रस्सी, धुआं और आईने: साइलेंट फिल्मों के स्पेशल इफेक्ट्स के सीक्रेट जुगाड़
आज से करीब बीस-पच्चीस साल पहले की बात है। मुंबई के एक पुराने फिल्म आर्काइव में गहरी धूल दिख रही…
Movie Reviews – Connect to Life
आज से करीब बीस-पच्चीस साल पहले की बात है। मुंबई के एक पुराने फिल्म आर्काइव में गहरी धूल दिख रही…
साइलेंट सिनेमा की बात हो और चार्ली चैपलिन व बस्टर कीटन का नाम न आए, ऐसा लगभग नामुमकिन है। चैपलिन…
ओड़िया सिनेमा की कहानी 1936 में बनी पहली फिल्म ‘सीता विवाह’ से शुरू होती है और आज तक यह यात्रा…
सोचिए ज़रा… 1930 का दशक। बॉम्बे टॉकीज़ का ज़माना। सिनेमा घरों में ब्लैक एंड वाइट फिल्मों का जादू सिर चढ़कर…
नमस्कार दोस्तों! कल रात मैं एक पुरानी, ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म देख रहा था – ‘द गॉडडेस’। स्क्रीन पर एक…
आप आज के इस दौर की कल्पना कीजिए, जहाँ सिनेमा हॉल में बैठकर आप हीरो की आवाज़ का एक-एक स्वर…
नमस्कार, कल्पना कीजिए कि आप सिनेमा हॉल में बैठे हैं। परदे पर कोई डायलॉग नहीं बोल रहा, कोई गाना नहीं…
क्या आपको कभी लगता है कि आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कुछ खो सा गया है? वो सादगी, वो…
सिनेमा हॉल का अँधेरा। चलचित्रों की रुपहली रोशनी। पर्दे पर चेहरे भाव बदल रहे हैं – हँस रहे हैं, रो…
सोचिए एक पल। 1950 का दशक। एक विशाल सिनेमा हॉल। पर्दे पर क्लार्क गेबल अपनी विद्युत चुम्बकीय मुस्कान बिखेर रहे…