चेस्टर मॉरिस: बोस्टन ब्लैकी से ऑस्कर तक का सफर

Movie Nurture:चेस्टर मॉरिस: बोस्टन ब्लैकी से ऑस्कर तक का सफर

हॉलीवुड के स्वर्णिम युग में कई ऐसे सितारे हुए जिनकी चमक आज भी बरकरार है, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिनके नाम इतिहास के पन्नों में कहीं खो से गए। चेस्टर मॉरिस उन्हीं भूली-बिसरी हस्तियों में से एक हैं, जिन्होंने मूक फिल्मों से लेकर बोलती फिल्मों के संक्रमण काल में अपनी अलग पहचान बनाई।

एक ऐसा अभिनेता जिसने लायनल बैरीमोर (Lionel Barrymore) जैसे दिग्गज के साथ ब्रॉडवे पर कदम रखा, ऑस्कर नॉमिनेशन हासिल किया, और फिर बोस्टन ब्लैकी (Boston Blackie) के किरदार से घर-घर में पहचाना गया । यह कहानी है चेस्टर मॉरिस की—एक प्रतिभाशाली कलाकार की, जिसने सिनेमा की सात दशकों की यात्रा में अपना योगदान दिया । आइए, इस हॉलीवुड के अनदेखे नायक (Forgotten Hollywood Legend) की जीवन यात्रा पर चलते हैं।

शुरुआती जीवन: कलाकारों के परिवार में जन्म

चेस्टर मॉरिस का असली नाम था जॉन चेस्टर ब्रूक्स मॉरिस (John Chester Brooks Morris)। उनका जन्म 16 फरवरी 1901 को न्यूयॉर्क शहर में हुआ था । वह एक ऐसे परिवार में पले-बढ़े जहाँ कला खून में बहती थी—उनके पिता विलियम मॉरिस (William Morris) ब्रॉडवे के मशहूर अभिनेता थे और माता एटा हॉकिंस (Etta Hawkins) एक जानी-मानी हास्य अभिनेत्री थीं ।

चेस्टर पाँच भाई-बहनों में से एक थे । उनके भाई एड्रियन मॉरिस (Adrian Morris) भी अभिनेता बने और गॉर्डन मॉरिस (Gordon Morris) पटकथा लेखक के रूप में स्थापित हुए । इस कलाप्रेमी माहौल में पलते हुए चेस्टर का भविष्य लगभग तय था, लेकिन रास्ता इतना आसान नहीं था।

उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और महज 15 साल की उम्र में 1917 में ब्रॉडवे पर अपना करियर शुरू कर दिया । उनकी पहली बड़ी भूमिका थी लायनल बैरीमोर के साथ नाटक “द कॉपरहेड” (The Copperhead) में, जो 1918 में मंचित हुआ । यह वही बैरीमोर थे जो बाद में मूक फिल्मों में बोस्टन ब्लैकी का किरदार निभाएंगे—एक दिलचस्प संयोग ।

इसी बीच, 1917 में, उन्होंने मूक फिल्म “एन अमेचर ऑर्फन” (An Amateur Orphan) से फिल्मी दुनिया में कदम रखा । लेकिन यह सिर्फ एक झलक भर थी। अगले कई सालों तक वह थिएटर और वाडविल (Vaudeville) में ही सक्रिय रहे।

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वॉडविल का दौर और परिवार के साथ मंच

1920 के दशक की शुरुआत में, चेस्टर मॉरिस ने अपने परिवार के साथ मिलकर वॉडविल सर्किट (Vaudeville Circuit) में कदम रखा । 1923 से उन्होंने अपने पिता के मूल स्केच “ऑल द हॉरर्स ऑफ होम” (All the Horrors of Home) में अभिनय किया । यह नाटक पहले न्यूयॉर्क के पैलेस थिएटर (Palace Theatre) में प्रदर्शित हुआ, फिर दो सालों तक कीथ-ऑरफियम सर्किट (Keith-Orpheum circuit) पर चला, और 1925 में लॉस एंजेलिस में जाकर समाप्त हुआ ।

इस अनुभव ने उन्हें एक ऐसा मंच दिया जहाँ वह अपने परिवार के साथ कला का रस ले सके। लेकिन चेस्टर की महत्वाकांक्षाएं और बड़ी थीं। वह ब्रॉडवे लौट आए और 1926 में “द होम टाउनर्स” (The Home Towners) और 1927 में “येलो” (Yellow) जैसे नाटकों में अभिनय किया ।

बोलती फिल्मों में पदार्पण और ऑस्कर नामांकन

चेस्टर मॉरिस के करियर का टर्निंग पॉइंट आया 1927 में, जब वह नाटक “क्राइम” (Crime) में अभिनय कर रहे थे। एक टैलेंट स्काउट ने उन्हें देखा और उन्हें फिल्म अनुबंध की पेशकश की ।

अगले दो सालों में सिनेमा जगत में एक क्रांति आ चुकी थी—बोलती फिल्मों (Talkies) का जमाना शुरू हो गया था। चेस्टर मॉरिस ने 1929 में फिल्म “अलिबाई” (Alibi) से अपने बोलती फिल्म करियर की शुरुआत की । और शुरुआत ऐसी कि सीधे ऑस्कर तक पहुंच गए। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (Best Actor) के अकादमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया । यह ऑस्कर इतिहास के शुरुआती दिन थे, जब पुरस्कार को अभी “ऑस्कर” का उपनाम भी नहीं मिला था ।

यह नामांकन किसी सपने से कम नहीं था। एक युवा अभिनेता जिसने अभी-अभी बोलती फिल्मों में कदम रखा था, वह सीधे ऑस्कर की दौड़ में शामिल हो गया। हालांकि वह पुरस्कार नहीं जीत सके, लेकिन यह नामांकन ही उनके करियर की दिशा तय करने के लिए काफी था।

एमजीएम और बड़े बजट की फिल्मों का दौर

ऑस्कर नामांकन के बाद चेस्टर मॉरिस के लिए बड़े स्टूडियो के दरवाजे खुल गए। 1930 में उन्होंने एमजीएम (MGM) की ऐतिहासिक जेल नाटकीय फिल्म “द बिग हाउस” (The Big House) में अभिनय किया । यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी और इसने चेस्टर मॉरिस को स्टारडम की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया ।

“द बिग हाउस” में उनके साथ वैलेस बीयरी (Wallace Beery) और रॉबर्ट मोंटगोमरी (Robert Montgomery) जैसे कलाकार थे । यह फिल्म उस दौर की सबसे प्रभावशाली जेल फिल्मों में गिनी जाती है।

इसके बाद के वर्षों में चेस्टर मॉरिस ने एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण फिल्मों में काम किया। 1930 में ही वह नॉर्मा शियरर (Norma Shearer) के साथ “द डिवोर्सी” (The Divorcee) में नजर आए । 1932 में उन्होंने जीन हार्लो (Jean Harlow) के साथ “रेड-हेडेड वुमन” (Red-Headed Woman) में अभिनय किया ।

यह वह दौर था जब चेस्टर मॉरिस यूनाइटेड आर्टिस्ट्स (United Artists) और एमजीएम के लिए लगातार काम कर रहे थे । उनकी छवि एक सख्त और मर्दाना अभिनेता (Tough Guy) की बन रही थी । “द केस ऑफ सार्जेंट ग्रिशा” (The Case of Sergeant Grischa, 1930), “कॉरसेयर” (Corsair, 1931), “द मिरेकल मैन” (The Miracle Man, 1932)—ये उनकी उस दौर की कुछ प्रमुख फिल्में थीं ।

करियर का उतार और बी-मूवीज की ओर रुख

लेकिन हॉलीवुड में सितारे हमेशा एक सी चमक नहीं रखते। 1930 के दशक के मध्य तक चेस्टर मॉरिस की लोकप्रियता में गिरावट आने लगी । वजह? शायद बदलते समय के साथ तालमेल न बिठा पाना या फिर हॉलीवुड की क्रूर प्रतिस्पर्धा।

दशक के अंत तक वह बी-मूवीज (B-Movies) में नज़र आने लगे । लेकिन यहां भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 1938 में “स्मैशिंग द रैकेट्स” (Smashing the Rackets) और 1939 में “फाइव केम बैक” (Five Came Back) जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया ।

“फाइव केम बैक” आज भी एक कल्ट क्लासिक (Cult Classic) मानी जाती है—एक ऐसी फिल्म जिसमें एक छोटे विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद के हालात दिखाए गए थे। चेस्टर मॉरिस ने इसमें बिल ब्रूक्स (Bill Brooks) नामक एक अपराधी का किरदार निभाया था, जिसे दर्शक आज भी याद करते हैं ।

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बोस्टन ब्लैकी: वह किरदार जिसने करियर को नया जीवन दिया

1941 में चेस्टर मॉरिस के करियर को एक नई पहचान मिली—बोस्टन ब्लैकी (Boston Blackie) के किरदार के रूप में । यह एक अपराधी से जासूस बने व्यक्ति की कहानी थी, जिसे लेखक जैक बॉयल (Jack Boyle) ने रचा था ।

कोलंबिया पिक्चर्स (Columbia Pictures) ने “मीट बोस्टन ब्लैकी” (Meet Boston Blackie) नामक फिल्म से इस सीरीज की शुरुआत की । यह सिर्फ 58 मिनट की एक बी-मूवी थी, लेकिन इसकी कहानी और निर्देशन ने इसे खास बना दिया । चेस्टर मॉरिस ने बोस्टन ब्लैकी को अपना व्यक्तिगत आकर्षण दिया—वह हल्के-फुल्के हो सकते थे, तो कभी सख्त और खतरनाक, जैसी भी स्थिति मांगती थी ।

यह सीरीज इतनी सफल रही कि चेस्टर मॉरिस ने कुल 14 फिल्मों में बोस्टन ब्लैकी का किरदार निभाया । यह सीरीज 1949 तक चली ।

इन फिल्मों की खासियत थी उनका अनूठा फॉर्मूला—बोस्टन ब्लैकी, जो पहले जौहरी चोर (Jewel Thief) था, अब सुधर गया है, लेकिन जब भी कोई बड़ा अपराध होता है, पुलिस को शक सबसे पहले उसी पर जाता है । और फिर ब्लैकी अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए खुद ही असली अपराधी को पकड़ता है ।

इस सीरीज में उनके साथ जॉर्ज ई. स्टोन (George E. Stone) ने उनके साथी “रंट” (Runt) की भूमिका निभाई, जो लगभग सभी फिल्मों में उनके साथ रहे । रिचर्ड लेन (Richard Lane) इंस्पेक्टर फैराडे (Inspector Farraday) के रूप में उनके प्रतिद्वंद्वी बने ।

बोस्टन ब्लैकी की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि 1944 में चेस्टर मॉरिस ने इसी किरदार के साथ रेडियो पर भी कदम रखा । एनबीसी (NBC) पर प्रसारित इस रेडियो सीरीज ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ा दिया ।

जादू का शौक और यूएसओ शोज

चेस्टर मॉरिस की एक और खासियत थी—उन्हें जादू (Magic) का बेहद शौक था । उन्होंने महज 12 साल की उम्र में जादू सीखना शुरू कर दिया था और वह एक शीर्ष शौकिया जादूगर (Top Amateur Magician) माने जाते थे ।

द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान उन्होंने अपने इस हुनर का इस्तेमाल देश की सेवा के लिए किया। उन्होंने 350 से अधिक यूएसओ शोज (USO Shows) में प्रदर्शन किया, जहां वह सैनिकों के मनोरंजन के लिए जादू के करतब दिखाते थे ।

फिल्मों के सेट पर भी उनका यह शौक उनके साथ रहता था। निर्देशक एडवर्ड डीमिट्रिक (Edward Dmytryk) ने बताया कि चेस्टर मॉरिस को स्टंट (Stunt) करने से नफरत थी, लेकिन शॉट्स के बीच ताश के जादू (Card Tricks) दिखाना उन्हें बेहद पसंद था ।

व्यक्तिगत जीवन और दो शादियां

चेस्टर मॉरिस का निजी जीवन भी उतना ही दिलचस्प था जितना उनका फिल्मी करियर। उन्होंने दो शादियां कीं।

पहली शादी 8 नवंबर 1926 को सुज़ैन किलबॉर्न (Suzanne Kilbourne) से हुई । इस शादी से उनके दो बच्चे हुए—जॉन ब्रूक्स (John Brooks) और सिथिया (Cynthia) । लेकिन यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला। नवंबर 1939 में तलाक की कार्यवाही शुरू हुई और 26 नवंबर 1940 को तलाक अंतिम रूप से तय हो गया ।

तलाक के चार दिन बाद ही, 30 नवंबर 1940 को, उन्होंने दूसरी शादी कर ली—इस बार सामाजिक कार्यकर्ता लिलियन केंटन बार्कर (Lillian Kenton Barker) से । यह समारोह अभिनेता फ्रैंक मॉर्गन (Frank Morgan) के घर पर आयोजित हुआ । इस शादी से 1944 में उनके बेटे केंटन (Kenton) का जन्म हुआ । यह रिश्ता 1970 में चेस्टर मॉरिस की मृत्यु तक बना रहा।

एक दुखद संयोग यह कि उनके बेटे केंटन मॉरिस की भी 11 सितंबर 2008 को एक निजी विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई—ठीक अपने पिता की मृत्यु की तारीख पर ।

टेलीविजन और थिएटर में वापसी

1949 में बोस्टन ब्लैकी की आखिरी फिल्म “बोस्टन ब्लैकीज़ चाइनीज़ वेंचर” (Boston Blackie’s Chinese Venture) के बाद चेस्टर मॉरिस ने फिल्मों से संन्यास ले लिया । उन्होंने खुद कहा, “इतनी फिल्मों के बाद, कोई निर्माता मुझे ‘ए’ फिल्म में नहीं डालना चाहता, चाहे मैं उसके लिए पैसे ही क्यों न दूं। मेरे पास एक ही रास्ता था—बाहर निकलो और थिएटर में वापस चले जाओ।”

और वह थिएटर लौट आया। 1950 का दशक उनके लिए थिएटर और टेलीविजन पर केंद्रित रहा। 1954 में वह ब्रॉडवे पर कॉमेडी “द फिफ्थ सीजन” (The Fifth Season) में नज़र आए ।

टेलीविजन पर उन्होंने कई एंथोलॉजी सीरीज (Anthology Series) में अतिथि भूमिकाएं निभाईं । “कैमियो थिएटर” (Cameo Theatre), “लाइट्स आउट” (Lights Out), “टेल्स ऑफ टुमॉरो” (Tales of Tomorrow), “सस्पेंस” (Suspense), “डेंजर” (Danger), “स्टूडियो वन” (Studio One), और “क्राफ्ट टेलीविजन थिएटर” (Kraft Television Theatre) जैसे लोकप्रिय शोज में वह दिखे ।

1960 में उन्होंने सीबीएस (CBS) की समर रिप्लेसमेंट सीरीज “डायग्नोसिस: अननोन” (Diagnosis: Unknown) में डिटेक्टिव लेफ्टिनेंट मैक्स रिटर (Detective Lieutenant Max Ritter) की नियमित भूमिका निभाई ।

इसी बीच वह थिएटर से भी जुड़े रहे। 1960 में वह एडवाइज एंड कंसेंट (Advise and Consent) के मंचन में सीनेटर बॉब मुनसन (Senator Bob Munson) की भूमिका में नज़र आए । 1965 में उन्होंने “द सब्जेक्ट वाज रोजेज” (The Subject Was Roses) में जैक अल्बर्टसन (Jack Albertson) की जगह ली और ब्रॉडवे पर वापसी की ।

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आखिरी फिल्म और अंतिम दिन

1960 के दशक के उत्तरार्ध में चेस्टर मॉरिस की तबीयत खराब होने लगी। उन्हें पेट के कैंसर (Stomach Cancer) का पता चला ।

लेकिन बीमारी के बावजूद वह काम करते रहे। 1970 में उनकी आखिरी फिल्म “द ग्रेट व्हाइट होप” (The Great White Hope) रिलीज हुई । इस फिल्म में उन्होंने पॉप वीवर (Pop Weaver) का किरदार निभाया था। यह फिल्म उनकी मृत्यु के बाद रिलीज हुई ।

फिल्म की शूटिंग खत्म करने के बाद वह न्यू होप, पेंसिल्वेनिया (New Hope, Pennsylvania) में बक्स काउंटी प्लेहाउस (Bucks County Playhouse) में नाटक “द केन म्यूटिनी कोर्ट मार्शल” (The Caine Mutiny Court Martial) में अभिनय कर रहे थे ।

11 सितंबर 1970 को उनके साथ दोपहर के भोजन का कार्यक्रम था। जब वह समय पर नहीं पहुंचे और फोन का जवाब नहीं दिया, तो निर्माता ली आर योप (Lee R. Yopp) उनके मोटल कमरे पर गए और वहां उनका शव फर्श पर पड़ा मिला । काउंटी कोरोनर ने मौत का कारण बार्बिट्यूरेट (Barbiturate) की अत्यधिक खुराक बताया ।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह आत्महत्या थी या दुर्घटना, क्योंकि वह अच्छे मूड में थे और कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था । उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया गया और अस्थियों को जर्मनी की एक नदी में बिखेर दिया गया ।

विरासत: एक अभिनेता जिसे याद रखा जाना चाहिए

चेस्टर मॉरिस की विरासत क्या है? वह एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने मूक फिल्मों से लेकर बोलती फिल्मों, रेडियो, टेलीविजन और थिएटर तक—हर माध्यम में अपनी छाप छोड़ी।

उन्हें आज भी बोस्टन ब्लैकी के किरदार के लिए याद किया जाता है । उनके द्वारा निभाया गया यह किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि माना जाता है कि “बोस्टन हेयरकट” (Boston Haircut)—जहां बालों को सीधे पीछे की ओर कंघी किया जाता है—इसी किरदार से प्रेरित था ।

लेकिन वह सिर्फ बोस्टन ब्लैकी ही नहीं थे। वह ऑस्कर-नामांकित अभिनेता थे जिन्होंने “द बिग हाउस” और “द डिवोर्सी” जैसी क्लासिक फिल्मों में अभिनय किया । वह एक जादूगर थे जिन्होंने सैनिकों का मनोरंजन किया। वह एक थिएटर कलाकार थे जो ब्रॉडवे पर दशकों तक सक्रिय रहे।

उनका करियर हॉलीवुड के बदलते परिदृश्य का एक दस्तावेज है—मूक फिल्मों से बोलती फिल्मों में संक्रमण, स्टूडियो सिस्टम का उत्कर्ष और पतन, बी-मूवीज का उदय, और टेलीविजन का आगमन। उन्होंने सात दशकों तक लगातार काम किया —यह उनके समर्पण और प्रतिभा का प्रमाण है।

आज जब हम पुराने हॉलीवुड (Old Hollywood) की बात करते हैं, तो चेस्टर मॉरिस का नाम अक्सर भुला दिया जाता है। लेकिन उनकी फिल्में आज भी मौजूद हैं। टर्नर क्लासिक मूवीज (Turner Classic Movies) पर उनकी कई फिल्में देखी जा सकती हैं । और जब भी कोई फिल्म प्रेमी “द बिग हाउस” या “फाइव केम बैक” देखता है, तो चेस्टर मॉरिस की प्रतिभा एक बार फिर जीवित हो उठती है।

निष्कर्ष

चेस्टर मॉरिस की कहानी संघर्ष, सफलता, पतन और पुनरुत्थान की कहानी है। न्यूयॉर्क के एक कलाकार परिवार में जन्मे इस लड़के ने महज 15 साल की उम्र में ब्रॉडवे पर कदम रखा, ऑस्कर नामांकन हासिल किया, बोस्टन ब्लैकी जैसा अमर किरदार निभाया, और आखिर तक अभिनय से जुड़े रहे।

वह उन हॉलीवुड के भूल-बिसरे सितारों (Forgotten Hollywood Stars) में से हैं, जिनका योगदान सिनेमा के इतिहास में हमेशा बना रहेगा। उनकी फिल्में आज भी उतनी ही मनोरंजक हैं जितनी अपने समय में थीं।

अगली बार जब आप कोई पुरानी फिल्म नोयर (Film Noir) या 1940 के दशक की कोई जासूसी फिल्म (Detective Film) देखें, तो चेस्टर मॉरिस को याद कीजिएगा—वह अभिनेता जिसने बोस्टन ब्लैकी को अमर बना दिया।

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