Devasuram (ദേവാസുരം) – मोहनलाल की सुपरहिट फिल्मों में से एक

फिल्में जब बनती हैं तो एक सोच के साथ, मगर जब दर्शकों के बीच आती है तो एक मेसेज देकर जाती है।  कभी वह हमें नई सोच देता है तो कभी परिवार की अहमियत बताता है, कभी – कभी नए आइडियाज देता है तो कभी सच जानकर जिंदगी को सँभालने का तरीका।

 एक ऐसी ही मलयालम फिल्म है ” Devasuram (ദേവാസുരം)”जिसका इंग्लिश में अर्थ – God – Deman से है।  यह फिल्म 1993 में रिलीज़ हुयी और इसका निर्देशन I.V. Sasi ने किया था।  यह फिल्म एक सुपरहिट पारवारिक फिल्म है।

Story – 

 कहानी शुरू होती है नीलकंदन से, जो गाँव के एक अमीर मंगलसरी खानदान का वारिस है, वहीँ दूसरी तरफ एक और बड़ा खानदान मुंडक्कल है जिसका वारिस शेखरन है।  नीलकंदन के एक साथी के द्वारा गलती से शेखरन के चाचा की मृत्यु हो जाती है, जिसका जिम्मेदार शेखरन नीलकंदन को समझता है और उसको मारना चाहता है।

 एक दिन नीलकंदन की मुलाकात भानुमति से होती है, जो एक बहुत अच्छी भरतनाट्यम नृत्यांगना है। उसको भानुमति का नृत्य इतना प्रभावित होता है कि वह उससे आग्रह करता है कि वह अपना नृत्य उसके घर पर आकर दिखाएं, नीलकंदन भानुमति को जबरदस्ती अपने घर पर ले आता है नृत्य करने के लिए। भानुमति दुखी मन से नृत्य करती है फिर थोड़ी देर बाद वह नृत्य करते करते रुक जाती है और यह फैसला लेती है कि वह अब कभी भी मृत्य नहीं करेगी। नीलकंदन को अपने किए गए व्यव्हार का बहुत अफसोस होता है और वह इसके लिए वह भानुमति से माफी भी मांगता है मगर भानुमति गुस्से में चली जाती है।

उसके बाद नीलकंदन अपनी मां से मिलता है उनको घर वापस लाने के लिए, लेकिन मां उसे उसके पिता की सच्चाई बताकर इस दुनिया से रुखसत हो जाती हैं। नीलकंदन को जब  यह पता चलता है कि जिनको वह अपना पिता मानता है ना तो वह उसकेअसली पिता है और ना ही यह  विरासत उसकी है।
    नीलकंदन फिर से भानुमति से मिलने जाता है और फिर से आग्रह करता है नृत्य करने की, मगर भानुमति इतनी नाराज होती है कि वह उससे कहती है कि वहअब नृत्य उसकी मृत्यु के बाद ही शुरू करेगी। उसी रात नीलकंदन जब घर वापस लौट रहा होता है तो शेखरन और उसके साथी हथियारों से उस पर हमला करते हैं जिससे नीलकंदन गंभीर रूप से घायल हो जाता है।
अपने इलाज के लिए नीलकंदन आयुर्वेदिक उपचार का सहारा लेता है और उसी दौरान नीलकंदन को भानुमति से प्यार हो जाता है, पर उसे भानुमति के साथ किए गए दुर्व्यवहार का भी बहुत अफसोस होता है। धीरे-धीरे नीलकंदन भानुमति के दिल में पनपी नाराज़गी को कम करने का प्रयास करता है और एक दिन उसको नृत्य करने के लिए मना लेता है। उसके बाद वह भानुमति के लिए दिल्ली में एक नृत्य कार्यक्रम का आयोजन भी करता है, यह सब देखकर भानुमति भी उस से प्रेम करने लगती है।

 

    परिवार के सभी लोगों को उनके प्रेम के बारे में पता चलता है और उनके विवाह के बारे में सोचते हैं, मगर तभी नीलकंदन इस विवाह के लिए मना कर देता है उसके बाद परिवार द्वारा समझाए जाने पर वह राजी हो जाता है। वहीं दूसरी तरफ शेखरन अपनी  शत्रुता के चलते भानुमति का अपहरण उसी समय करता है जब मुंडक्कल परिवार द्वारा गांव में वार्षिक उत्सव मनाया जा रहा था। नीलकंदन शेखरन को मारकर भानुमति को बचा लेता है और दोनों का विवाह हो जाता है।
Songs & Cast – 

यह फिल्म 13 सुरीले गानों के साथ बनायीं गयी है।  इसके सभी गानों को  K. S. Chithra,  M. G. Sreekumar. Radhakrishnan और  B. Arundhathi सभी ने मिलकर बहुत ही सुरीले अंदाज़ में गाया है,  ” किषाक्कनम കിഷാക്കന്നം” , ” अंगोपंगन അംഗോപംഗൻ”, ” माप नालकु മാപ്പ് നാൽക്കു”,

      इस फिल्म में मोहनलाल ,रेवती , रामू , चित्रा और अन्य कलाकारों ने अपने अभिनय से इस फिल्म को सुपर हिट बनाया।

 

Location –  इस फिल्म की शूटिंग केरला के अलग – अलग जिलों के कई बेहद खूबसूरत शहरों में की गयी है। Manissery, Ottappalam, Palakkadइन सभी स्थानों पर केरला का  कल्चर और आर्किटेक्चर का कॉम्बिनेशन मिलता है।   

 

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