एक गाने की रिकॉर्डिंग में 3 दिन, एक सीन की शूटिंग में हफ्ते भर — 1930s की फिल्मसाज़ी का असली हिसाब
मुंबई, 1931, रात के दो बज रहे हैं। जयोती स्टूडियो के अंदर रोशनी अभी भी जल रही है। कैमरा लगा…
Movie Reviews – Connect to Life
मुंबई, 1931, रात के दो बज रहे हैं। जयोती स्टूडियो के अंदर रोशनी अभी भी जल रही है। कैमरा लगा…
बात करें 1930 के दशक की, तो सिनेमा का पूरा नशा स्क्रीन पर था। हीरो था, हीरोइन थी, खलनायक था,…
1944 की एक काली रात। बारिश से भीगी सड़कें। एक थका हुआ Detective अपने Office में बैठा है — सिगरेट…
सितंबर 1921 की एक रात। San Francisco के सबसे शानदार Hotel में Party चल रही थी। शराब बह रही थी,…
जब हम आज की सिनेमाई जादूगरी—हरे पर्दे के सामने एक्शन करते सुपरहीरो या वायर रिग्स पर झूलते कलाकार—को देखते हैं,…
कल रात की बात है। मेरे एक दोस्त ने, जो खुद को ‘जेन-ज़ी सिनेफाइल’ कहता है, मुझसे पूछा, “यार तुम…
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसी धुंध (fog) जो लंदन की सड़कों को सफेद चादर से ढक देती…
कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा के पर्दे पर उतरती हर तस्वीर एक सपने जैसी लगती थी। चेहरे पर…
सिनेमा हमेशा से ही चेहरों की कहानी रहा है। एक ऐसी कहानी जो बिना शब्दों के, सिर्फ़ नज़रों के इशारों…
आज का दौर है डॉल्बी एटमॉस साउंड का। अभिनेता की हर साँस, फुसफुसाहट, तलवार की हर झनकार हमारे कानों तक…