वह पहली बार जब अपु ने मेरे दिल को छुआ 2015 कि बात ही, मैं एक छोटे शहर कि लाइब्रेरी में बैठा क्लासिक फिल्मों कि […]
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मूक फिल्मों का जादू: 1920 के दशक की 5 कालजयी फिल्में जिन्हें आपको देखना चाहिए
वह समय जब फिल्में बोलती नहीं, दिलों में उतर जाती थीं कई साल से मैं क्लासिक सिनेमा पर लिख रहा हूँ, और हर बार जब […]
Aquanauts 1980: सोवियत साइंस-फिक्शन फिल्म रिव्यू
कई वर्षों से अधिक समय से, मेरा जुनून— एक ही मिशन के साथ: उन फिल्मों को उजागर और प्रासंगिक बनाना जिन्हें समय भूल गया है। […]
युमेको आइज़ोमे: 1930 के दशक की जापानी फिल्मों की विस्मृत नायिका
युमेको आइज़ोमे 1930 के दशक की उन जापानी अभिनेत्रियों में थीं जिनका चेहरा मूक फ़िल्मों के आख़िरी वर्षों और बोलती फ़िल्मों के शुरुआती दौर—दोनों पर […]
“वूमन ऑफ फायर 1971”: एक ऐसी ज्वाला जिसने कोरियाई सिनेमा की दिशा बदल दी
कोरियन सिनेमा की बात करते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग में “पैरासाइट”, “ओल्डबॉय” या हाल की नेटफ्लिक्स सीरीज़ का नाम आता है, लेकिन 1970 के […]
कम बजट, बड़ा जुगाड़: साइलेंट फिल्ममेकर कैसे बनाते थे जादुई दृश्य
साइलेंट फिल्मों का युग (1890s-1920s) विजुअल इफेक्ट्स का स्वर्णिम काल था, लेकिन एक ऐसा काल जिसे इतिहास ने अक्सर ‘आदिम’ बता कर खारिज कर दिया। […]
Yang Naiwu (1930) Chinese Film Review: न्याय, साज़िश और समाज—एक ऐतिहासिक केस की सिनेमा-यात्रा
ज़्यादातर फिल्म रिव्यू इस सवाल से शुरू होते हैं कि “फिल्म कैसी लगी?”—लेकिन Yang Naiwu and Xiao Baicai (1930) के केस में पहला सवाल ही बदल जाता […]
“बसंत बिलाप 1973”: Soumitra Chatterjee–Aparna Sen की Evergreen रोमांटिक कॉमेडी
Basanta Bilap एक 1973 की भारतीय बंगाली भाषा की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है, जिसका निर्देशन Dinen Gupta ने किया था। यह फिल्म Bimal Kar की […]
जब निर्देशक की आवाज़ ही साउंडट्रैक थी: साइलेंट युग के निर्देशन के राज़
एक पुराने, धूल भरे स्टोररूम की कल्पना कीजिए। हवा में प्रोजेक्टर के बल्ब की गंध और पुराने सेल्युलॉइड की महक। मेरे हाथों में एक फिल्म […]
रस्सी, धुआं और आईने: साइलेंट फिल्मों के स्पेशल इफेक्ट्स के सीक्रेट जुगाड़
आज से करीब बीस-पच्चीस साल पहले की बात है। मुंबई के एक पुराने फिल्म आर्काइव में गहरी धूल दिख रही थी। कागजों के ढेर, खस्ता […]