कम बजट, बड़ा जुगाड़: साइलेंट फिल्ममेकर कैसे बनाते थे जादुई दृश्य
साइलेंट फिल्मों का युग (1890s-1920s) विजुअल इफेक्ट्स का स्वर्णिम काल था, लेकिन एक ऐसा काल जिसे इतिहास ने अक्सर ‘आदिम’…
Movie Reviews – Connect to Life
साइलेंट फिल्मों का युग (1890s-1920s) विजुअल इफेक्ट्स का स्वर्णिम काल था, लेकिन एक ऐसा काल जिसे इतिहास ने अक्सर ‘आदिम’…
एक पुराने, धूल भरे स्टोररूम की कल्पना कीजिए। हवा में प्रोजेक्टर के बल्ब की गंध और पुराने सेल्युलॉइड की महक।…
आज से करीब बीस-पच्चीस साल पहले की बात है। मुंबई के एक पुराने फिल्म आर्काइव में गहरी धूल दिख रही…
साइलेंट सिनेमा की बात हो और चार्ली चैपलिन व बस्टर कीटन का नाम न आए, ऐसा लगभग नामुमकिन है। चैपलिन…
सोचिए ज़रा… 1930 का दशक। बॉम्बे टॉकीज़ का ज़माना। सिनेमा घरों में ब्लैक एंड वाइट फिल्मों का जादू सिर चढ़कर…
आप आज के इस दौर की कल्पना कीजिए, जहाँ सिनेमा हॉल में बैठकर आप हीरो की आवाज़ का एक-एक स्वर…
क्या आपने कभी गौर किया है कि दिलीप कुमार की आँखों में एक अदद नजाकत क्यों दिखती है? या माधुरी…
सुबह की पहली किरण ने अभी पेड़ों की पत्तियों को छुआ भी नहीं था। जंगल की उस गहरी शांति में,…
कभी सोचा है? आखिरी सीन खत्म होता है, थिएटर की लाइट्स जलती हैं, और आप उठकर चलने लगते हैं… पर…
हर किसी की नजर में फिल्म सिर्फ एक मनोरंजन का माध्यम है — कहीं रोना, कहीं हँसी, कहीं रोमांच और…