Devadasu (దేవదాసు) – समाज द्वारा मोहब्बत को नकारा जाना

जब हम प्रेम या मोहब्बत करते हैं और वह प्रेम जब समाज के द्वारा नकारी जाती है तो उस प्रेम कहानी का बेहद ही दुखद अंत होता है, कुछ यह अंत बर्दाश्त नहीं कर पाते और अपना जीवन समाप्त कर लेते हैं और कुछ इस दर्द को जीवन भर बर्दाश्त करने की कोशिश में लगे रहते हैं।

ऐसी ही एक कहानी है देवदासु की, यह एक तेलुगु फिल्म है जो 26 जून 1953  हुयी थी और इसका निर्देशन Vedantam Raghavaiah ने किया था।  यह  फिल्म तेलुगु में आने के 3 महीने बाद ही 11 सितंबर 1953 तमिल में भी रिलीज़ की गयी।

Story – 

फिल्म की कहानी शुरू होती है रावदापल्ली के जमींदार नारायण राव से, जो जमींदार होने के साथ – साथ पूरे प्रान्त के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति है। और उनका एक लौता बेटा देवदासु, जो बिलकुल विपरीत है नारायण राव से, जहाँ नारायण राव गरीबो को पसंद नहीं करते वहीँ देवदासु की सबसे अच्छी दोस्त पार्वती एक निर्धन परिवार के नीलकंठम की बेटी है।

नारायण राव को देवदासु और पार्वती की दोस्ती पसंद नहीं थी तो उन्होंने अपने बेटे को शहर के बॉडिंग स्कूल में पढ़ाई करने के लिए भेज दिया। कुछ वर्षों के बाद देवदासु अपनी पढ़ाई पूरी करके गांव लौटकर आता है। धीरे – धीरे पार्वती से दोस्ती उसकी प्यार में बदल जाती है और दोनों के प्रेम की दास्तान सभी को पता चल जाती है। 

इस प्रेम को रिश्ते में बदलने के लिए पार्वती की दादी नारायण राव के सामने शादी का प्रस्ताव लेकर जाती है, जिसे नारायण राव बड़ी ही बेज्जती के साथ नकार देता है।  यह बेज्जती देखकर उसी समय नीलकंठम निर्णय करता है अपनी बेटी की शादी एक बहुत धनी परिवार में करने की। और बहुत जल्द ही वह अपनी बेटी पार्वती का विवाह दुर्गमपुर के जमींदार से पक्की कर देता है।

और वह जमींदार एक विधुर बुजुर्ग होता है।  यह बात जानकार पार्वती देवदासु से उससे विवाह करने का अनुरोध करती है लेकिन वह माता पिता की बात का सम्मान रखकर पार्वती के अनुरोध को ठुकरा कर शहर वापिस चला जाता है।

पार्वती का विवाह हो जाता है और वह अपने परिवार में बस जाती है। मगर देवदासु पार्वती को नहीं भूल पाता और उसके विरह में शराब पीने लगता है। यह देखकर देवदासु का मित्र भागवान उसको एक तवायफ चंद्रमुखी के पास ले जाता है यह सोचकर कि चंद्रमुखी की खूबसूरती की छांव में वह शायद पार्वती को भूल जाये और अपने जीवन को एक नयी दिशा की तरफ ले जाए।

देवदासु चंद्रमुखी से मिलता है मगर वह उससे भी हर समय सिर्फ पार्वती की ही बातें करता रहता है।  देवदासु का पार्वती  के प्रति अत्यंत प्रेम को देखकर चंद्रमुखी उससे वापिस गांव लौटने को कहती है। उसकी बात मानकर देवदासु अपने गांव लौटने क लिए निकलता है मगर बहुत शराब का सेवन उससे अपने गांव नहीं लौटने देता और वह पार्वती के घर के सामने ही उसकी चौखट पर ही दम तोड़ देता है।

यह देखकर पार्वती उससे मिलने जाने की कोशिश करती है मगर परिवार द्वारा उसको रोक दिया जाता है और इसी तरह से एक प्रेम कहानी का दुखद अंत हो जाता है। 

Songs & Cast – 

इस फिल्म में संगीत सी आर सुब्रमणियम ने दिया है और उन्होंने इस फिल्म में बेहद सुरीले 11 गाने दिए हैं।  “Andaala Anandam అండాలా ఆనందం”, ” Jagame Maya జగమే మాయ”, “O Devada ఓ దేవాడ”, ” Kala Idani కాలా ఇడాని”, “Palleku Podam పల్లెకు పోడం”, ” Kudi Yedamaithe కుడి యేడమైతే” आदि अन्य और भी गाने हैं जिन्हे Ghantasala, K. Rani, R. Balasaraswathi Devi और Udutha Sarojini ने अपने सुरों से सजाया है। 

इस फिल्म में Akkineni Nageswara Rao (देवदासु), Savitri (पार्वती ), Lalitha (चंद्रमुखी ), Master sudhakar (देवदासु ), Baby Anuradha (पार्वती) और कई कलाकारों ने बेहद ही संजीदा अदाकारी का प्रदर्शन किया है।  

इस फिल्म की अवधि 3 घंटे और 11 मिनट्स (191 मिनट्स ) और आज भी यह फिल्म ब्लैक & वाइट ही है। और इस फिल्म को  विनोधा पिक्चर्स के तहत डी एल नारायणा ने निर्माण किया है।

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