“Crows and Sparrows Review: कैसे इस फिल्म ने चीन के बदलते दौर को दिखाया?”
“Crows and Sparrows (乌鸦与麻雀)” 1949 की एक चीनी फ़िल्म है, जिसे निर्देशक झेंग जुनली (Zheng Junli) ने बनाया और यह…
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“Crows and Sparrows (乌鸦与麻雀)” 1949 की एक चीनी फ़िल्म है, जिसे निर्देशक झेंग जुनली (Zheng Junli) ने बनाया और यह…
दोस्ती की कहानियों पर दुनिया इसलिए फिदा है क्योंकि इंसान की सबसे गहरी जरूरत “किसी का अपना होना” है –…
ओड़िया सिनेमा की कहानी 1936 में बनी पहली फिल्म ‘सीता विवाह’ से शुरू होती है और आज तक यह यात्रा…
बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर की बात हो और 1958 का ज़िक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यह वह…
सोचिए ज़रा… 1930 का दशक। बॉम्बे टॉकीज़ का ज़माना। सिनेमा घरों में ब्लैक एंड वाइट फिल्मों का जादू सिर चढ़कर…
हैलो दोस्तों! आज हम एक ऐसी फिल्म की बात करने वाले हैं, जिसने सदी के मध्य में बैठे दर्शकों की…
आज के दौर में जब हम ‘RRR’ या ‘पोन्नियिन सेलवन’ के शानदार विजुअल्स देखते हैं, तो उनकी तकनीकी चमक-धमक हैरान…
कहते हैं कि कुछ फिल्में सिर्फ़ मनोरंजन के लिए नहीं बनी होतीं, बल्कि वो समाज के सामने एक आईना रखने…
अगर आपसे पूछा जाए कि बॉलीवुड का “असली एक्शन हीरो” कौन है, तो बिना किसी हिचकिचाहट के एक नाम ज़ुबान…
कभी-कभी टीवी चैनल बदलते हुए या ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की गहराइयों में खोज करते हुए हमारी नज़र किसी ऐसी फिल्म…
आप आज के इस दौर की कल्पना कीजिए, जहाँ सिनेमा हॉल में बैठकर आप हीरो की आवाज़ का एक-एक स्वर…
कल्पना कीजिए उस ज़माने की, जब सिनेमा हॉल में घुसते ही आपको महसूस होता था कि आप सिर्फ एक फिल्म…
नमस्कार, कल्पना कीजिए कि आप सिनेमा हॉल में बैठे हैं। परदे पर कोई डायलॉग नहीं बोल रहा, कोई गाना नहीं…
जापानी सिनेमा के इस दौर में, जहाँ एनीमे की चटकीली दुनिया और जीवंत पात्रों का बोलबाला है, वहीं एक वक्त…
क्या आपने कभी गौर किया है कि दिलीप कुमार की आँखों में एक अदद नजाकत क्यों दिखती है? या माधुरी…
सुबह की पहली किरण ने अभी पेड़ों की पत्तियों को छुआ भी नहीं था। जंगल की उस गहरी शांति में,…
यक़ीन मानिए, अगर आपने कभी भी किसी पुरानी, धूल भरी अलमारी में रखे फिल्मी पोस्टरों को पलटा हो, तो आपकी…
सोचिए एक ऐसी दुनिया जहाँ समय रुक गया हो। जहाँ हवा में चमकते सितारों की बजाय बस धूल भरी यादें…
कभी सोचा है? आखिरी सीन खत्म होता है, थिएटर की लाइट्स जलती हैं, और आप उठकर चलने लगते हैं… पर…
सोचिए… एक अँधेरा थिएटर। स्क्रीन पर लाल रंग के पर्दे फड़फड़ाते हैं। एक ख़ूबसूरत औरत, लोर्ना, मंच पर है। उसकी…