवफाई का इलज़ाम लगता है। दिलीप कोशिश करता है राजन को प्यार से समझने की कि ऐसा कुछ नहीं है मगर वह नहीं सुनता तो दोनों में झगड़ा हो जाता है और राजन दिलीप पर एक ऐसा वार करता है कि वह बेहोश हो जाता है।

 नीना की बेगुनाही साबित सिर्फ दिलीप ही कर सकता है यह सोचकर नीना उसको डॉक्टर के पास ले जाती है और दूसरी तरफ राजन अपनी बेटी के साथ घर छोड़ देता है। दिलीप को होश आता है और वह पागल जैसा व्यव्हार करने लगता है इतना ही नहीं वह नीना के साथ छेड़छाड़ भी करता है और दवाब देकर कहता है कि वह सिर्फ उसी की है यह सुनकर नीना को गुस्सा आ जाता है और वह पिस्तौल चला देती है और गोली दिलीप को लग जाती है और उसकी मृत्यु वहीँ हो जाती है।  पुलिस नीना को गिरफ्तार करके ले जाती है। 

अदालत में राजन ने नीना के खिलाफ गवाही दी कि किस तरह नीना ने बेवफाई की और फिर उसको छुपाने के लिए किस तरह दिलीप की हत्या की। नीना कुछ नहीं कहती सिर्फ बूत बनकर सुनती ही रहती है हर इलज़ाम को और अदालत का फैसला आने का इंतज़ार करती है। राजन अपनी बेटी से कहता है कि अब कभी भी उसकी माँ वापस नहीं आएगी यह सुनकर बेटी अपनी गुड़िया को लिए रोने लगती है।  राजन उसको चुप करता है और देखता है कि यह गुड़िया तो दिलीप ने दी थी  बेटी को उसमे एक पत्र भी मिलता है जिसमे लिखा होता है कि वह अब यह समझ चुका है कि नीना सिर्फ राजन से ही प्रेम करती है.

यह बात जानकर राजन को बहुत अफ़सोस होता है अपनी गलतफहमी का और नीना पर लगाए गए सारे आरोपों का , जब तक वह कुछ कर पता नीना को उम्र कैद की सजा हो जाती है।  जेल जाने से पहले नीना अपने पति और बेटी से मिलती है और राजन उससे माफ़ी मांगता है अपने किये गए हर गुनाह की। 

Songs & Cast 

फिल्म में संगीत नौशाद ने दिया है और गानों के बोल लिखे हैं मजरूह सुल्तानपुरी ने।  इस फिल्म में कुल 10 खूबसूरत गाने दिए गए हैं  – “हम आज कह दिल खो बैठा”, “मेरी लाडली रे”, “झूम झूम के नाचो आज”, “कोई मेरे दिल में है”, “डर ना मोहब्बत करले “, “यूं तो आपस में बिगड़ते हैं”, “तोड दीया दिल मेरा”, “टूटे  ना दिल टूटे ना “, “तू कहे अगर”,  और इन सुरीले गानों को आवाज़ दी है मुकेश , लता मंगेशकर , मोहम्मद रफ़ी और शमशाद बेगम ने। 

फिल्म को सुपरहिट बनाने में दिलीप कुमार, राज कपूर और नरगिस का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसमे नरगिस ने नीना का किरदार निभाया है और दिलीप कुमार ने दिलीप का और राज कपूर ने राजन का किरदार निभाकर इस फिल्म को सुपरहिट बनाया है और उनके आलावा अन्य कलाकार जैसे – कुक्कू ( शीला ) और मुराद (बद्रीप्रसाद, नीना के पिता ), आमिर बानो, अब्दुल। 

इस फिल्म की अवधि 2 घंटे और 27 मिनट्स है (147 मिनट्स ) और इस फिल्म का निर्माण महबूबा खान ने  किया है। 

Location – फिल्म की शूटिंग मुंबई में स्थित महबूब स्टूडियो में हुयी थी। 

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