दादासाहेब फाल्के के बाद क्या हुआ — भारतीय साइलेंट सिनेमा के वो दस साल जो कोई नहीं जानता
1913 से 1931 के बीच एक पूरी दुनिया बनी थी — जिसे इतिहास ने सिर्फ एक नाम देकर भुला दिया…
Movie Reviews – Connect to Life
1913 से 1931 के बीच एक पूरी दुनिया बनी थी — जिसे इतिहास ने सिर्फ एक नाम देकर भुला दिया…
एक सुबह अमिताभ बच्चन अपनी गाड़ी में बैठे मुंबई के सांताक्रूज इलाके से गुज़र रहे थे। तभी उनकी नज़र एक…
एक सवाल पूछना चाहता हूं आपसे। क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री को फिल्म में काम…
क्या आप कभी उस सिनेमाघर में बैठे हैं जहाँ लाइट बुझते ही पर्दे पर एक दुनिया जागती है? ये जो…
कभी-कभी जब रात के सन्नाटे में रेडियो पर अचानक “लग जा गले” की धुन बजती है या टीवी पर “शोले”…
हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग की वो मासूम चेहरे वाली शोख लड़की, जिसकी बड़ी-बड़ी आंखें और सहज मुस्कान ने लाखों…
भारतीय सिनेमा का इतिहास जब भी लिखा जाता है, उसमें एक नाम अक्सर धुंधला सा रह जाता है। एक ऐसा…
सिनेमा हमेशा से ही चेहरों की कहानी रहा है। एक ऐसी कहानी जो बिना शब्दों के, सिर्फ़ नज़रों के इशारों…
बॉम्बे के एक श्मशान घाट में असामान्य सन्नाटा पसरा हुआ था। जनवरी की ठंडी हवा में सैकड़ों लोग खड़े थे,…
साल 1911 था। मुंबई के एक सिनेमाघर में अँधेरा छाया हुआ था। पर्दे पर एक विदेशी फिल्म चल रही थी…
आज के दौर में जब स्पेशल इफेक्ट्स की बमबारी और स्टाइलिश एंटी-हीरोज़ का बोलबाला है, मेरा दिल अक्सर उस जमाने…
क्लासिक भारतीय फिल्मों पर वर्षों से रिसर्च‑बेस्ड रिव्यू लिखते हुए “Raj Nartaki (1940)” हमेशा उन टाइटल्स में गिना गया है,…
दोस्ती की कहानियों पर दुनिया इसलिए फिदा है क्योंकि इंसान की सबसे गहरी जरूरत “किसी का अपना होना” है –…
बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर की बात हो और 1958 का ज़िक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यह वह…
सोचिए ज़रा… 1930 का दशक। बॉम्बे टॉकीज़ का ज़माना। सिनेमा घरों में ब्लैक एंड वाइट फिल्मों का जादू सिर चढ़कर…
अगर आपसे पूछा जाए कि बॉलीवुड का “असली एक्शन हीरो” कौन है, तो बिना किसी हिचकिचाहट के एक नाम ज़ुबान…
कभी-कभी टीवी चैनल बदलते हुए या ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की गहराइयों में खोज करते हुए हमारी नज़र किसी ऐसी फिल्म…
कल्पना कीजिए उस ज़माने की, जब सिनेमा हॉल में घुसते ही आपको महसूस होता था कि आप सिर्फ एक फिल्म…
कल्पना कीजिए। साल 1946। देश आज़ादी की लड़ाई के आख़िरी दौर से गुज़र रहा है। हर तरफ उथल-पुथल, अनिश्चितता और…
कभी सोचा है? आखिरी सीन खत्म होता है, थिएटर की लाइट्स जलती हैं, और आप उठकर चलने लगते हैं… पर…