Chalti ka Naam Gadi – एक लड़की भीगी – भागी सी, रातों में सोई जागी सी

चलती का नाम गाड़ी एक ऐसी फिल्म है जो आज भी सभी के द्वारा पसंद की जाती है। यह फिल्म 1 जनवरी 1958  को भारतीय सिनेमा में आयी और आते ही सभी की पसंदीदा फिल्म बन गयी। इस  निर्देशन सत्येन बोस  ने किया था। यह एक बेहद प्रसिद्ध क्लासिक कॉमेडी हिंदी फिल्म है और इस फिल्म के गाने आज भी सभी के दिलों में राज करते हैं जैसे – बाबू समझो इशारे होरन पुकारे और एक लड़की भीगी भागी सी रातों में सोई जागी सी।

यह एक सुपरहिट हास्य फिल्म है और आज भी यह हर सभी हास्य फिल्मो में मील का पत्थर साबित हुयी है।  फिल्म तीन भाइयों आधारित है जो अपनी अलग अलग सोच के साथ जीवन के हर उतार चढ़ाव को साथ मिलकर झेलते हैं।

Story –

कहानी शुरू होती है तीन भाइयों के साथ बृजमोहन, मनमोहन जगमोहन शर्मा से ,जो गैराज के मालिक हैं। बड़े भाई बृजमोहन को महिलाओं नफरत होती है जिसकी वजह से उनके गैराज में किसी भी महिला का आना वर्जित है। एक दिन मनमोहन रात में गैराज में काम करते -करते सो गया था उसी समय वहां पर एक लड़की रेनू अपनी गाड़ी ख़राब होने की वजह से सहायता मांगने आती है और मोहन को सोता देखकर उस पर बहुत नाराज़ होती है। 

मनमोहन उसको समझाने की बहुत कोशिश करता है मगर उनकी नोंक झोंक चलती रहती हैं और गाड़ी ठीक हो जाती है। उसके बाद रेनू गाड़ी लेकर जल्दी में वहां से चली जाती है और कुछ समय बाद मनमोहन को याद आता है कि रेनू ने तो गाड़ी ठीक करवाने के पैसे ही नहीं दिए। यह बात वह अपने बड़े भाई बृजमोहन को बताता है तो वह कहता है कि कोई बात नहीं वह भूल गयी होगी मगर मनमोहन को तो अपने पैसे चाहिए, उतने में ही उन्हें रेनू का पर्स दिखता है जिसे शायद वह गलती से भूल गयी होगी।

पहले तो मनमोहन सोचता है कि वह अपने पैसे पर्स से निकालकर फिर पर्स को रेनू को देगा मगर उसको ऐसा करना गलत लगता है और वह रेनू से ही पैसे लेना चाहता है इसके लिए वह रेनू से मिलने एक संगीत कार्यक्रम में जाता है जहाँ पर उसे अंदर नहीं जाने दिया जाता क्योकि उसके पास रेनू के नाम का पास होता है जो उसे रेनू के पर्स से मिला था। अपने पैसे को ना जाने देने की सोच से मनमोहन बाहर हो कार में उसका इंतज़ार करता है और कुछ समय बाद उसको नींद आ जाती है । थोड़ी देर में रेनू आती है और उसे बिना देखे ही कार में बैठकर घर चली जाती है। जब मनमोहन जागता है तो अपने आप को रेनू के गैराज में पाता है, उसी समय उसको जोर से भूख भी लगती है और वह खाने की तलाश में गैराज में खाना ढूंढता है। घर के नौकर की नज़र मनमोहन पर पड़ती है और यह देखकर वह वहां से भाग जाता है।

  जब वह घर जा रहा होता है तो उसकी नज़र कुछ लोगों पर पड़ती है जो सुनसान जगह पर एक लाश को फेंक रहे थे। मनमोहन घर पहुंचकर सारा किस्सा अपने भाइयों को बताता है और गैराज वाली बात पर दोनों भाई उसका मज़ाक बनाने लगते हैं। एक दिन रेनू का फ़ोन आता है गाड़ी को ठीक करवाने के लिए मगर मनमोहन मना कर देता है क्योकि पहले भी रेनू ने उसको पैसे नहीं दिए थे मगर रेनू इस बार पैसे देने का वादा करती है तब जाकर मोहन अपने छोटे भाई जग्गू को भेजता क्योकि उसको डर होता है रेनू के नौकर द्वारा पहचाने जाने से और उसके बाद की बेज़्ज़ती होने से। जगमोहन रेनू के घर जाता और उसकी मुलाकात शीला से होती है , शीला के आस पास होने से वह इतना घबरा जाता है कि बिना गाड़ी ठीक किये घर आ जाता है।

फिर रेनू सिर्फ मोहन को ही बुलाने का निर्णय लेती है अपनी गाड़ी को ठीक करने के लिए, मोहन आता है और गाड़ी ठीक करके जाता है। धीरे धीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ती हैं और दोनों एक दूसरे से प्रेम करने लगते हैं। वहीँ जग्गू और शीला भी एक दूसरे की मोहब्बत में डूब चुके हैं। 

रेनू के पिता उसका विवाह राजा हरदयाल सिंह के छोटे भाई से तय कर देते हैं बिना यह जाने कि हरदयाल और उसका पूरा परिवार गुंडे – बदमाश हैं और वह यह शादी सिर्फ रेनू की वसीयत के लिए कर रहे हैं। रेनू इस विवाह के लिए मना कर देती है और अपने पिता को अपने और मनमोहन के प्रेम के बारे में बताती है। उधर जब यह बात हरदयाल को पता चलती है तो वह रेनू और मनमोहन का अपहरण कर लेता है और अपने घर रखजहाँ पर रेनू की मुलाकात कामिनी से होती है जिसका फोटो रेनू ने बृजमोहन के कमरे में देखी थी। 

कामिनी से उसे पता चलता है कि कामिनी और बृजमोहन एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे मगर कुछ हालातों के चलते उसे हरदयाल से विवाह करना पड़ता है और इसी वजह से आज तक बृजमोहन औरतों से नफरत करता है। कामिनी दोनों को भगाने में मदद करती है और रेनू उसको भी जबरदस्ती अपने साथ ले जाती है। वहीँ दूसरी तरफ हरदयाल रेनू के पिता को बंधक बना लेता है और रेनू की शादी का दवाब डालता है इसके बाद वह रेनू को भी धमकी देता है कि अगर उसने विवाह के लिए हामी नहीं भरी तो वह मनमोहन को मार देगा। 

कामिनी बृजमोहन से मिलती है और सब कुछ बता देती है और बृजमोहन अपने ज़माने का प्रसिद्ध बॉक्सर अपने भाइयों के साथ मिलकर हरदयाल और उसके सभी साथियों को मार गिराते हैं। और अंत में बृजमोहन कामिनी से विवाह करता है और मनमोहन रेनू के साथ और जगमोहन शीला के साथ विवाह के बंधन में बंध जाते है।

Songs & Cast –

इस Classic Comedy फिल्म का संगीत एस डी बर्मन ने दिया है और इन गीतों को लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने। “बाबू समझो इशारे होरन पुकारे “, हाल केसा है जनाब का”, एक लड़की भीगी भागी सी रातों में सोई जागी सी”, “रुक जाओ ना जी “, हम तुम्हारे हैं “, “में सितारों का तराना “, “हम थे वो थी और समां रंगीन “, “इन हाथों से सब की गाड़ी ” और इन गानो को गया है किशोर कुमार, मन्ना डे , सुधा मल्होत्रा और आशा भोंसले ने। 

यह फिल्म तीन भाइयों पर आधारित है और  भाइयों का किरदार अशोक कुमार (बृजमोहन ), किशोर कुमार (मनमोहन ) और अनूप कुमार ( जगमोहन ) ने निभाया है और उनका साथ दिया है मधुबाला (रेनू ), साहिरा (शीला ), वीना (कामिनी ), के एन सिंह ( राजा हरदयाल सिंह ) और अन्य कलाकारों ने। 

इस फिल्म की अवधि 2 घंटे और 53 मिनट्स (173 मिनट्स) है और इस फिल्म का निर्माण अनूप शर्मा ने किया था। 

Location –  इस फिल्म की शूटिंग मुंबई के विभिन्न खूबसूरत जगहों पर की गयी थी। 

 

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