1930s के जमाने में स्पॉट बॉयज़ का जीवन: 5 मुख्य काम जो आज भी नहीं बदले

सोचिए ज़रा… 1930 का दशक। बॉम्बे टॉकीज़ का ज़माना। सिनेमा घरों में ब्लैक एंड वाइट फिल्मों का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। परदे पर […]

शी हुई: चीनी सिनेमा की वो दुखद सितारा जो आज भी चमकती है

नमस्कार दोस्तों! कल रात मैं एक पुरानी, ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म देख रहा था – ‘द गॉडडेस’। स्क्रीन पर एक युवती अपने बच्चे के लिए […]

मूक सिनेमा के अनकहे संघर्ष: एक–एक परत खोलती रिसर्च सीरीज़

आप आज के इस दौर की कल्पना कीजिए, जहाँ सिनेमा हॉल में बैठकर आप हीरो की आवाज़ का एक-एक स्वर सुन सकते हैं, संगीत के […]

हॉलीवुड मूक फिल्मों से भारतीय सिनेमा ने क्या सीखा?

नमस्कार, कल्पना कीजिए कि आप सिनेमा हॉल में बैठे हैं। परदे पर कोई डायलॉग नहीं बोल रहा, कोई गाना नहीं गूँज रहा, सिर्फ़ एक पियानो […]

पुराने जमाने की फिल्मों से सीखें जिंदगी के 5 अनमोल पाठ

क्या आपको कभी लगता है कि आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कुछ खो सा गया है? वो सादगी, वो इंसानियत, वो दिल से जुड़ाव? […]

जब तक फिल्म चुप थी, लोग दूर थे…जब बोली, सबके दिल से जुड़ गई!

सिनेमा हॉल का अँधेरा। चलचित्रों की रुपहली रोशनी। पर्दे पर चेहरे भाव बदल रहे हैं – हँस रहे हैं, रो रहे हैं, गुस्सा कर रहे […]

ग्लैमर से परे: जब हॉलीवुड के सुनहरे सितारों की रोशनी में दिखी अकेलेपन की परछाइयाँ

सोचिए एक पल। 1950 का दशक। एक विशाल सिनेमा हॉल। पर्दे पर क्लार्क गेबल अपनी विद्युत चुम्बकीय मुस्कान बिखेर रहे हैं। ग्रेटा गार्बो की आँखों […]

साइलेंट फिल्मों का जादू: बिना आवाज़ के बोलता था मेकअप! जानिए कैसे बनते थे वो कालजयी किरदार

सोचिए, सिनेमा हॉल में अंधेरा होता है। सफेद पर्दे पर चलचित्र नाचने लगते हैं, लेकिन कोई आवाज़ नहीं होती। न डायलॉग, न बैकग्राउंड म्यूजिक का […]

Bride of Frankenstein (1935): सिर्फ एक मॉन्स्टर मूवी नहीं, एक मास्टरपीस है ये फिल्म!

कल्पना कीजिए: बिजली कड़कती है, एक पागल वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में कुछ बना रहा है, और फिर… वो पल आता है। एक सफेद पट्टियों में […]

कहाँ शूट होती थीं Silent Movies? जानिए दिलचस्प लोकेशन्स

हो सकता है आपने चार्ली चैपलिन की मूक फिल्में देखी हों, लेकिन क्या आप जानते हैं भारत की पहली मूक फिल्म “राजा हरिश्चंद्र” (1913) महाराष्ट्र […]