Mahal – आएगा आने वाला आएगा

महल फिल्म भारतीय सिनेमा की पहली डरावनी फिल्म थी, जो हिंदी सिनेमा में 12 अक्टूबर 1949 को आयी थी और इसका निर्देशन कमाल आमरोहि ने किया था। यह भारत की पहली पुनर्जन्म थ्रिलर फिल्म थी और यह  1949 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तीसरी फिल्म बनी और इसके बाद इसकी अदाकारा, मधुबाला रातोंरात सुपरस्टार बन गईं।

इस फिल्म में कुछ सदाबहार सुपरहिट गाने भी है जैसे – आएगा आने वाला आएगा आज भी गुनगुनाये।  फिल्म की कहानी आधारित है एक महिला के पुनर्जन्म पर। 

Story –  कहानी शुरू होती है इलाहबाद के एक खूबसूरत महल से, जहाँ माना जाता है कि इस पर प्रेत आत्माओं का प्रकोप है। मगर इस महल का नया मालिक हरी शंकर इन सब बातों में यकीं नहीं करता है वह पेशे से वकील होने के नाते यह सब मज़ाक और फालतू की बात समझता है और वह यह सब ना मानते हुए उस महल में शिफ्ट हो जाता है। 

उस महल का पुराना माली शंकर को इस महल से जुडी हुयी कहानी बताता है कि इस खूबसूरत महल को40 वर्ष पहले एक आदमी ने बनवाया था और वह अपनी प्रेमिका कामिनी के साथ यहाँ रहता था।  एक दिन तूफानी रात में उस व्यक्ति का जहाज़ डूब गया और वह वापस लौटकर नहीं आया मगर जाने से पहले उसने अपनी प्रेमिका कामिनी को बोला था कि उनका प्रेम कभी विफल नहीं हो सकता है और वह फिर से जन्म लेंगे और इसके कुछ दिनों के बाद कामिनी की भी मृत्यु हो जाती है। 

उसके बाद शंकर अपने कमरे में जाता है तो हवा के एक झोंके से तस्वीर गिर आती है और उस तस्वीर को देखकर शंकर हैरान हो जाता है कि उस तस्वीर में जो इंसान है वह हूबहू उससे मिलता है। उतने में ही उसे एक महिला के गाने की आवाज़ सुनाई देती है और वह उसी महिला को एक कमरे में बैठा हुआ पाता है और जैसे ही वह वहां जाता है वह भाग जाती है। 

दूसरे दिन सुबह शंकर का मित्र श्रीनाथ आता है और वह सारी कहानी अपने मित्र को बता देता है और वह यह भी कहता है कि शायद इस तस्वीर में जो इंसान है वह वो खुद है मगर श्रीनाथ शंकर के इस भ्रम को अपने तथ्यों से दूर कर देता है। रात होती है और दोनों मित्रों को फिर से वही महिला दिखती है और वह दोनों को छत पर ले जाती है, जहाँ वह वहां से पानी में कूद जाती है, दोनों आकर देखते हैं कि नीचे ना तो पानी है और ना ही वह महिला। 

दूसरे दिन दोनों ट्रेन के द्वारा अपने घर कानपुर के लिए रवाना हो जाते हैं, नैनी में, शंकर ट्रेन से उतरता है और महल में जाता है जहाँ कामिनी उसे बताती है कि वह असली में है और उसके साथ जीवन बिताना चाहती है लेकिन श्रीनाथ वहां आ जाता है और भूत पर गोली चलाता है, जिसका प्रभाव उस पर नहीं होता और वह श्रीनाथ को उन दोनों से दूर रहने की चेतावनी देकर वहां से चली जाती है। 

कामिनी, शंकर से फिर से मिलती है और कहती है कि वह किसी भी महिला के शरीर में प्रवेश कर सकती है जिसे शंकर पसंद करता हो, तो वह दोनों फिर से अपना जीवन ख़ुशी से व्यतीत कर सकते हैं। वह शंकर से कहती है कि उस माली की बेटी का चेहरा उससे हूबहू मिलता है तो शंकर माली की बेटी आशा को मार दे ताकि वह उसके शरीर में प्रवेश कर लेगी। शंकर ऐसा करने से मना कर देता है।

इन सब को भूलने के लिए शंकर के पिता उसका विवाह रंजना से कर देते हैं और शंकर कामिनी को भूलने के लिए अपनी पत्नी रंजना के साथ दूर जाने का फैसला करता है। दो साल बाद, एक दिन रंजना को पता चलता है कि हर रात उसका पति किसी कामिनी से मिलने जाता है और कामिनी एक भूत है और वह यह चाहती है कि शंकर माली की बेटी आशा को मार दे ताकि कामिनी उसके शरीर का उपयोग कर सके और दोनों एक साथ अपना जीवन व्यतीत कर सके।

इस धोखे से दुखी – परेशान रंजना जहर पी लेती है और पुलिस स्टेशन जाकर शंकर के खिलाफ मौत का इकबालिया बयान भी देती है कि शंकर ने ही उसे जहर दिया है।पुलिस शंकर को पकड़ लेती है  और अदालत में पेशी होती है जहाँ पर माली की बेटी आशा को भी बुलाया जाता है शंकर और  रंजना के बीच दूरी के कारण के आरोप के लिए।  

इसके बाद आशा सच्चाई उजागर करती है कि कामिनी का किरदार उसका खुद का रचा हुआ है क्योकि उसको उस तस्वीर वाले व्यक्ति से प्रेम हो गया और शंकर की सूरत उससे हूबहू मिलती है तो वह कामिनी के किरदार और पुन जन्म वाली कहानी से शंकर को मज़बूर करना चाह रही थी उसके साथ रहने के लिए। अदालत शंकर को मौत की सजा सुनाती है।  

Songs & Cast – इस फिल्म में खेमचंद प्रकाश ने संगीत दिया है और नक्शब जारचवी ने इन बेहतरीन गीतों को बोल दिए हैं, इस फिल्म में 7 बेहद प्रसिद्ध गाने हैं – “आएगा आने वाला आएगा “, “छन छन घुँगुरुवा बाजे “, “दिल ने फिर याद किया “, “मुश्किल है बहुत मुश्किल है “, “एक तीर चला दिल पे लगा “, “मै वो हसी हूँ लब पे जो आने से रह गयी “, ” घबराके जो हम सर को टकराएं”, और इन गीतों में अपनी आवाज़ दी है लता मंगेशकर, राजकुमारी और ज़ोहराबाई अम्बावाली ने। 

यह पहली भारतीय डरावनी फिल्म थी और इसके कलाकारों ने पहली बार ऐसा अभिनय किया जिसको आज तक याद किया जाता है।  फिल्म में अशोक कुमार ने हरी शंकर का किरदार निभाया है और मधुबाला ने कामिनी और आशा का और इसमें इनका साथ दिया है एस नज़ीर, लीला पांडे, कानु रॉय (श्रीनाथ), इरुच तारापोर, विजयलक्ष्मी (रंजना ), जगन्नाथ, लक्ष्मण राव, राजा सलीम ने। 

इस फिल्म की अवधि 2 घंटे और 45 मिनट्स हैं और इसका निर्माण अशोक कुमार और सावक वचा ने किया था। 

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