1930s के जमाने में स्पॉट बॉयज़ का जीवन: 5 मुख्य काम जो आज भी नहीं बदले

सोचिए ज़रा… 1930 का दशक। बॉम्बे टॉकीज़ का ज़माना। सिनेमा घरों में ब्लैक एंड वाइट फिल्मों का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। परदे पर […]

House on Haunted Hill 1959: विंसेंट प्राइस का वो डरावना महल जहाँ मौत एक ‘इनविटेशन’ थी | क्लासिक हॉरर रिव्यु

हैलो दोस्तों! आज हम एक ऐसी फिल्म की बात करने वाले हैं, जिसने सदी के मध्य में बैठे दर्शकों की रूह कंपा दी थी। वो […]

पुराने लेंस, नई दृष्टि: 1950 के दशक की तमिल फिल्मों की दृश्य भाषा

आज के दौर में जब हम ‘RRR’ या ‘पोन्नियिन सेलवन’ के शानदार विजुअल्स देखते हैं, तो उनकी तकनीकी चमक-धमक हैरान कर देती है। CGI, VFX, […]

Aunt Tula 1964 फिल्म रिव्यू: चुप्पी, कर्तव्य और दबी इच्छाओं की गहरी कहानी

कहते हैं कि कुछ फिल्में सिर्फ़ मनोरंजन के लिए नहीं बनी होतीं, बल्कि वो समाज के सामने एक आईना रखने का काम करती हैं। स्पेनिश […]

धर्मेंद्र: द ही-मैन ऑफ बॉलीवुड जिसके जबरदस्त एक्शन के आगे उसकी कोमल आवाज़ भी फीकी पड़ गई

अगर आपसे पूछा जाए कि बॉलीवुड का “असली एक्शन हीरो” कौन है, तो बिना किसी हिचकिचाहट के एक नाम ज़ुबान पर आएगा – धर्मेंद्र। लेकिन […]

नवरंग (1959): रंगों का वह ख्वाब जो आज भी महकता है

कभी-कभी टीवी चैनल बदलते हुए या ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की गहराइयों में खोज करते हुए हमारी नज़र किसी ऐसी फिल्म पर पड़ जाती है जो […]

मूक सिनेमा के अनकहे संघर्ष: एक–एक परत खोलती रिसर्च सीरीज़

आप आज के इस दौर की कल्पना कीजिए, जहाँ सिनेमा हॉल में बैठकर आप हीरो की आवाज़ का एक-एक स्वर सुन सकते हैं, संगीत के […]

1960 का सुनहरा दौर: प्यार, कुर्बानी और इज़्ज़त की बॉलीवुड कहानियाँ

कल्पना कीजिए उस ज़माने की, जब सिनेमा हॉल में घुसते ही आपको महसूस होता था कि आप सिर्फ एक फिल्म नहीं देखने जा रहे, बल्कि […]

हॉलीवुड मूक फिल्मों से भारतीय सिनेमा ने क्या सीखा?

नमस्कार, कल्पना कीजिए कि आप सिनेमा हॉल में बैठे हैं। परदे पर कोई डायलॉग नहीं बोल रहा, कोई गाना नहीं गूँज रहा, सिर्फ़ एक पियानो […]

Kurosawa के कैमरे से निकली एक करुण पुकार – Stray Dog की कहानी

जापानी सिनेमा के इस दौर में, जहाँ एनीमे की चटकीली दुनिया और जीवंत पात्रों का बोलबाला है, वहीं एक वक्त वह भी था जब पर्दे […]