क्या कोई फिल्म एक साथ इतनी शांत और इतनी तूफानी हो सकती है? क्या एक बूढ़ा अभिनेता, एक ईर्ष्यालु प्रेमिका, और एक अनजान बेटे की कहानी सिनेमा के इतिहास की सबसे खूबसूरत फिल्मों में गिनी जा सकती है? 1959 में जापान के महान निर्देशक यासुजीरो ओज़ू (Yasujiro Ozu) ने “फ्लोटिंग वीड्स” (Floating Weeds) बनाकर साबित कर दिया कि हाँ, यह सब संभव है ।
यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि एक एहसास है। यह उन लोगों की कहानी है जो जीवन में कभी ठहर नहीं पाते—जैसे पानी पर तैरते खरपतवार (Floating Weeds), जहाँ हवा ले जाए, वहीं चले जाते हैं । ओज़ू ने अपने 25 साल पुराने निर्देशन किए गए मूक सिनेमा “अ स्टोरी ऑफ फ्लोटिंग वीड्स” (1934) को इस बार रंगों में, आवाज़ के साथ, और उस परिपक्वता के साथ फिर से रचा जो उन्हें दुनिया के महानतम फिल्मकारों में ले आई ।
आइए, इस जापानी सिनेमा के स्वर्णिम रत्न (Japanese Cinema Gem) की दुनिया में कदम रखें और जानें कि आखिर क्यों रोजर एबर्ट (Roger Ebert) ने इसे अपनी दस सर्वकालिक पसंदीदा फिल्मों में शामिल किया और क्यों यह आज भी उतनी ही ताज़ा है जितनी 1959 में रिलीज के समय थी।
परिचय: ओज़ू का रंगीन करिश्मा
यासुजीरो ओज़ू का नाम जापानी सिनेमा के इतिहास में सबसे ऊपर लिखा जाता है। “टोक्यो स्टोरी” (Tokyo Story), “लेट स्प्रिंग” (Late Spring) जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया । लेकिन “फ्लोटिंग वीड्स” उनके करियर में एक खास जगह रखती है।
यह फिल्म 17 नवंबर 1959 को जापान में रिलीज हुई थी । खास बात यह है कि यह ओज़ू ने अपनी हमेशा वाली शोचिकू (Shochiku) स्टूडियो के बजाय डाइई (Daiei) स्टूडियो के लिए बनाई थी । इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें जापान के महानतम सिनेमैटोग्राफर काज़ुओ मियागावा (Kazuo Miyagawa) का साथ मिला, जिन्होंने “राशोमोन” (Rashomon) और “उगेत्सु” (Ugetsu) जैसी फिल्में शूट की थीं ।
ओज़ू की पिछली फिल्म “गुड मॉर्निंग” (Good Morning) खत्म करने के बाद डाइई स्टूडियो के प्रमुख मसाइची नागाता ने उनसे एक फिल्म बनाने का आग्रह किया । ओज़ू ने अपनी 1934 की मूक फिल्म को रीमेक करने का फैसला किया। उन्होंने इस प्रक्रिया को “एक पुराने ज़माने की कहानी में आधुनिक सेटिंग में जान डालने का प्रयोग” कहा ।
कहानी का सार: एक भटकते कलाकार की वापसी
“फ्लोटिंग वीड्स” की कहानी गर्मियों के एक छोटे से समुद्री कस्बे में शुरू होती है । एक भटकती काबुकी (Kabuki) थिएटर मंडली नाव से शहर में आती है। इस मंडली का मुखिया है कोमाजुरो (Ganjiro Nakamura) ।
अनकहा सच
बाकी मंडली शहर में अपने शो का प्रचार करने निकल जाती है, लेकिन कोमाजुरो एक छोटी-सी खाने की दुकान पर जाता है, जहाँ उसकी पुरानी प्रेमिका ओयोशी (Haruko Sugimura) रहती है । उनका एक 20 साल का बेटा है, कियोशी (Hiroshi Kawaguchi), जो डाकघर में क्लर्क है और पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ रहा है ।
कियोशी को नहीं पता कि कोमाजुरो उसका पिता है। उसे बताया गया है कि यह उसके मामा हैं, जिनके बारे में उसने सुना तो था, लेकिन देखा कभी नहीं । कोमाजुरो बेटे के साथ समय बिताता है, मछली पकड़ने जाता है, लेकिन अपनी असली पहचान नहीं बताता ।
ईर्ष्या का आगाज
जब कोमाजुरो की मौजूदा प्रेमिका और मंडली की मुख्य अभिनेत्री सुमिको (Machiko Kyo) को पता चलता है कि कोमाजुरो अपनी पूर्व प्रेमिका से मिल रहा है, तो वह जलन से जल उठती है । वह ओयोशी की दुकान पर जाकर तमाशा करती है, जिससे कोमाजुरो उससे नाराज हो जाता है और रिश्ता तोड़ने की धमकी देता है ।
सुमिको बदला लेने की सोचती है। वह मंडली की युवा अभिनेत्री कायो (Ayako Wakao) को पैसे देकर कियोशी को बहकाने के लिए कहती है । कायो पहले हिचकिचाती है, लेकिन मजबूरी में मान जाती है।
प्रेम का जादू
लेकिन जब कायो कियोशी को जानती है, तो वह सच में उससे प्यार करने लगती है । वह उसे सब सच बता देती है—कि उसे बहकाने के लिए भेजा गया था। लेकिन कियोशी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वह उससे प्यार करता है ।
जब कोमाजुरो को इस बारे में पता चलता है, तो वह कायो पर बरसता है और उसे सब बताने पर मजबूर करता है। कायो सुमिको का नाम बता देती है । कोमाजुरो गुस्से में सुमिको पर हमला कर देता है। सुमिको उससे माफी मांगती है, लेकिन कोमाजुरो नहीं मानता ।
मंडली का बिखराव
इधर, मंडली के पुराने ज़माने के नाटक दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाते । मैनेजर फरार हो जाता है, पैसे लेकर एक अभिनेता भाग जाता है । कोमाजुरो के पास मंडली को भंग करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। एक भावुक विदाई के बाद सब बिखर जाते हैं ।
कोमाजुरो ओयोशी के पास जाता है। ओयोशी उसे सलाह देती है कि वह कियोशी को सच बता दे और परिवार की तरह साथ रहे। कोमाजुरो मान जाता है ।
सच का सामना
जब कियोशी कायो के साथ घर लौटता है, तो कोमाजुरो उन दोनों को देखकर आग-बबूला हो जाता है और उन्हें पीटना शुरू कर देता है । बाप-बेटे में हाथापाई होने लगती है। तब ओयोशी बीच में कूदकर कियोशी को बता देती है कि कोमाजुरो उसका पिता है ।
कियोशी पहले तो कहता है कि उसे हमेशा शक था, लेकिन फिर इंकार कर देता है कि वह कोमाजुरो को अपने पिता के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता । उसने 20 साल बिना पिता के गुजारे हैं, उसे अब पिता की जरूरत नहीं है।
टूटा हुआ कोमाजुरो शहर छोड़ने का फैसला करता है। कायो उसके साथ जाना चाहती है, लेकिन कोमाजुरो उसे रोकता है और कहता है कि वह यहाँ रुके और कियोशी को एक अच्छा इंसान बनाने में मदद करे ।
एक नई शुरुआत
स्टेशन पर कोमाजुरो सिगरेट सुलगाने की कोशिश करता है, लेकिन माचिस खत्म हो जाती है। पास में बैठी सुमिको उसे आग देती है । उसके पास भी जाने की कोई जगह नहीं है। वह पूछती है, “कहाँ जा रहे हो? मैं भी चलूँ?” दोनों में सुलह हो जाती है और वे एक साथ कुवाना शहर में नई शुरुआत करने निकल पड़ते हैं ।
कलाकार: जब हर अभिनेता अपने किरदार में जान फूंकता है
“फ्लोटिंग वीड्स” के कलाकारों ने ऐसा अभिनय किया मानो वह किरदार उनके लिए ही लिखे गए हों।
गांजिरो नाकामुरा द्वितीय (कोमाजुरो)
गांजिरो नाकामुरा (Ganjiro Nakamura) जापान के मशहूर काबुकी थिएटर स्टार थे । उन्होंने कोमाजुरो के किरदार को वह गहराई दी जो कोई और नहीं दे सकता था। एक समीक्षक ने लिखा, “नाकामुरा का अभिनय देखते ही बनता है—वह एक ही समय में हास्यास्पद, दुखद, क्रोधित और संवेदनशील हो सकते हैं” ।
उनके किरदार की सबसे खास बात है उनका आत्म-संदेह (Self-doubt)। बाहर से वह मंडली के मुखिया हैं, मजबूत हैं, लेकिन अंदर से वह टूटे हुए हैं। जब वह अपने बेटे से मछली पकड़ते हुए कहते हैं कि “जीवन एक अनजान रास्ता है, केवल बदलाव ही स्थिर है” , तो उनकी आंखों में सदियों का दर्द दिखता है।
माचिको क्यो (सुमिको)
माचिको क्यो (Machiko Kyo) उस दौर की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में से एक थीं। उन्होंने “राशोमोन” और “उगेत्सु” जैसी क्लासिक फिल्मों में काम किया था । सुमिको के किरदार में उन्होंने वह जलन, वह क्रोध और वह अकेलापन दिखाया जो दर्शकों के दिल को छू जाता है।
एक समीक्षक ने लिखा, “अंतिम दृश्य में जब सुमिको बिना कुछ कहे सिर्फ कोमाजुरो को माचिस देकर अपना प्यार और माफी जता देती है—यह भारतीय सिनेमा के सबसे मार्मिक दृश्यों में से एक है” ।
हिरोशी कावागुची (कियोशी)
हिरोशी कावागुची (Hiroshi Kawaguchi) ने युवा कियोशी की भूमिका निभाई है। उनका किरदार उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जो पुरानी परंपराओं से कट चुकी है । जब वह अपने पिता के नाटक को “अवास्तविक” कहता है , तो वह सिर्फ नाटक की नहीं, बल्कि अपने पिता की पूरी जीवनशैली की बात कर रहा होता है।
हारुको सुगिमुरा (ओयोशी)
हारुको सुगिमुरा (Haruko Sugimura) ओज़ू की नियमित अभिनेत्री थीं और उन्होंने “टोक्यो सोरी” जैसी क्लासिक फिल्मों में काम किया था । उनका किरदार ओयोशी उस स्त्री का प्रतिनिधित्व करता है जिसने अपने बेटे के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। वह बाहर से शांत हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह कितनी मजबूत हो सकती हैं, यह फिल्म के अंत में पता चलता है।
अयाको वाकाओ (कायो)
अयाको वाकाओ (Ayako Wakao) ने युवा अभिनेत्री कायो का किरदार निभाया है । उनका किरदार फिल्म की नैतिक धुरी (Moral Compass) है। वह झूठ बोलने को मजबूर है, लेकिन उसका दिल साफ है। जब वह कियोशी को सब सच बता देती है, तो वह दर्शकों के दिल में बस जाती है।
सिनेमैटोग्राफी: जब रंग खुद बोल उठे
“फ्लोटिंग वीड्स” की सिनेमैटोग्राफी जापान के महानतम सिनेमैटोग्राफर काज़ुओ मियागावा (Kazuo Miyagawa) ने की थी । उनका नाम “राशोमोन”, “उगेत्सु” और “सानशो द बेलिफ” जैसी क्लासिक फिल्मों से जुड़ा है ।
ओज़ू की शैली का जादू
ओज़ू की फिल्मों की अपनी एक अलग पहचान होती है। वह कभी ट्रैकिंग शॉट (Tracking Shots) का इस्तेमाल नहीं करते, कभी डिसॉल्व (Dissolves) या फेड (Fades) का नहीं । बस लंबे, स्थिर शॉट्स (Long Static Shots), अक्सर एक विस्तृत फ्रेम (Wide Frame) में, और बीच-बीच में कुछ “पिलो शॉट्स” (Pillow Shots)—प्रकृति या वस्तुओं के सुंदर दृश्य जो दर्शकों को रुककर सोचने का मौका देते हैं ।
एक समीक्षक ने लिखा, “ओज़ू की शैली सम्मोहित कर देने वाली है।
मियागावा के रंग
लेकिन इस फिल्म में ओज़ू की शैली में मियागावा के रंगों का जादू जुड़ गया है। फिल्म में रंग बेहद चटख और भावनात्मक हैं ।
बारिश का दृश्य: फिल्म का सबसे मशहूर दृश्य है वह जब कोमाजुरो और सुमिको के बीच बारिश में झगड़ा होता है । बारिश की मूसलाधार फुहारों के बीच, पृष्ठभूमि में एक लाल छाता (Red Umbrella) दिखता है। यह दृश्य जापानी सिनेमा के इतिहास के सबसे खूबसूरत दृश्यों में से एक माना जाता है ।
जहाज का दृश्य: एक और अविस्मरणीय दृश्य है जब कियोशी और कायो एक बंदरगाह पर एक पुराने, जंग लगे जहाज के पास बैठे होते हैं । यह दृश्य उनके प्यार की शुरुआत का प्रतीक है और इतना खूबसूरत है कि देखते ही बनता है।
अंतिम दृश्य: स्टेशन पर कोमाजुरो और सुमिको की मुलाकात का दृश्य भी उतना ही खूबसूरत है। ओज़ू और मियागावा ने इस दृश्य में दो टूटे हुए लोगों की सुलह को बिना किसी संवाद के सिर्फ एक माचिस की तीली और उनके चेहरे के भावों से दिखा दिया है।
स्टेज के रूप में दुनिया
एक और दिलचस्प बात यह है कि ओज़ू ने फिल्म के कई दृश्यों को एक स्टेज की तरह डिजाइन किया है। जैसे एक समीक्षक ने लिखा, “ओज़ू ने हर चीज को एक तरह के मंच के रूप में पेश किया है, खाली स्थान जहां उनके किरदार प्रवेश करते हैं” ।
निर्देशन: ओज़ू का संवाद खुद से
“फ्लोटिंग वीड्स” ओज़ू के करियर में एक खास जगह रखती है क्योंकि यह उनकी एकमात्र फिल्म है जो उन्होंने खुद की पुरानी फिल्म का रीमेक बनाई । 1934 की “अ स्टोरी ऑफ फ्लोटिंग वीड्स” श्वेत-श्याम (Black & White) और मूक (Silent) थी। 25 साल बाद, उन्होंने उसी कहानी को रंगों में, आवाज के साथ, और अपनी परिपक्व शैली में फिर से रचा।
एक समीक्षक ने लिखा, “ओज़ू एकरूपता (Uniformity) या दोहराव (Repetition) में इतनी रुचि नहीं रखते थे, जितनी वह खुद के साथ संवाद (Dialogue with himself) में रुचि रखते थे। इस फिल्म में हम देख सकते हैं कि कैसे 25 सालों में ओज़ू की सोच बदली है।
1934 वाली फिल्म में पिता अपने बेटे से शर्मिंदा था क्योंकि वह एक भटकता अभिनेता था । 1959 में यह मुद्दा नहीं रहा। अब पिता की चिंता यह है कि उसकी जीवनशैली (Lifestyle) खत्म हो रही है, वह समय से पीछे छूट गया है । यह बदलाव ओज़ू की खुद की उम्र और सोच में आए बदलाव को भी दर्शाता है।
विषय: फ्लोटिंग वीड्स क्या कहती है?
“फ्लोटिंग वीड्स” सिर्फ एक कहानी नहीं है, यह कई गहरे विषयों पर एक मार्मिक टिप्पणी है।
फ्लोटिंग वीड्स: बेघर लोग
फिल्म का शीर्षक “फ्लोटिंग वीड्स” (浮草) यानी “तैरते खरपतवार” उन लोगों का प्रतीक है जिनकी कोई जड़ नहीं होती । कोमाजुरो और उसकी मंडली के कलाकार ऐसे ही हैं। उनका न कोई घर है, न कोई ठिकाना। जहाँ काम मिले, वहीं चले जाएँ।
एक समीक्षक ने लिखा, “कोमाजुरो हमेशा की तरह एक तैरता हुआ खरपतवार है, एक बेघर आदमी, लेकिन अब शायद युद्ध के बाद के परिदृश्य में कई जड़हीन भटकने वालों में से एक” ।
पीढ़ियों का टकराव (Generation Gap)
फिल्म का एक और महत्वपूर्ण विषय है पुरानी और नई पीढ़ी के बीच का टकराव । कोमाजुरो पुरानी दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है—जहाँ काबुकी थिएटर का सम्मान था, जहाँ पिता का अधिकार था। कियोसी नई दुनिया का प्रतिनिधि है—जहाँ ये सब बेमानी हो चुके हैं।
एक दृश्य में कियोशी कोमाजुरो से कहता है कि उनके नाटक का किरदार “अवास्तविक” है, आधुनिक दुनिया से उसका कोई संबंध नहीं । कोमाजुरो जवाब देता है, “वह दूसरे युग का किरदार है” । और यही सच है—कोमाजुरो खुद दूसरे युग का आदमी है, जो इस नई दुनिया में खो गया है।
प्यार, ईर्ष्या और त्याग
फिल्म में प्यार कई रूपों में दिखता है। सुमिको का प्यार ईर्ष्या में बदल जाता है। कायो का प्यार मासूम है। ओयोशी का प्यार त्यागपूर्ण है। और कोमाजुरो का प्यार—अपने बेटे के लिए—इतना गहरा है कि वह उसे खोने के डर से उसे पीटता है और फिर उसे बेहतर जीवन देने के लिए खुद दूर चला जाता है।
एक समीक्षक ने लिखा, “ओज़ू की फिल्मों का मुख्य संदेश यह है कि हमें कभी स्थिर नहीं रहना चाहिए। स्थिरता अवमानना पैदा करती है, अवमानना नफरत पैदा करती है” ।
सिनेमा की आत्मा
एक समीक्षक ने फिल्म के “無” (Mu—शून्यता) के दर्शन पर गहराई से लिखा है । उनके अनुसार, ओज़ू की फिल्में सतह पर जितनी सादी हैं, उतनी ही गहरी हैं। वह लिखते हैं, “ओज़ू की कोमलता हर किरदार के लिए सुखद अंत की व्यवस्था करने में नहीं है, बल्कि उनके लिए जीने का सबसे उपयुक्त तरीका और स्थान खोजने में है” ।
ऐतिहासिक महत्व और पुरस्कार
“फ्लोटिंग वीड्स” सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह सिनेमा के इतिहास की एक अमर कृति है।
प्रतिष्ठित सूचियों में शामिल
रोजर एबर्ट की ग्रेट मूवीज: प्रसिद्ध समीक्षक रोजर एबर्ट ने इसे अपनी दस सर्वकालिक पसंदीदा फिल्मों में शामिल किया और क्राइटेरियन कलेक्शन के डीवीडी पर ऑडियो कमेंट्री रिकॉर्ड की ।
किनेमा जुनपो टॉप 200: यह फिल्म जापान की सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पत्रिका किनेमा जुनपो (Kinema Junpo) की सर्वकालिक 200 महानतम जापानी फिल्मों की सूची में 44वें स्थान पर है ।
1001 फिल्म्स यू मस्ट सी: इसे “1001 फिल्म्स यू मस्ट सी बिफोर यू डाई” की प्रतिष्ठित सूची में भी शामिल किया गया है ।
क्राइटेरियन कलेक्शन: फिल्म क्राइटेरियन कलेक्शन (Criterion Collection) का हिस्सा है, जो सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों को संरक्षित करता है ।
समीक्षकों की राय
समीक्षकों ने इस फिल्म की जमकर तारीफ की है। क्रेग बटलर ने लिखा, “फ्लोटिंग वीड्स शांत सुंदरता की फिल्म है, एक ऐसा रत्न जिसे समझदार दर्शक संजोकर रखेंगे” ।
एक अन्य समीक्षक ने लिखा, “ओज़ू ने धीमी, खूबसूरती से फिल्माई गई पारिवारिक ड्रामा बनाई है। रंगों का उपयोग और सूक्ष्म दृश्य रूपक (Visual Metaphors) इसे जापानी सिनेमा की उत्कृष्ट कृति बनाते हैं” ।
हालांकि, कुछ समीक्षकों ने कहानी में कमजोरी भी बताई। एक समीक्षक ने लिखा, “मैं विषैले (Toxic), दुर्व्यवहार करने वाले लोगों के बारे में फिल्मों का आनंद लेने में संघर्ष करता हूँ” । लेकिन उसने भी माना कि “दृश्य रूप से यह शानदार है, जैसा हर ओज़ू की फिल्म होती है” ।
समीक्षा: क्या अच्छा है, क्या कमजोर
हर फिल्म की तरह, “फ्लोटिंग वीड्स” की भी अपनी खूबियाँ और कुछ कमजोरियाँ हैं।
क्या अच्छा है:
सिनेमैटोग्राफी: मियागावा का कैमरा और ओज़ू का निर्देशन—यह जोड़ी जापानी सिनेमा के इतिहास की सबसे शानदार दृश्य कृतियों में से एक रचती है ।
अभिनय: नाकामुरा, क्यो, सुगिमुरा, वाकाओ—हर कलाकार अपने किरदार में जान फूंक देता है ।
भावनात्मक गहराई: फिल्म में प्यार, ईर्ष्या, त्याग, और अकेलापन—हर भावना इतनी गहराई से दिखाई गई है कि दर्शक बिना जाने उन किरदारों से जुड़ जाता है।
प्रतिष्ठित दृश्य: बारिश में लाल छाता वाला दृश्य, जहाज के पास बैठे युवा प्रेमी, स्टेशन पर सुलह का दृश्य—ये सब सिनेमा के इतिहास के अविस्मरणीय दृश्य बन गए हैं ।
ऐतिहासिक महत्व: ओज़ू की एकमात्र रीमेक, मियागावा के साथ उनका एकमात्र सहयोग—यह फिल्म सिनेमा के इतिहास में एक खास जगह रखती है ।
क्या कमजोर है:
धीमी गति: ओज़ू की फिल्में तेज रफ्तार के आदी दर्शकों को धीमी लग सकती हैं । “स्लाइटली स्लो पेस” (थोड़ी धीमी गति) का टैग इन फिल्मों के साथ हमेशा जुड़ा रहता है।
कहानी में कमजोरी: कुछ समीक्षकों का मानना है कि फिल्म की कहानी उतनी मजबूत नहीं है जितना इसका दृश्य सौंदर्य । एक समीक्षक ने लिखा, “दूसरे हाफ में कहानी की योजना थोड़ी ज्यादा हावी हो जाती है।
पुरानी सोच: कुछ दर्शकों को फिल्म में दिखाई गई पितृसत्ता (Patriarchy) और हिंसा परेशान कर सकती हैं। कोमाजुरो का महिलाओं के साथ व्यवहार आज के दौर में सही नहीं माना जाएगा।
निष्कर्ष: एक अमर कृति
“फ्लोटिंग वीड्स” सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह सिनेमा के उस स्वर्णिम युग का एक जीवंत दस्तावेज है जब फिल्मकार हर फ्रेम को एक पेंटिंग की तरह रचते थे। यह उन दुर्लभ फिल्मों में से है जो दिल को छू लेती है, दिमाग को झकझोर देती है, और आंखों को सुकून देती है।
एक समीक्षक ने लिखा, “यह फिल्म ओज़ू के बेहतरीन कामों में से एक है। एक अन्य ने लिखा, “यह एक ऐसी फिल्म है जिसे हर कोई अपने तरीके से महसूस करता है।
फिल्म का संदेश—कि जीवन बदलाव के अलावा कुछ नहीं है, कि हम सब किसी न किसी तरह तैरते हुए खरपतवार हैं—आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 1959 में था। और फिल्म की खूबसूरती—वह लाल छाता, वह बारिश, वह जहाज—हमेशा के लिए हमारे दिलों में बस जाती है।
तो अगली बार जब आप कोई जापानी क्लासिक फिल्म (Classic Japanese Film) देखने का मन बनाएं, तो “फ्लोटिंग वीड्स” से शुरू करें। यह आपको एक ऐसी दुनिया में ले जाएगी जहाँ सिनेमा अपने सबसे शुद्ध रूप में दिखाई देता है।
रेटिंग: ★★★★★ (4.5/5 सितारे) — ओज़ू के जादू के आगे।



