कल्पना कीजिए, 1820 के दशक की फ्रांसीसी ग्रामीण सड़कें, घने जंगल, और उन रास्तों पर घूमता एक ऐसा बदमाश जिसका दिल सोने से भी ज्यादा कीमती है। एक ऐसा किरदार जो चोरी भी करता है और जरूरतमंद लड़कियों को भी बचाता है। यह कोई साधारण डाकू नहीं, बल्कि फ्रांसीसी लोककथाओं का अमर पात्र है—रॉबर्ट मैकेयर (Robert Macaire) ।
1925 में जब महान फ्रांसीसी निर्देशक जीन एप्स्टाइन (Jean Epstein) ने इस किरदार को पर्दे पर उतारा, तो उन्होंने सिर्फ एक फिल्म नहीं बनाई, बल्कि फ्रांसीसी सिनेमा के इतिहास का एक ऐसा अध्याय रच दिया जिसे आज भी सिनेप्रेमी संजोकर रखते हैं । “लेस अवंतूर दे रॉबर्ट मैकेयर” (Les aventures de Robert Macaire) नाम से रिलीज हुई यह फिल्म पांच एपिसोड में बनी एक ऐसी सीरियल फिल्म थी, जिसने बच्चों और बड़ों दोनों का दिल जीत लिया ।
आइए, इस भूली-बिसरी फ्रेंच क्लासिक (Forgotten French Classic) की दुनिया में कदम रखें और जानें कि आखिर क्यों फ्रांसीसी सिनेमा के जादूगर हेनरी लैंग्ला (Henri Langlois) ने इसे “एक संपूर्ण क्लासिक” कहा और “19वीं सदी की रूमानियत की आत्मा” बताया ।
1925 का फ्रांसीसी सिनेमा: मूक फिल्मों का स्वर्णिम दौर
1920 का दशक पूरे यूरोपीय सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण समय था। जहां जर्मनी में एक्सप्रेशनिस्ट फिल्में (Expressionist Films) अपने चरम पर थीं, वहीं फ्रांस में अवांट-गार्डे (Avant-Garde) सिनेमा का उदय हो रहा था । इसी दौर में जीन एप्स्टाइन जैसे निर्देशक उभरे, जो बाद में अपनी प्रयोगधर्मिता और अनूठी शैली के लिए जाने गए।
1925 में जब “द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर” रिलीज हुई, तब फ्रांसीसी सिनेमा एक संक्रमणकालीन दौर से गुजर रहा था । मूक फिल्में (Silent Films) अभी भी राज कर रही थीं, लेकिन बोलती फिल्मों की आहट दूर-दूर तक सुनाई देने लगी थी। इस फिल्म को बनाने वाले स्टूडियो थे—अलबाट्रोस फिल्म (Albatros Film), जो उस दौर के सबसे प्रतिष्ठित फ्रांसीसी फिल्म स्टूडियो में से एक था ।
रॉबर्ट मैकेयर: एक किरदार जो सदियों से जीवित है
रॉबर्ट मैकेयर कोई साधारण फिल्मी किरदार नहीं था। उसकी जड़ें 19वीं सदी के फ्रांसीसी रंगमंच में गहराई तक फैली हुई थीं । 1823 में बेंजामिन एंटियर (Benjamin Antier), सेंट-अमांड (Saint-Amand) और पॉलियांथ (Polyanthe) नामक तीन नाटककारों ने एक नाटक लिखा था—”ल’ऑबर्ज दे आद्रे” (L’Auberge des Adrets) ।
इस नाटक में पहली बार रॉबर्ट मैकेयर नाम का एक बदमाश पेश किया गया, जो चोरी-डकैती तो करता था, लेकिन उसका अपना एक अलग ही आकर्षण था। यह किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि बाद में कई किताबों, नाटकों और फिल्मों में इसका पुनर्जन्म हुआ ।
फ्रांसीसी सिनेमा की महानतम फिल्मों में से एक “ले ज़ांफें दु पारादी” (Les Enfants du Paradis) में भी इस किरदार का जिक्र मिलता है, जहां पियरे ब्रासेर (Pierre Brasseur) एक अभिनेता की भूमिका में हैं जो रॉबर्ट मैकेयर का किरदार निभा रहे होते हैं । यह बताता है कि फ्रांसीसी संस्कृति में इस किरदार की जगह कितनी गहरी थी।
फिल्म का परिचय: जीन एप्स्टाइन की अनोखी देन
“द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर” 11 दिसंबर 1925 को फ्रांस के सिनेमाघरों में रिलीज हुई । यह फिल्म अपने समय की सबसे लंबी फ्रांसीसी फिल्मों में से एक थी—करीब 175 मिनट (तीन घंटे) की । फिल्म को पांच एपिसोड में बांटा गया था, जो उस दौर की सीरियल फिल्मों (Serial Films) की परंपरा का हिस्सा था ।
जीन एप्स्टाइन, जिन्हें बाद में एडगर एलन पो (Edgar Allan Poe) की कहानी पर बनी “द फॉल ऑफ द हाउस ऑफ अशर” (The Fall of the House of Usher, 1928) के लिए जाना गया, ने इस फिल्म में अपनी उस प्रयोगधर्मिता को कुछ हद तक दरकिनार कर दिया था । यह फिल्म उनकी दूसरी फिल्मों के मुकाबले कहीं ज्यादा पारंपरिक और सीधी-सादी थी । लेकिन इस पारंपरिकता में भी उनका जादू कहीं न कहीं बिखरा हुआ था।
फिल्म की पटकथा राउल प्लोकिन (Raoul Ploquin) और चार्ल्स वेयर (Charles Vayre) ने लिखी थी । सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी थी जेहान फाउक्वेट (Jéhan Fouquet), पॉल गुइचार्ड (Paul Guichard) और निकोलस रुदाकॉफ (Nikolas Roudakoff) के कंधों पर । और फिल्म के सेट डिजाइन किए थे उस दौर के महान कला निर्देशक लाजर मेरसन (Lazare Meerson) ने, जो बाद में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने वाले थे ।
कहानी का सार: एक बदमाश की दिल छू लेने वाली यात्रा
फिल्म की कहानी 1825 के आसपास फ्रांस की सड़कों पर शुरू होती है । रॉबर्ट मैकेयर (Jean Angelo) और उसका वफादार साथी बेरट्रां (Alex Allin) दो बदमाश हैं जो सड़कों पर घूम-घूमकर लोगों को ठगते हैं । उनका कोई ठिकाना नहीं है, कोई घर नहीं है—बस एक-दूसरे का साथ है।
वे कभी किसी अमीर जमींदार को ठगते हैं, तो कभी किसी भोली-भाली किसान महिला को । उनकी जिंदगी का कोई लक्ष्य नहीं है, बस गुजर-बसर करना है। लेकिन एक दिन ऐसा होता है जो उनकी जिंदगी बदल देता है।
एक युवती, लुईस दे सेरमेज़ (Suzanne Bianchetti), घोड़े से गिर जाती है और मुश्किल में फंस जाती है । रॉबर्ट उसे बचाता है। उसे पता चलता है कि यह लड़की उसी इलाके के मार्क्विस (महाराजा) की बेटी है ।
अब रॉबर्ट एक नई पहचान बनाकर मार्क्विस के महल में घुस जाता है—वह खुद को विकॉम्टे दे ला टूर मैकेयर (Vicomte de la Tour Macaire) बताता है । यहां वह लुईस के करीब आता है और दोनों के बीच प्यार पनपने लगता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक बदमाश और एक महाराजा की बेटी की प्रेम कहानी का अंत सुखद हो सकता है? और क्या रॉबर्ट की असली पहचान छुपी रहेगी?
यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि पांच एपिसोड में बटा एक महाकाव्य है । हर एपिसोड रॉबर्ट के जीवन के एक नए अध्याय को दिखाता है। बीच में कई सालों का समयांतराल (Time Jump) भी है, जो किरदारों के विकास को दर्शाता है ।
कलाकारों का जादू: जीन एंजेलो से सुजैन बियानशेटी तक
इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकार हैं, जिन्होंने मूक फिल्मों की चुनौतीपूर्ण दुनिया में अपने हाव-भाव से किरदारों में जान फूंक दी।
जीन एंजेलो (रॉबर्ट मैकेयर)
जीन एंजेलो (Jean Angelo) ने रॉबर्ट मैकेयर की भूमिका निभाई है । उनके अभिनय की सबसे बड़ी खूबी है उनका आकर्षण (Charisma) । वह एक बदमाश है, लेकिन दर्शक उससे नफरत नहीं कर सकते। उनकी शरारतें, उनकी मुस्कान, और मुश्किल वक्त में उनका संजीदा चेहरा—सब कुछ इतना प्रभावशाली है कि आप उनके किरदार से जुड़ जाते हैं।
एक समीक्षक ने लिखा, “जीन एंजेलो सचमुच आकर्षक हैं”। और यह सच भी है—वह इस किरदार में ऐसी जान फूंकते हैं कि रॉबर्ट मैकेयर पर्दे से उतरकर आपके सामने खड़ा नजर आता है।
एलेक्स एलिन (बेरट्रां)
अगर जीन एंजेलो फिल्म के दिल हैं, तो एलेक्स एलिन (Alex Allin) उस दिल की धड़कन हैं । यह उनकी पहली फिल्म थी , लेकिन उन्होंने ऐसा अभिनय किया कि कई दर्शक उन्हें हीरो से ज्यादा पसंद करने लगे।
बेरट्रां रॉबर्ट का वफादार साथी है, लेकिन वह रॉबर्ट से कहीं ज्यादा चंचल और मजाकिया है। लेटरबॉक्स (Letterboxd) पर एक समीक्षक ने लिखा, “मुझे साइडकिक बेरट्रां मुख्य किरदार से कहीं ज्यादा मनोरंजक लगा, इसलिए फिल्म हमेशा कुछ स्तरों पर बेहतर हो गई जब वह फोकस में था। और मुझे कहना होगा कि एलेक्स एलिन ने फिल्म को उबाऊ होने से बचाने में अहम भूमिका निभाई”।
एलिन की कॉमिक टाइमिंग और शारीरिक हाव-भाव (Physical Comedy) देखते ही बनते हैं। वह जब भी स्क्रीन पर होते हैं, हंसी अपने आप आ जाती है।
सुजैन बियानशेटी (लुईस दे सेरमेज़)
सुजैन बियानशेटी (Suzanne Bianchetti) उस दौर की मशहूर फ्रांसीसी अभिनेत्री थीं । उन्होंने लुईस की भूमिका निभाई है—एक महाराजा की बेटी जो रॉबर्ट के प्यार में पड़ जाती है। उनका अभिनय संयत और भावप्रवण है। एक कुलीन युवती की मासूमियत और प्रेम में पड़ने की उलझन—दोनों को वह बखूबी दिखाती हैं।
अन्य कलाकार
फिल्म में कई अन्य महत्वपूर्ण कलाकार भी हैं—मार्क्विसेट बॉस्की (Marquisette Bosky) ने रॉबर्ट की बेटी जीन (Jeanne) की भूमिका निभाई है , लू डोवॉयना (Lou Dovoyna) विक्टोयर (Victoire) के रोल में हैं, और मैक्सिमिलियन (Maximilienne) एक किसान महिला के किरदार में नजर आती हैं । कामिल बार्डू (Camille Bardou) वर्दुरों (Verduron) नामक एक और बदमाश के रोल में हैं ।
फिल्म की शैली और निर्देशन: एप्स्टाइन का जादू
जीन एप्स्टाइन को उनकी अवांट-गार्डे शैली और प्रयोगधर्मिता के लिए जाना जाता है । उनकी 1928 की फिल्म “द फॉल ऑफ द हाउस ऑफ अशर” आज भी अपनी अनूठी सिनेमैटोग्राफी और माहौल के लिए याद की जाती है । लेकिन “द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर” में उन्होंने एक अलग रास्ता चुना।
यह फिल्म एप्स्टाइन की सबसे लंबी फिल्म है , और इसमें उन्होंने अपनी प्रयोगधर्मिता को कुछ हद तक त्यागकर एक सीधी-सादी कहानी कहने का तरीका अपनाया । लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि फिल्म में उनका जादू नहीं है।
हार्वर्ड फिल्म आर्काइव (Harvard Film Archive) के अनुसार, यह फिल्म “फ्रांसीसी सिनेमा के 1910 के दशक के सीरियल्स, खासकर फ्यूइलाद (Feuillade) की फिल्मों को एक श्रद्धांजलि” है । एप्स्टाइन ने अपने बचपन के पसंदीदा किरदारों—आर्सेन ल्यूपिन (Arsène Lupin) और फैंटोमास (Fantômas)—को श्रद्धांजलि देते हुए यह फिल्म बनाई थी ।
फिल्म की सबसे खास बात है उसका माहौल (Atmosphere)। प्राकृतिक दृश्यों का चुनाव, किरदारों का यथार्थ से जुड़ाव, और हर छोटी-बड़ी चीज का सजीव चित्रण—यह सब मिलकर दर्शकों को 19वीं सदी के फ्रांस में ले जाता है ।
जैसा कि हेनरी लैंग्ला ने कहा, “फिल्म में एक भी अप्रासंगिक दृश्य नहीं है; यह पूरी तरह से बेदाग है। एक पूरा युग और उसकी रूमानी आत्मा यहां कैद हो गई है। फिल्म जीवंत है, परिष्कृत है; यह बौद्धिक है और शैली के मामले में आज की ज्यादातर फिल्मों से कहीं ज्यादा आधुनिक है” ।
प्रोडक्शन वैल्यू और सिनेमैटोग्राफी
“द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर” अपने समय के हिसाब से एक भव्य प्रोडक्शन था। अलबाट्रोस फ़िल्म्स (Albatros Films) जैसे प्रतिष्ठित स्टूडियो ने इसे बनाया था, और लाज़र मेरसन (Lazare Meerson) जैसे कला निर्देशक ने इसके सेट डिज़ाइन किए थे ।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी तीन सिनेमैटोग्राफरों—जेहान फाउक्वेट, पॉल गुइचार्ड और निकोलस रुदाकॉफ—ने संभाली थी । तीन अलग-अलग आंखों के बावजूद, फिल्म में एकरूपता (Consistency) बनी रहती है।
फिल्म श्वेत-श्याम (Black & White) है, 35mm पर शूट की गई है, और इसका पहलू अनुपात (Aspect Ratio) 1.37:1 है । यह मूक फिल्म है, जिसमें फ्रांसीसी इंटरटाइटल्स (French Intertitles) हैं । बाद के डीवीडी रिलीज में अंग्रेजी उपशीर्षक (English Subtitles) भी जोड़े गए हैं ।
लेटरबॉक्स पर एक समीक्षक ने लिखा, “यह फिल्म कई मायनों में एप्स्टाइन के काम की तरह प्रकृति की सुंदरता का एक सच्चा प्रमाण है। उन्होंने जो शॉट्स हासिल किए और जो शानदार चित्रण किया, वह मुझे हमेशा आश्चर्यचकित करता है” ।
बच्चों के लिए खास: क्यों यह फिल्म बच्चों के दिलों में बस गई
यूज़र ने इस फिल्म को “किड्स फिल्म” कहा है, और यह सही भी है। हालांकि फिल्म तीन घंटे लंबी है, लेकिन इसकी कहानी और किरदार बच्चों को अपनी ओर खींचते हैं।
रोमांच और साहस: रॉबर्ट और बेरट्रां के कारनामे बच्चों को रोमांच की दुनिया में ले जाते हैं। चोरी-छिपे, भागना-दौड़ना, नकली पहचान बनाना—यह सब बच्चों की कल्पना को उड़ान देता है।
हास्य: बेरट्रां का किरदार हास्य से भरा है। उसकी शरारतें और मूर्खतापूर्ण हरकतें बच्चों को हंसाने के लिए काफी हैं ।
दिल छू लेने वाली कहानी: रॉबर्ट और लुईस की प्रेम कहानी भले ही बच्चों के लिए थोड़ी जटिल हो, लेकिन एक बदमाश का अच्छा इंसान बनने का सफर हर उम्र के दर्शकों को प्रभावित करता है।
कल्पनाशील दृश्य: फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य हैं जो कल्पना की दुनिया से जुड़ते हैं। जैसे, एक चाल में रॉबर्ट और बेरट्रां एक संत के भूत (Ghost of a Saint) और शुद्धिकरण से आए सूअर (Gold-smelling Hog from Purgatory) का रूप धारण करते हैं । एक और दृश्य में बेर्ट्रान् किसी को भूत समझ लेता है । और एक मशहूर दृश्य में दोनों बदमाश मन पढ़ने (Mind-reading) का झूठा करतब दिखाते हैं ।
ये छोटे-छोटे काल्पनिक तत्व (Fantastic Elements) फिल्म में एक अलग ही रंग भर देते हैं और बच्चों के लिए इसे और मजेदार बनाते हैं।
फिल्म की विरासत: हेनरी लैंग्ला से लेकर आज तक
“द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर” को उसके रिलीज के समय तो सराहा गया, लेकिन असली पहचान उसे बाद में मिली। यह पहचान दिलाई थी फ्रांसीसी सिनेमा के महान संरक्षक हेनरी लैंग्ला (Henri Langlois) ने।
लैंग्ला, जिन्होंने फ्रेंच सिनेमाथेक (Cinémathèque Française) की स्थापना की, एप्स्टाइन के प्रबल प्रशंसक थे । उन्होंने 1953 में कहा था, “अजीब बात है, लेस अवंतूर दे रॉबर्ट मैकेयर का जिक्र कभी नहीं होता जब लोग एप्स्टाइन के बारे में बात करते हैं, हालांकि यह एक संपूर्ण क्लासिक है” ।
लैंग्ला ने इसे एप्स्टाइन की “सबसे प्रामाणिक फिल्म” कहा । उनके अनुसार, इस फिल्म में “परिदृश्यों का चुनाव, सहायक किरदारों का यथार्थ से कितना करीब होना, मेरसन के सावधानीपूर्वक तैयार किए गए इंटीरियर, सभी विवरण, यहां तक कि झूठी सादगी और हल्कापन—यह सब हमें उस युग की भावना में पूरी तरह डुबो देता है” ।
आज यह फिल्म सिनेप्रेमियों के बीच एक क्लासिक (Cult Classic) का दर्जा रखती है। इसे क्राइटेरियन कलेक्शन (Criterion Collection) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा डीवीडी पर रिलीज किया गया है । हार्वर्ड फिल्म आर्काइव और वियना इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (Viennale) जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर इसे नियमित रूप से दिखाया जाता है ।
समीक्षा: क्या अच्छा है, क्या कमजोर
हर फिल्म की तरह, “द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर” की भी अपनी खूबियाँ और कमियाँ हैं।
क्या अच्छा है:
जीन एंजेलो और एलेक्स एलिन का अभिनय: यह फिल्म इन दो अभिनेताओं का शोकेस है । एंजेलो का आकर्षण और एलिन की कॉमेडी—दोनों मिलकर फिल्म को देखने लायक बनाते हैं ।
माहौल और सिनेमैटोग्राफी: 19वीं सदी के फ्रांस को पर्दे पर उतारने का काम शानदार है। प्राकृतिक दृश्य, सेट डिजाइन, और कैमरे का काम—सब कुछ मिलकर एक जादुई दुनिया रचते हैं ।
रोमांस और रोमांच का मिश्रण: फिल्म में रोमांस, कॉमेडी, एडवेंचर और यहां तक कि हल्के-फुल्के काल्पनिक तत्व भी हैं । यह विविधता फिल्म को कभी उबाऊ नहीं होने देती।
ऐतिहासिक महत्व: यह फिल्म फ्रांसीसी सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह उस दौर की सीरियल फिल्मों और फ्रांसीसी लोककथाओं का एक अनूठा मिश्रण है ।
क्या कमजोर है:
लंबाई: तीन घंटे की यह फिल्म कई दर्शकों के लिए बहुत लंबी हो सकती है । एक समीक्षक ने लिखा, “यह आसानी से नियमित लंबाई की फिल्म में एडिट की जा सकती थी बिना कुछ जरूरी खोए” ।
धीमी गति: फिल्म की गति कुछ जगहों पर धीमी पड़ जाती है। हर एपिसोड में सब कुछ नहीं होता, और बीच-बीच में फिल्म खिंच सी जाती है ।
स्टाइल की कमी: जो दर्शक एप्स्टाइन की अवांट-गार्डे फिल्मों के आदी हैं, उन्हें यह फिल्म “बहुत साधारण” लग सकती है । इसमें वह प्रयोगधर्मिता नहीं है जो उनकी दूसरी फिल्मों में देखने को मिलती है ।
उपशीर्षक की समस्या: फिल्म के कुछ प्रिंट्स में अंग्रेजी उपशीर्षक नहीं हैं, जो गैर-फ्रांसीसी दर्शकों के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं । हालांकि, मूक फिल्म होने के कारण तस्वीरें कहानी का ज्यादातर हिस्सा बता देती हैं।
निष्कर्ष: एक अमर कृति जिसे देखना चाहिए
“द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर” सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह फ्रांसीसी सिनेमा के इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज है। यह उस दौर की याद दिलाती है जब फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि कला का एक उच्च रूप हुआ करती थीं।
हां, यह फिल्म लंबी है। हां, इसकी गति कहीं-कहीं धीमी है। लेकिन अगर आप थोड़ा धैर्य रखें और इस फिल्म को समय दें, तो यह आपको एक ऐसी दुनिया में ले जाएगी जहां बदमाश भी प्यारे होते हैं, जहां चोर भी हीरो बन जाते हैं, और जहां हर सड़क, हर जंगल, हर महल में एक नई कहानी छिपी होती है।
बच्चों के लिए यह फिल्म एक रोमांचक यात्रा है। बड़ों के लिए यह सिनेमा के इतिहास की एक अनम्य पाठशाला है। और सिनेप्रेमियों के लिए यह उस खजाने की तरह है, जिसे खोजने में सालों लग जाते हैं।
जैसा कि हेनरी लैंग्ला ने कहा, यह फिल्म “एक पूरे युग और उसकी रूमानी आत्मा” को कैद करती है । और जब आप यह फिल्म देखेंगे, तो आप महसूस करेंगे कि वह आत्मा आज भी जीवित है—हर फ्रेम में, हर किरदार में, हर भाव में।
तो अगली बार जब आप कोई पुरानी फ्रेंच फिल्म (Vintage French Film) देखने का मन बनाएं, तो रॉबर्ट मैकेयर को याद कीजिए। वह बदमाश जिसने सदियों तक फ्रांस का दिल जीता, वह आपका दिल भी जीत लेगा।


