क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसी धुंध (fog) जो लंदन की सड़कों को सफेद चादर से ढक देती थी… वही धुंध ब्रिटिश सिनेमा […]
Category: 1920
टोक्यो मार्च (1929): मिज़ोगुची की खोई हुई कृति जिसमें बसा है 1920 के दशक का जापान
क्या कोई फिल्म सिर्फ 28 मिनट के टुकड़ों में भी पूरी दुनिया समेट सकती है? क्या एक अधूरी फिल्म भी दर्शकों के दिलों पर वैसा […]
द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर (1925): फ्रांसीसी सिनेमा का वह अनमोल खजाना जो बच्चों के दिलों में बस गया
कल्पना कीजिए, 1820 के दशक की फ्रांसीसी ग्रामीण सड़कें, घने जंगल, और उन रास्तों पर घूमता एक ऐसा बदमाश जिसका दिल सोने से भी ज्यादा […]
द किड ब्रदर (1927): हेरोल्ड लॉयड की वह अमर कृति जिसने मूक सिनेमा को नई ऊंचाई दी
कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा में आवाज़ नहीं थी, सिर्फ हाव-भाव थे। एक ऐसा दौर जब हंसी के लिए संवादों की नहीं, बल्कि […]
गुमनाम सितारे: मास्टर विट्ठल — भारत की पहली सवाक फिल्म ‘आलम आरा’ के नायक
भारतीय सिनेमा का इतिहास जब भी लिखा जाता है, उसमें एक नाम अक्सर धुंधला सा रह जाता है। एक ऐसा चेहरा जिसने पहली बार भारत […]
हॉलीवुड का स्वर्ण युग: 1920 के दशक के प्रसिद्ध कलाकार और उनकी आइकॉनिक भूमिकाएँ
1920 का दशक हॉलीवुड के लिए वह समय था जब सिनेमा ने वाकई “ड्रीम फैक्ट्री” का रूप लेना शुरू किया और सितारों ने देवताओं जैसी […]
मूक सिनेमा के अनकहे संघर्ष: एक–एक परत खोलती रिसर्च सीरीज़
आप आज के इस दौर की कल्पना कीजिए, जहाँ सिनेमा हॉल में बैठकर आप हीरो की आवाज़ का एक-एक स्वर सुन सकते हैं, संगीत के […]
हॉलीवुड मूक फिल्मों से भारतीय सिनेमा ने क्या सीखा?
नमस्कार, कल्पना कीजिए कि आप सिनेमा हॉल में बैठे हैं। परदे पर कोई डायलॉग नहीं बोल रहा, कोई गाना नहीं गूँज रहा, सिर्फ़ एक पियानो […]
हाव-भाव की भाषा: हीरो-हीरोइन की प्रैक्टिस के अनसुने किस्से
क्या आपने कभी गौर किया है कि दिलीप कुमार की आँखों में एक अदद नजाकत क्यों दिखती है? या माधुरी दीक्षित की मुस्कुराहट में एक […]
ब्रिटेन का साइलेंट सिनेमा: वो दौर जब तस्वीरें बोलती थीं
1920 का दशक, लंदन के एक छोटे से थियेटर में अँधेरा छा गया। स्क्रीन पर सफेद-काले रंगों में एक नाव समुद्र की लहरों से टकरा […]