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View Allएक इस्तीफा, चार पंख और एक जिंदगी भर का बदनुमा दाग — The Four Feathers Review
कभी-कभी एक फिल्म देखते वक्त लगता है कि ये सिर्फ किस्सा नहीं है, बल्कि एक सवाल है जो सीधा आपके…
बंगाली सिनेमा कैसे बना? वो अनकही दास्तान जो इतिहास की किताबों में नहीं है
कलकत्ता। 1890 का दशक। शहर में उस वक़्त दो चीज़ें एक साथ चल रही थीं — अंग्रेज़ों की हुकूमत और…
Cold War का डर परदे पर – इनवेज़न ऑफ़ द बॉडी स्नैचर्स (1956) समीक्षा
लेखक की कलम से: कुछ फ़िल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बनती। कुछ फ़िल्में एक दर्पण होती हैं — जिसमें…
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कभी-कभी एक फिल्म देखते वक्त लगता है कि ये सिर्फ किस्सा नहीं है, बल्कि एक सवाल है जो सीधा आपके…
बंगाली सिनेमा कैसे बना? वो अनकही दास्तान जो इतिहास की किताबों में नहीं है
कलकत्ता। 1890 का दशक। शहर में उस वक़्त दो चीज़ें एक साथ चल रही थीं — अंग्रेज़ों की हुकूमत और…
Cold War का डर परदे पर – इनवेज़न ऑफ़ द बॉडी स्नैचर्स (1956) समीक्षा
लेखक की कलम से: कुछ फ़िल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बनती। कुछ फ़िल्में एक दर्पण होती हैं — जिसमें…
1950 के दशक का सबसे अमीर एक्टर — जो बाद में Extra का रोल करने पर मजबूर हो गया: भरत भूषण की अनसुनी दास्तान
एक सुबह अमिताभ बच्चन अपनी गाड़ी में बैठे मुंबई के सांताक्रूज इलाके से गुज़र रहे थे। तभी उनकी नज़र एक…
Bengali
View Allबंगाली सिनेमा कैसे बना? वो अनकही दास्तान जो इतिहास की किताबों में नहीं है
कलकत्ता। 1890 का दशक। शहर में उस वक़्त दो चीज़ें एक साथ चल रही थीं — अंग्रेज़ों की हुकूमत और बंगाल के पढ़े-लिखे तबके में…







































