सनमाओ: तीन बालों वाला अनाथ – एक ऐसी फिल्म जो दिल को छू जाती है और इतिहास को चीर देती है
कल्पना कीजिए। धुंध से ढकी सर्द शंघाई की सुबह। सड़क के किनारे, फुटपाथ की ठंडक पर, एक छोटा सा बच्चा।…
Movie Reviews – Connect to Life
कल्पना कीजिए। धुंध से ढकी सर्द शंघाई की सुबह। सड़क के किनारे, फुटपाथ की ठंडक पर, एक छोटा सा बच्चा।…
कल्पना कीजिए: बिजली कड़कती है, एक पागल वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में कुछ बना रहा है, और फिर… वो पल आता…
सोचिए, बिना एक शब्द बोले… बिना गानों के… बिना डायलॉग के… सिर्फ़ चेहरे के हाव-भाव, शरीर की भाषा, और आँखों…
कल्पना कीजिए… साल 1937 है। सिनेमाघरों में लोग बैठे हैं। स्क्रीन पर रंग नहीं, सिर्फ़ काले-सफेद छायाचित्र। तभी शुरू होती…
सोचिए वो ज़माना… जब फिल्मों में न तो हीरो की आवाज़ गूँजती थी, न हीरोइन के डायलॉग सुनाई देते थे,…
ये सवाल अक्सर दिमाग में आता है: “क्या साइलेंट फिल्मों के दौर में भी महिला अभिनेत्रियां या फिल्म निर्माता थीं?”…
क्या आपने कभी सोचा है कि एक चुप्पी, टूटी-फूटी टोपी पहने और बंदर जैसी चाल चलने वाला आदमी दुनिया का…
साल 1975, दक्षिण कोरिया पर सैन्य शासन की लोहे की मुट्ठी कसी हुई है। हवा में डर का सन्नाटा, आँखों…
1940 का साल। यूरोप में द्वितीय विश्वयुद्ध की आग धधक रही थी, और ब्रिटेन के आसमान पर जर्मन बमवर्षकों के…
साल 1959 की बात है। चीन में ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ का दौर चल रहा था—जहाँ एक तरफ़ लोहे के कारख़ाने…