क्या हो अगर आप नशे में धुत होकर एकदम सही हत्या की साजिश रच दें, और अगली सुबह उठें तो पाएं कि वह हत्या असल में हो गई है—और आप खुद उसके मुख्य संदिग्ध हैं? 1947 में आई हॉलीवुड की क्लासिक फिल्म नोयर “ब्लाइंड स्पॉट” (Blind Spot) बिल्कुल इसी सवाल पर टिकी एक रहस्यमयी और रोमांचक कहानी है।
आज से करीब अस्सी साल पहले रिलीज हुई यह फिल्म अपने जमाने की उन खास भूली-बिसरी फिल्मों (Forgotten Film Noir) में गिनी जाती है, जिनमें एक अलग ही तरह का जादू था। यह कोई बड़े बजट की भव्य फिल्म नहीं थी, बल्कि कोलंबिया पिक्चर्स की एक बी-मूवी (B-Movie) थी, लेकिन अपनी कहानी और ट्विस्ट के दम पर इसने सिनेप्रेमियों के दिलों में एक खास जगह बनाई। आइए, इस क्लासिक हॉलीवुड रहस्य (Classic Hollywood Mystery) फिल्म की गलियों में घूमते हैं और समझते हैं कि आखिर यह “ब्लाइंड स्पॉट” इतनी खास क्यों है।
फिल्म का परिचय: एक नजर ‘ब्लाइंड स्पॉट’ पर
“ब्लाइंड स्पॉट” 6 फरवरी 1947 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी । रॉबर्ट गॉर्डन (Robert Gordon) के निर्देशन में बनी इस फिल्म की पटकथा मार्टिन गोल्डस्मिथ (Martin Goldsmith) ने लिखी थी, जो उस दौर की मशहूर फिल्म “डिटोर” (Detour) के लिए भी जाने जाते थे । कहानी बैरी पेरोन (Barry Perowne) की मूल कहानी पर आधारित थी ।
यह फिल्म सिर्फ 73 मिनट की है, लेकिन इन 73 मिनटों में यह दर्शकों को एक ऐसे लेखक की दुनिया में ले जाती है, जो शराब की लत और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और अचानक एक हत्या के आरोप में फंस जाता है । इस छोटी सी अवधि में फिल्म अपने आपको एक तनावपूर्ण थ्रिलर (Tense Thriller) के रूप में स्थापित करती है।
कहानी का सार: नशे में रची गई साजिश
फिल्म की कहानी है तो सीधी, लेकिन इसमें एक से बढ़कर एक ट्विस्ट हैं। कहानी के केंद्र में हैं जेफरी एंड्रयूज (Chester Morris) , एक लेखक जो दिल से गंभीर साहित्य लिखना चाहता है, लेकिन उसकी किताबें नहीं चलतीं। वह आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुका है और एक तहखाने के अपार्टमेंट में रहता है। उसका प्रकाशक, हेनरी स्मॉल (William Forrest), उसे एक ऐसे अनुबंध में फंसाए रखता है जो जेफरी के लिए बेहद नुकसानदेह है ।
एक दिन, हिम्मत जुटाने के लिए खूब शराब पीकर जेफरी अपने प्रकाशक के पास पैसे मांगने जाता है। वहां वह स्मॉल और एक सफल रहस्य लेखक लॉयड हैरिसन (Steven Geray) से मिलता है। नशे में धुत जेफरी यह साबित करने के लिए कि लोकप्रिय किताबें लिखना कितना आसान है, तुरंत एक हत्या की कहानी गढ़ता है—एक बंद कमरे (Locked-Room Mystery) में होने वाली हत्या, जहां कमरा अंदर से बंद हो और शव पड़ा हो ।
बाद में वह उसी इमारत की नीचे वाली बार में चला जाता है और बारटेंडर माइक (Sid Tomack) को भी यह कहानी सुनाता है। तभी वहां प्रकाशक की खूबसूरत सचिव एवलिन ग्रीन (Constance Dowling) भी आ जाती है, और जेफरी उसे भी अपनी कहानी की पेचीदगियां बताता है ।
अगली सुबह, जेफरी को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। प्रकाशक हेनरी स्मॉल की हत्या उसी तरह हुई है, जैसा जेफरी ने अपनी कहानी में बताया था—एक बंद कमरे के अंदर। और बुरी बात यह है कि जेफरी को रात भर का कुछ भी याद नहीं है। वह ब्लैकआउट (Blackout) में चला गया था । अब उसे न सिर्फ अपनी बेगुनाही साबित करनी है, बल्कि उस शराब के नशे में बताई गई हत्या की विधि (Murder Method) भी याद करनी है, जो असली हत्यारे को पकड़ने की कुंजी हो सकती है।
कलाकारों का जादू: चेस्टर मॉरिस से कॉन्स्टेंस डाउलिंग तक
इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकार हैं, जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से किरदारों में जान फूंक दी।
चेस्टर मॉरिस (जेफरी एंड्रयूज के रोल में): चेस्टर मॉरिस उस जमाने के मशहूर अभिनेता थे, जिन्हें “बोस्टन ब्लैकी” (Boston Blackie) सीरीज के लिए जाना जाता था । “ब्लाइंड स्पॉट” में उनका किरदार काफी चुनौतीपूर्ण था। फिल्म के शुरुआती हिस्से में उनका शराबी (Drunk Performance) का अभिनय इतना सटीक है कि कई दर्शकों को वह थोड़ा परेशान करने वाला लगता है, लेकिन यही इस किरदार की सच्चाई है । जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है और उनका किरदार संभलता है, वैसे-वैसे मॉरिस अपने असली रंग में आते हैं और एक मजबूर, भ्रमित लेकिन सच्चाई की तलाश में भटकते इंसान का किरदार बखूबी निभाते हैं। उनके संवाद अदायगी का अंदाज, जैसे “45 कैलिबर का दांत दर्द” (a 45-caliber toothache) जैसे डायलॉग, फिल्म नोयर के शौकीनों के लिए खास हैं ।
कॉन्स्टेंस डाउलिंग (एवलिन ग्रीन के रोल में): कॉन्स्टेंस डाउलिंग को अक्सर उस जमाने की मशहूर अभिनेत्री वेरोनिका लेक (Veronica Lake) से जोड़कर देखा जाता था । “ब्लाइंड स्पॉट” में उनका किरदार एवलिन ग्रीन रहस्य से भरा है। वो कभी जेफरी की मददगार लगती हैं, तो कभी उन पर शक होता है कि कहीं वो फेम घातक (Femme Fatale) तो नहीं ? फिल्म के एक दृश्य में जब वह जेफरी के अंधेरे अपार्टमेंट में परछाइयों से बाहर निकलती हैं, तो वह दृश्य फिल्म नोयर सिनेमैटोग्राफी का एक बेहतरीन उदाहरण है । उनकी उपस्थिति फिल्म में एक अलग ही चमक भर देती है।
स्टीवन गेरे (लॉयड हैरिसन के रोल में): स्टीवन गेरे एक और मशहूर चरित्र अभिनेता थे, जिन्हें अक्सर पीटर लोरे (Peter Lorre) जैसी शख्सियतों से तुलना की जाती थी । उनके भारी यूरोपियन लहजे और रहस्यमयी शख्सियत ने उनके किरदार को एक अलग ही आयाम दिया। वह जेफरी के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं, लेकिन उनके इरादे हमेशा संदिग्ध बने रहते हैं ।
निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी: फिल्म नोयर का असली रंग
रॉबर्ट गॉर्डन का निर्देशन और जॉर्ज मीहान (George Meehan) की सिनेमैटोग्राफी ने मिलकर फिल्म को एकदम सही नोयर लुक (Noir Aesthetic) दिया है । फिल्म में ज्यादातर दृश्य रात में घटित होते हैं। गंदी, नम सड़कें, तंग कमरे, और गहरी परछाइयाँ—ये सब फिल्म नोयर की पहचान हैं और इस फिल्म में ये भरपूर मात्रा में मिलते हैं ।
कैमरा अक्सर किरदारों को छोटी-छोटी जगहों में कैद करता है, जिससे घुटन और बेचैनी का एहसास होता है। पसीने से तर माथे और डर से भरी आँखों के क्लोज-अप शॉट्स फिल्म के तनाव को और बढ़ा देते हैं । जेफरी के वॉयस-ओवर (Voice-Over) फिल्म को एक अलग पहचान देते हैं, जैसे रेडियो नाटक (Radio Drama) सुन रहे हों । यह तकनीक दर्शकों को सीधे जेफरी के भ्रमित और डरे हुए दिमाग में ले जाती है।
फिल्म की खासियत: ‘लॉक्ड-रूम मिस्ट्री’ का अनोखा ट्विस्ट
“ब्लाइंड स्पॉट” की असली ताकत इसकी कहानी में छिपा वह अनोखा ट्विस्ट (Unique Twist) है, जो इसे साधारण जासूसी कहानियों से अलग करता है। लॉक्ड-रूम मिस्ट्री सिनेमा और साहित्य में कोई नई बात नहीं थी, लेकिन इस फिल्म ने इसमें एक नया आयाम जोड़ा।
यहां हत्यारा सिर्फ उसी तरीके से हत्या नहीं करता जो जेफरी ने बताया था, बल्कि उसने जेफरी के नशे में बताए गए तरीके का इस्तेमाल करके उसे ही फंसा दिया। अब जेफरी के सामने दोहरी चुनौती है: पहली, वह तरीका याद करना, और दूसरी, उन लोगों तक पहुंचना जिन्हें उसने वह तरीका बताया था। लेकिन जैसे ही वह किसी के करीब पहुंचता है, वह शख्स मर जाता है—जैसे बारटेंडर माइक । यह सिलसिला फिल्म में एक अलग ही सस्पेंस पैदा करता है।
समीक्षा: क्यों देखनी चाहिए यह फिल्म?
अगर आप पुरानी हॉलीवुड फिल्मों (Vintage Hollywood Films) और खासकर फिल्म नोयर के शौकीन हैं, तो “ब्लाइंड स्पॉट” आपके लिए एक छुपा हुआ खजाना (Hidden Gem) है।
क्या अच्छा है:
दमदार कहानी: फिल्म की कहानी बेहद सधी हुई है। हर दृश्य आगे बढ़ता है और एक नया सुराग देता है। यह अपने दर्शकों का ध्यान 73 मिनट तक बांधे रखती है ।
शानदार संवाद: फिल्म के डायलॉग बेहद तीखे और यादगार हैं। “भूत लेखक ड्रग्स की तरह है” (a ghost-writer is like drugs) या “साहित्यिक चोरी का मतलब दूसरे की कलम पर अपना नाम लिखना है” (plagiarism is inscribing my name on another man’s pen) जैसे संवाद फिल्म में चार चांद लगाते हैं ।
माहौल (Atmosphere): फिल्म का 1940 के दशक का नोयर माहौल एकदम प्रामाणिक (Authentic) है। अंधेरी गलियां, बार के दृश्य और सस्ते अपार्टमेंट—सब कुछ असली लगता है ।
अभिनय: चेस्टर मॉरिस और कॉन्स्टेंस डाउलिंग ने अपने-अपने किरदारों को पूरा न्याय दिया है। भले ही फिल्म बजट में सीमित हो, लेकिन अभिनय में कोई कमी नहीं है ।
क्या कमजोर है:
धीमी गति: कुछ दर्शकों को फिल्म की गति थोड़ी धीमी लग सकती है। यह डायलॉग पर ज्यादा निर्भर करती है, एक्शन पर कम ।
चेस्टर मॉरिस का शराबी अभिनय: फिल्म के शुरुआती 15-20 मिनट में मॉरिस का बहुत ज्यादा शराबी होना कुछ लोगों को खल सकता है। वे इसे ओवरएक्टिंग मान सकते हैं, हालांकि यह किरदार की मजबूरी है ।
बी-मूवी प्रोडक्शन: यह साफ है कि फिल्म सीमित बजट में बनी है। सेट कभी-कभी स्टूडियो जैसे लगते हैं, और भव्यता की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए ।
निष्कर्ष: एक भुलाया न जाने वाला ‘ब्लाइंड स्पॉट’
“ब्लाइंड स्पॉट” सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण फिल्म है, खासकर उन लोगों के लिए जो फिल्म नोयर के विकास को समझना चाहते हैं। यह उस दौर की उन तमाम छोटी फिल्मों (B-Noir) की तरह है, जो बड़े बजट के अभाव में भी अपनी कहानी के दम पर क्लासिक (Cult Classic) बन गईं।
फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी लग सकती है, और इसकी प्रोडक्शन वैल्यू आज के मानकों से काफी पुरानी है, लेकिन इसके बावजूद यह फिल्म आज भी उतनी ही रोमांचक है जितनी अपने रिलीज के समय रही होगी। टीएमसी (TCM) के एडी मुलर (Eddie Muller) ने इसे अपने “नोयर एली” (Noir Alley) में शामिल किया, जो बताता है कि फिल्म नोयर के जानकारों के बीच इसकी अहमियत आज भी बनी हुई है ।
अगर आपको अच्छी डिटेक्टिव स्टोरी पसंद है, आप कॉर्नेल वूलरिच (Cornell Woolrich) जैसे लेखकों की कहानियों के शौकीन हैं, या फिर आप बस 1940 के दशक के हॉलीवुड के माहौल में डूबना चाहते हैं, तो “ब्लाइंड स्पॉट” आपके लिए एक शानदार अनुभव हो सकता है। यह एक ऐसी फिल्म है जो आपसे यह सवाल जरूर करेगी—आखिर उस बंद कमरे से हत्यारा गया कैसे? और जब जवाब मिलेगा, तो आप इस 1947 की अनदेखी फिल्म (Overlooked 1947 Film) के कायल हो जाएंगे।


