साइलेंट फ़िल्मों में आवाज़ का जादू: 1920 के दशक के वे ‘बेंशी’ (Benshi) जो परदे के पीछे से कहानी सुनाते थे
आज का दौर है डॉल्बी एटमॉस साउंड का। अभिनेता की हर साँस, फुसफुसाहट, तलवार की हर झनकार हमारे कानों तक…
Movie Reviews – Connect to Life
आज का दौर है डॉल्बी एटमॉस साउंड का। अभिनेता की हर साँस, फुसफुसाहट, तलवार की हर झनकार हमारे कानों तक…
बॉम्बे के एक श्मशान घाट में असामान्य सन्नाटा पसरा हुआ था। जनवरी की ठंडी हवा में सैकड़ों लोग खड़े थे,…
साल 1911 था। मुंबई के एक सिनेमाघर में अँधेरा छाया हुआ था। पर्दे पर एक विदेशी फिल्म चल रही थी…
आज के दौर में जब स्पेशल इफेक्ट्स की बमबारी और स्टाइलिश एंटी-हीरोज़ का बोलबाला है, मेरा दिल अक्सर उस जमाने…
वह पहली बार जब अपु ने मेरे दिल को छुआ 2015 कि बात ही, मैं एक छोटे शहर कि लाइब्रेरी…
वह समय जब फिल्में बोलती नहीं, दिलों में उतर जाती थीं कई साल से मैं क्लासिक सिनेमा पर लिख रहा…
कई वर्षों से अधिक समय से, मेरा जुनून— एक ही मिशन के साथ: उन फिल्मों को उजागर और प्रासंगिक बनाना…
युमेको आइज़ोमे 1930 के दशक की उन जापानी अभिनेत्रियों में थीं जिनका चेहरा मूक फ़िल्मों के आख़िरी वर्षों और बोलती…
कोरियन सिनेमा की बात करते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग में “पैरासाइट”, “ओल्डबॉय” या हाल की नेटफ्लिक्स सीरीज़ का नाम…
साइलेंट फिल्मों का युग (1890s-1920s) विजुअल इफेक्ट्स का स्वर्णिम काल था, लेकिन एक ऐसा काल जिसे इतिहास ने अक्सर ‘आदिम’…