पसीने और खून से लिखी गई मूक सिनेमा की कहानी: शुरुआती दौर की खतरनाक हकीकत
जब हम आज की सिनेमाई जादूगरी—हरे पर्दे के सामने एक्शन करते सुपरहीरो या वायर रिग्स पर झूलते कलाकार—को देखते हैं,…
Movie Reviews – Connect to Life
जब हम आज की सिनेमाई जादूगरी—हरे पर्दे के सामने एक्शन करते सुपरहीरो या वायर रिग्स पर झूलते कलाकार—को देखते हैं,…
वो आदमी जिसने कभी लाखों सैनिकों को हुक्म दिया था — आज एक फ़िल्मी सेट पर भीड़ का हिस्सा था।…
कल रात की बात है। मेरे एक दोस्त ने, जो खुद को ‘जेन-ज़ी सिनेफाइल’ कहता है, मुझसे पूछा, “यार तुम…
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसी धुंध (fog) जो लंदन की सड़कों को सफेद चादर से ढक देती…
क्या कोई फिल्म सिर्फ 28 मिनट के टुकड़ों में भी पूरी दुनिया समेट सकती है? क्या एक अधूरी फिल्म भी…
कल्पना कीजिए, 1820 के दशक की फ्रांसीसी ग्रामीण सड़कें, घने जंगल, और उन रास्तों पर घूमता एक ऐसा बदमाश जिसका…
कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा में आवाज़ नहीं थी, सिर्फ हाव-भाव थे। एक ऐसा दौर जब हंसी के…
भारतीय सिनेमा का इतिहास जब भी लिखा जाता है, उसमें एक नाम अक्सर धुंधला सा रह जाता है। एक ऐसा…
1920 का दशक हॉलीवुड के लिए वह समय था जब सिनेमा ने वाकई “ड्रीम फैक्ट्री” का रूप लेना शुरू किया…
आप आज के इस दौर की कल्पना कीजिए, जहाँ सिनेमा हॉल में बैठकर आप हीरो की आवाज़ का एक-एक स्वर…