ब्रिटेन का साइलेंट सिनेमा: वो दौर जब तस्वीरें बोलती थीं
1920 का दशक, लंदन के एक छोटे से थियेटर में अँधेरा छा गया। स्क्रीन पर सफेद-काले रंगों में एक नाव…
Movie Reviews – Connect to Life
1920 का दशक, लंदन के एक छोटे से थियेटर में अँधेरा छा गया। स्क्रीन पर सफेद-काले रंगों में एक नाव…
क्या आपको कभी लगता है कि आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कुछ खो सा गया है? वो सादगी, वो…
आज जब हम ‘अवतार’ में नीले नावी जाति को पंडोरा के जंगलों में उड़ते देखते हैं, या ‘जंगल बुक’ में…
उस चेहरे को देखो, गहरी नज़रें जिनमें एक अजीब सा दर्द समाया है, मगर उसके ऊपर सवार एक अटूट इंसाफ…
सिनेमा हॉल का अँधेरा, पर्दे पर चेहरा, वो आवाज़, वो अदाएँ, कुछ पल के लिए हम भूल जाते हैं कि…
सिनेमा हॉल का अँधेरा। चलचित्रों की रुपहली रोशनी। पर्दे पर चेहरे भाव बदल रहे हैं – हँस रहे हैं, रो…
कल्पना कीजिए एक ऐसी फिल्म जिसमें कोई भीषण एक्शन नहीं, कोई जोरदार ड्रामा नहीं, कोई भावुक भाषण नहीं। बस जीवन…
आंखें मूंदो। कान खोलो। क्या सुनाई देता है? शायद दूर से आती कोई सीटी… या फिर रेडियो पर बजता कोई…
सोचिए एक पल। 1950 का दशक। एक विशाल सिनेमा हॉल। पर्दे पर क्लार्क गेबल अपनी विद्युत चुम्बकीय मुस्कान बिखेर रहे…
हम सबने देखा है वो पल। सिनेमा हॉल की अँधेरी कोख में, टीवी स्क्रीन की रोशनी में, या फिर मोबाइल…