“वूमन ऑफ फायर 1971”: एक ऐसी ज्वाला जिसने कोरियाई सिनेमा की दिशा बदल दी

कोरियन सिनेमा की बात करते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग में “पैरासाइट”, “ओल्डबॉय” या हाल की नेटफ्लिक्स सीरीज़ का नाम आता है, लेकिन 1970 के […]

“बसंत बिलाप 1973”: Soumitra Chatterjee–Aparna Sen की Evergreen रोमांटिक कॉमेडी

Basanta Bilap एक 1973 की भारतीय बंगाली भाषा की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है, जिसका निर्देशन Dinen Gupta ने किया था। यह फिल्म Bimal Kar की […]

द रोड टू सम्पो: वो बर्फीली सड़क जहाँ तीन टूटे दिल ढूँढते हैं खोया हुआ सपना

साल 1975, दक्षिण कोरिया पर सैन्य शासन की लोहे की मुट्ठी कसी हुई है। हवा में डर का सन्नाटा, आँखों में भविष्य की अनिश्चितता। ऐसे […]

रॉबिन हुड 1973: वो अनदेखा डिज़्नी जादू जिसने पीढ़ियों को चोरों का राजा बना दिया

याद है वो बचपन की दोपहर? पंखे की आवाज़, खिड़की से आती गर्म हवा, और टीवी पर चलती कोई ऐसी फिल्म जिसके रंग, संगीत और […]

मार्च ऑफ़ द फूल्स (1975): वो कोरियाई फिल्म जिसने युवाओं के दर्द को ‘बेवकूफ़ी’ का नाम दे दिया

साल 1975, दक्षिण कोरिया में सैन्य तानाशाही का दौर। युवाओं के सपनों पर लोहे के जूते चल रहे हैं, विरोध की आवाज़ें जेल की सलाखों […]

कलकत्ता 71 (1972): जब सिनेमा ने दिखाया समाज का आईना

1971 का साल, जब पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम की आग भड़क चुकी थी, और पश्चिम बंगाल की सड़कों पर नक्सलवादी आंदोलन का […]

मयूरा (1975): कन्नड़ सिनेमा का वो ऐतिहासिक रत्न जिसने गढ़ी नई परंपरा

साल 1975 भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक फिल्मों का दौर चल रहा था। हिंदी में “शोले” का जलवा था, तो दक्षिण में कन्नड़ सिनेमा ने भी […]

Chinatown (1974): वह फ़िल्म जिसने हॉलीवुड को सिखाया ‘अंधेरे में उजाला ढूंढना’

क्या कोई फ़िल्म आपकी ज़िंदगी को बदल सकती है? अगर हाँ, तो रोमन पोलांस्की की “Chinatown” उन चंद फ़िल्मों में से एक है जो आपको […]

घरौंदा: 1977 की एक सदाबहार बॉलीवुड क्लासिक

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री, जिसे अक्सर बॉलीवुड के नाम से जाना जाता है, सिनेमाई उत्कृष्टता का खजाना रही है। इसकी कई क्लासिक फिल्मों में से, “घरौंदा” […]