हैलो दोस्तों! आज हम एक ऐसी फिल्म की बात करने वाले हैं, जिसने सदी के मध्य में बैठे दर्शकों की रूह कंपा दी थी। वो दौर था जब सीजीआई नहीं थी, जंप स्केयर का कॉन्सेप्ट नहीं था, और न ही खून की नदियाँ बहाने का फैशन था। उस जमाने का डर एक अलग किस्म का था – सायेदार, मनोवैज्ञानिक और बेहद स्टाइलिश।
आज की इस रिव्यु में हम विलियम कैसल की महरूम फिल्म “House on Haunted Hill” (1959) की गलियों में खो जाएँगे। यह सिर्फ एक फिल्म रिव्यु नहीं, बल्कि उस जमाने के हॉरर सिनेमा की एक झलक है, जहाँ कहानी और एक्टिंग पर जोर था। तो चलिए, शुरुआत करते हैं इस रहस्यमयी महल के दरवाजे से दस्तक देकर।
एक शानदार शुरुआत: प्लॉट जो आपको अंदर खींच लेता है
फिल्म की शुरुआत ही एक डरावने अनोखे अंदाज में होती है। एक भूतिया महल दिखता है और एक बूढ़ा, डरावना सा Caretaker (करीमदार) हमें इसके “इतिहास” के बारे में बताता है कि कैसे इसकी मालकिन और छह अन्य लोगों की इसी घर में सिर धड़ से अलग होकर मौत हुई थी। यह introduction बिल्कुल नॉस्टैल्जिक B-ग्रेड हॉरर की तरह है, जो आपको तैयार कर देता है कि अब आप कुछ अलग सा देखने वाले हैं।
असली कहानी शुरू होती है eccentric करोड़पति फ्रेडरिक लॉरेंस (विंसेंट प्राइस) से। वह अपनी खूबसूरत लेकिन छल से भरी पत्नी एनाबेल (कैरोल ओहमार्ट) के लिए एक अजीबोगरीब जन्मदिन पार्टी का आयोजन करता है। उसने पाँच अजनबियों को आमंत्रित किया है। शर्त यह है कि अगर ये पाँचों लोग इस भूतहा महल में पूरी रात (रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक) बिता देंगे, तो उनमें से हर एक को 10,000 डॉलर (आज के हिसाब से एक बहुत बड़ी रकम) मिलेगा।
ये पाँच मेहमान हैं:
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एक पायलट (लैंस श्रॉडर)
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एक column writer (रूथ ब्रिज्स)
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महल की मालकिन (ऐलेना वर्डन)
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एक डॉक्टर (डेविड ट्रेंट)
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और कंपनी का मैनेजर (वाटसन प्रिचर्ड)
यहाँ से फिल्म की असली जुगाली शुरू होती है। हर किरदार के अपने-अपने मंसूबे हैं। फ्रेड्रिक और एनाबेल एक-दूसरे से नफरत करते हैं और लगातार एक-दूसरे को मारने की साजिशें रचते रहते हैं। मेहमान भी पैसे के लालच में इस जानलेवा खेल में शामिल होते हैं। ऐसे में, सवाल यह उठता है कि इस महल में असली खतरा किससे है? क्या ये भूतों से है? या फिर इन्सानों की साजिशों से?
विंसेंट प्राइस: द किंग ऑफ क्लासिक हॉरर
अगर इस फिल्म की रूह किसी एक शख्सियत को माना जाए, तो वो हैं विंसेंट प्राइस। उनकी मौजूदगी ही किसी भी सीन को यादगार बना देती है। फ्रेडरिक लॉरेंस के किरदार में वह जिस तरह का व्यंग्य, शातिराना मज़ाक और शानदार अंदाज़ पेश करते हैं, वह लाजवाब है। वह डरावने नहीं दिखते, बल्कि उनकी मुस्कुराहट ही आपको शक में डाल देती है। वह आपको पता ही नहीं चलने देते कि वह हीरो हैं या विलेन। यही उनके किरदार की सबसे बड़ी ताकत है। विंसेंट प्राइस का नाम ही विंटेज हॉरर मूवीज की गुणवत्ता का पर्याय बन गया है।
विलियम कैसल का जादू: गिमिक्स जो दर्शकों को डरा देते थे
विलियम कैसल सिर्फ एक डायरेक्टर ही नहीं, बल्कि एक शोमैन थे। उन्हें अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए हैरतअंगेज गिमिक्स (चाल) इस्तेमाल करने के लिए जाना जाता था। “House on Haunted Hill” के लिए उन्होंने एक लाजवाब गिमिक ईजाद किया, जिसका नाम था “Emergo”।
जब फिल्म में एक भूतिया, चमकती हुई कंकाल की हड्डी स्क्रीन पर दिखती थी, तो सिनेमाघरों में छत से एक प्लास्टिक का glow-in-the-dark कंकाल दर्शकों के ऊपर से उड़ता हुआ निकलता था! सोचिए उस जमाने के दर्शकों पर इसका क्या असर होता होगा। यह गिमिक आज के context में देखने में भले ही मज़ाकिया लगे, लेकिन उस वक्त यह लोगों के लिए एक terrifying experience था। यही विलियम कैसल के गिमिक्स की ताकत थी, जिन्होंने इस फिल्म को एक साधारण B-मूवी से आगे बढ़कर एक इवेंट बना दिया।
डर पैदा करने के तरीके: सस्पेंस और एटमॉस्फेयर
आज के हॉरर फिल्मों के मुकाबले, “House on Haunted Hill” बिल्कुल अलग तरह से काम करती है। यहाँ खौफ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि दिमाग में बसाने के लिए बनाया गया है।
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ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमैटोग्राफी: काले और सफेद रंग ने इस फिल्म को एक अलग ही डरावनी छवि दी है। गहरी छायाएँ, कोनों में अंधेरा और चेहरों पर पड़ने वाली रोशनी एक unsettling mood पैदा करती है। यह ब्लैक एंड व्हाइट हॉरर का जादू है जो रंगीन फिल्मों में कभी नहीं आ पाता।
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साउंड डिजाइन: फिल्म में संवाद और खामोशी का बहुत ही बेहतरीन इस्तेमाल हुआ है। अचानक चीख़ने की आवाज़, दरवाजे का चरचराना, और दूर से आती हँसी की आवाज़ दर्शकों की नस-नस में डर भर देती है।
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प्रैक्टिकल इफेक्ट्स: फिल्म में जो भूत दिखते हैं, वे बहुत ही साधारण से प्रभावों से बनाए गए हैं। जैसे एक औरत जिसके चेहरे पर बस खाली जगह है, या एक बूढ़ी औरत जो अचानक से दिखकर गायब हो जाती है। ये इफेक्ट्स आज के मुकाबले बहुत साधारण लग सकते हैं, लेकिन उस वक्त के context में ये काफी डरावने थे और आज भी एक अजीब सा eerie feeling पैदा करते हैं।
कमजोरियाँ? या फिर उस दौर का चस्का?
आज की नजर से देखें तो फिल्म की कुछ सीमाएँ नजर आती हैं। एक्टिंग कहीं-कहीं थोड़ी theatrical और over-the-top लग सकती है। प्लॉट में कुछ holes भी महसूस हो सकते हैं। लेकिन, इन सबको फिल्म के ऐतिहासिक context में देखना ज़रूरी है। यह फिल्म एक लो-बजट हॉरर फिल्म थी, जिसे बनाने का मकसद सिर्फ इतना था कि दर्शकों को एक शानदार और डरावना मनोरंजन मिले। और इस मामले में, यह फिल्म बिल्कुल सफल रही।
विरासत: आज के हॉरर सिनेमा पर इसका असर
“House on Haunted Hill” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक विरासत है। इसने ही “haunted house party” के ट्रोप को लोकप्रिय बनाया, जिसे आज भी कई फिल्मों और वीडियो गेम्स में देखा जा सकता है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि डराने के लिए crores के बजट या दिमाग हिला देने वाले विजुअल्स की जरूरत नहीं होती। एक मजबूत कॉन्सेप्ट, कुछ यादगार किरदार और एक डरावना माहौल बनाने की कला ही काफी है।
1999 में इसका एक रीमेक भी बना, लेकिन 1959 की यह original फिल्म आज भी अपनी एक अलग जगह बनाए हुए है। यह क्लासिक हॉरर फिल्मों के शौकीनों और सिनेमा के इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों के लिए एक must-watch film है।
अंतिम फैसला: क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए?
अगर आप…
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आधुनिक, ज्यादा खून-खराबे वाली हॉरर फिल्मों से ऊब चुके हैं।
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विंटेज हॉरर मूवीज का स्वाद चखना चाहते हैं।
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विंसेंट प्राइस की iconic एक्टिंग देखने के इच्छुक हैं।
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सिनेमा के इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी को समझना चाहते हैं।
…तो “House on Haunted Hill” (1959) आपके लिए ही है।
यह फिल्म आपको blood-curdling डर नहीं देगी, बल्कि एक eerie, unsettling feeling देकर आपके दिमाग में घर कर जाएगी। यह एक ऐसी क्लासिक हॉरर फिल्म है जो आपको एक पुराने जमाने के डर का अनोखा और यादगार अनुभव देगी। तो, इस हलोवीन पर या किसी भी रात, लाइटें बंद करके इस महल में दाखिल होने का साहस जुटाइए। शायद आपको भी कोई “इनविटेशन” मिल जाए!


