हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग की वो मासूम चेहरे वाली शोख लड़की, जिसकी बड़ी-बड़ी आंखें और सहज मुस्कान ने लाखों दिलों को बांध लिया था। निम्मी, जिन्हें असल नाम नवाब बानो कहा जाता था, आज भले ही दुनिया की नजरों से ओझल हो गईं, लेकिन उनकी फिल्मों की वो अनकही कहानियां आज भी जीवंत हैं।
शुरुआती जीवन: आगरा से बॉम्बे तक का सफर
18 फरवरी 1933 को आगरा में जन्मी निम्मी का बचपन दर्द भरा रहा। उनकी मां वहीदान एक मशहूर तवायफ, गायिका और अभिनेत्री थीं, जो फिल्म इंडस्ट्री से अच्छी तरह जुड़ी हुईं थीं। पिता अब्दुल हकीम आर्मी कांट्रैक्टर थे, लेकिन परिवार टूट चुका था। मात्र 11 साल की उम्र में मां को खोने के बाद निम्मी अपनी नानी के साथ अबोताबाद (अब पाकिस्तान) चली गईं। 1947 के बंटवारे के बाद वे मुंबई लौट आईं, जहां चाची ज्योति (पूर्व अभिनेत्री) और चाचा जी.एम. दुर्रानी के घर रहीं।

स्कूल न जाने वाली निम्मी ने घर पर मौलवी से पढ़ाई की और बाद में इंग्लिश ट्यूशन लिया। फिल्मों का शौक बचपन से था। 1948 में मां की दोस्ती के चलते महबूब खान की ‘अंदाज’ की शूटिंग देखने गईं। वहां राज कपूर की नजर उन पर पड़ी। राज कपूर ने तुरंत अपनी फिल्म ‘बरसात’ के लिए चुन लिया और नाम रखा ‘निम्मी’। 16 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली निम्मी की ये मुलाकात किस्मत बदलने वाली साबित हुई।
‘बरसात’ से स्टारडम: शोखपन का जलवा
1949 में रिलीज हुई ‘बरसात’ ने निम्मी को रातोंरात स्टार बना दिया। राज कपूर, नर्गिस और प्रेमनाथ के साथ नीला का रोल निभाया, जो एक मासूम पहाड़ी लड़की थी। फिल्म सुपरहिट हुई। निम्मी के सहज अभिनय ने दर्शकों को दीवाना बना दिया। उसके बाद ‘सजा’ (देव आनंद के साथ), ‘दीदार’, ‘दाग’ जैसी फिल्में आईं। दिलीप कुमार के साथ उनकी जोड़ी कमाल की रही – ‘दीदार’ और ‘दाग’ दोनों ब्लॉकबस्टर।
1952 में महबूब खान की ‘आन’ – भारत की पहली टेक्नीकलर फिल्म – ने निम्मी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। दिलीप कुमार और नादिरा के साथ मंगला का रोल किया। लंदन प्रीमियर पर इर롤 फ्लिन ने हाथ चूमने की कोशिश की, तो निम्मी ने साफ कहा, “आई एम इंडियन गर्ल!” अखबारों ने उन्हें ‘अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया’ कहा। हॉलीवुड से चार ऑफर आए, यहां तक कि सील बिबी डेमिल ने बुलाया, लेकिन निम्मी ने तहजीब के नाम पर ठुकरा दिया।
निम्मी का शोखपन उनकी फिल्मों में झलकता था। ‘उड़न खटोला’ (1955) में दिलीप के साथ डबल रोल, ‘कुंदन’ में सोहराब मोदी की फिल्म में मां-बेटी। 1956 की ‘बसंत बहार’ और ‘भाई-भाई’ ने उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का क्रिटिक्स अवॉर्ड दिलाया। लता मंगेशकर ने उनके सारे गाने गाए। 1950 के दशक की वे सबसे महंगी हीरोइनों में शुमार रहीं।
प्रमुख फिल्में: यादगार भूमिकाएं
निम्मी ने 50 से ज्यादा फिल्में कीं, ज्यादातर गोल्डन एरा की। यह रही उनकी हिट फिल्मों की झलक:

| वर्ष | फिल्म | भूमिका/खासियत | हीरो |
|---|---|---|---|
| 1949 | बरसात | नीला (पहाड़ी बेल) | राज कपूर, प्रेमनाथ |
| 1951 | दीदार | चंपा | दिलीप कुमार |
| 1952 | दाग | पारो | दिलीप कुमार |
| 1952 | आन | मंगला (पहली कलर फिल्म) | दिलीप कुमार |
| 1954 | अमर | सोनिया (कंट्रोवर्शियल रेप स्टोरी) | दिलीप कुमार, मधुबाला |
| 1955 | उड़न खटोला | सोनी/शिबू | दिलीप कुमार |
| 1955 | कुंदन | राधा/उमा (डबल रोल) | सुनील दत्त |
| 1956 | बसंत बहार | गोपी | भारत भूषण |
| 1956 | भाई-भाई | रानी | अशोक कुमार |
| 1963 | मेरे महबूब | नजमा (बहन का रोल) | राजेंद्र कुमार |
| 1964 | पूजा के फूल | गौरी (अंधी लड़की) | धर्मेंद्र |
| 1986 | लव एंड गॉड | लैला (देरी से रिलीज) | गुरु दत्त/संजीव कुमार |
ये फिल्में निम्मी की बहुमुखी प्रतिभा दिखाती हैं – गांव की शोख लड़की से फंतासी जिन्न (‘अलीफ लैला’) तक।
अनकही दास्तां: राज कपूर से राखी तक
निम्मी की जिंदगी में कई अनकही बातें हैं। ‘बरसात’ की शूटिंग के दौरान वह राज कपूर से डरती थीं। उसके बाद राज ने राखी बांधवाई, ताकि भाई-बहन का रिश्ता बने और उनका डर ख़त्म हो। उसके बाद निम्मी जीवन भर राज कपूर को राखी बांधती रहीं, पूरा कपूर परिवार उनका सम्मान करता है।
मधुबाला से गहरी दोस्ती। ‘अमर’ की शूटिंग पर वह मधुबाला से दिलीप कुमार के बारे में बातें शेयर करती थी। महबूब खान की ‘मदर इंडिया’ के लिए पैसे की तंगी में निम्मी ने गुप्त रूप से मदद की – पल्लू में नोट बांधकर दिए, बिना बताए।
हॉलीवुड ऑफर ठुकराने की वजह – किसिंग सीन न करने की जिद। वे कहतीं थीं, “मैं हिंदुस्तानी तहजीब वाली हूं।” एक और अनकही – ‘लव एंड गॉड’ में लैला का रोल, जो गुरु दत्त की मौत और के.आसिफ के निधन से अधर में लटक गई थी। 1986 में रिलीज हुई, लेकिन फ्लॉप।
करियर का पतन: एक गलती ने सब उजाड़ दिया
1960 के दशक में निम्मी चूजीनशियस हो गईं थीं। उन्होंने ‘साधना’ और ‘वो कौन थी’ ठुकराईं, जो वैजन्तीमाला और साधना की हिट बनीं। सबसे बड़ी गलती – 1963 की ‘मेरे महबूब’ में लीड रोल को ठुकराया,और बहन का रोल लिया। साधना हीरोइन बनीं, फिल्म हिट हुई और साधना स्टार बन गईं। निम्मी को बाद में अफसोस हुआ – और उसके बाद “अच्छे रोल के ऑफर ही नहीं आए।” शादी के बाद 1965 में उन्होंने फ़िल्मी जगत से संन्यास ले लिया।
निजी जिंदगी: प्यार, शादी और तन्हाई
स्क्रिप्ट राइटर अली रजा से 1965 में निम्मी ने शादी की। वह दोनों ‘अंदाज’ फिल्म के सेट पर मिले थे। बच्चे न होने पर उन्होंने बहन के बेटे को गोद लिया, जो अब मैनचेस्टर में रहता है। अली के 2007 में निधन होने के बाद निम्मी जुहू के फ्लैट में अकेली रही। शायरी का शौक, खुशमिजाज अंदाज़ में उन्होंने अपना बाकी का जीवन व्यतीत किया।
विरासत: भूली न गई वो शोख अदाकारा
निम्मी को अपनी अदाकारी के लिए कई सारे अवॉर्ड मिले। उन्हें आउटलुक मैगज़ीन की 75 बेस्ट एक्ट्रेसेस में शुमार किया गया। निम्मी का 25 मार्च 2020 को 87 साल की उम्र में कोविड जैसी बीमारी से मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया। लेकिन उनकी फिल्में अमर हैं, और हिंदी सिनेमा की वो ‘अनकिस्ड गर्ल’ आज भी दिलों में बसी है।
