कल्पना कीजिए, एक धुंधली सी स्क्रीन पर छाया-छवियाँ नाच रही हैं। कोई डायलॉग नहीं, सिर्फ़ एक पियानो या हारमोनियम की धुन, और कभी-कभी दर्शकों की […]
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बिना बोले बोल गईं ये फिल्में: मूक सिनेमा के 5 नायाब रत्न
सोचिए, बिना एक शब्द बोले… बिना गानों के… बिना डायलॉग के… सिर्फ़ चेहरे के हाव-भाव, शरीर की भाषा, और आँखों की बात से पूरी कहानी […]
स्नो व्हाइट एंड द सेव्हन ड्वॉर्फ्स (1937): वो जादुई फिल्म जिसने दुनिया बदल दी
कल्पना कीजिए… साल 1937 है। सिनेमाघरों में लोग बैठे हैं। स्क्रीन पर रंग नहीं, सिर्फ़ काले-सफेद छायाचित्र। तभी शुरू होती है एक कहानी – एक […]
बिना आवाज़ के जादू: कैसे संगीत ने साइलेंट फिल्मों की आत्मा बचाई रखी?
सोचिए वो ज़माना… जब फिल्मों में न तो हीरो की आवाज़ गूँजती थी, न हीरोइन के डायलॉग सुनाई देते थे, न विलेन की खलनायकी भरी […]
क्या साइलेंट फिल्मों में औरतें थीं? सिनेमा की भूली-बिसरी ‘फर्स्ट लेडीज़’ की कहानी
ये सवाल अक्सर दिमाग में आता है: “क्या साइलेंट फिल्मों के दौर में भी महिला अभिनेत्रियां या फिल्म निर्माता थीं?” या फिर ये मान लिया […]
चार्ली चैपलिन की 2 फिल्में जिन्होंने समाज को दिया गहरा संदेश: हंसी के पीछे छिपा सच
क्या आपने कभी सोचा है कि एक चुप्पी, टूटी-फूटी टोपी पहने और बंदर जैसी चाल चलने वाला आदमी दुनिया का सबसे बड़ा कलाकार कैसे बन […]
साइलेंट सिनेमा और लोकेशन का अनोखा रिश्ता: पर्दे के पीछे की कहानी
1920 के दशक की एक सर्द शाम, मुंबई के चांदनी चौक में एक भीड़ जमा है। बीच सड़क पर एक विशाल सफेद कैनवास लटका हुआ […]
1930s में फिल्मों की शूटिंग कैसे होती थी?
सुबह के चार बजे। बंबई के दादर इलाके में एक मकान के बाहर बैलगाड़ी रुकी। ड्राइवर ने ढेर सारे लकड़ी के डिब्बे उतारे—कुछ में बल्ब […]
म्यूजिकल इम्प्रोवाइसेशन इन हॉलीवुड : अ जर्नी थ्रू द चेंज
संगीत हमेशा हॉलीवुड फिल्मों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यह उन फिल्मों में भावना, उत्साह और नाटक को जोड़ता है जिन्हें हम पसंद करते […]