साल 1975, दक्षिण कोरिया पर सैन्य शासन की लोहे की मुट्ठी कसी हुई है। हवा में डर का सन्नाटा, आँखों में भविष्य की अनिश्चितता। ऐसे […]
Category: Films
रॉबिन हुड 1973: वो अनदेखा डिज़्नी जादू जिसने पीढ़ियों को चोरों का राजा बना दिया
याद है वो बचपन की दोपहर? पंखे की आवाज़, खिड़की से आती गर्म हवा, और टीवी पर चलती कोई ऐसी फिल्म जिसके रंग, संगीत और […]
आशीर्वाद (1968): एक पिता के वज्र की कहानी
कल्पना कीजिए एक घर जहाँ दीवारों पर पुराने चित्र लटके हैं, हवा में हल्की खुशबू है गुलाबजल की, और बैठक में बूझे हुए सिगार की […]
भारत के सर्वश्रेष्ठ 5 हास्य कलाकार: एक दृष्टि हास्य की उत्कृष्टता पर
हँसी का जादू कुछ ऐसा है कि यह दिल के ताले को खोल देती है, और भारतीय सिनेमा व टेलीविज़न ने इस जादू को बिखेरने […]
राजेश खन्ना की १० सबसे बेहतरीन फ़िल्में: एक सदाबहार सफर
1970 का दशक हो या आज का समय, राजेश खन्ना का नाम सुनते ही दिल में एक अजीब सी धड़कन पैदा हो जाती है। वो […]
साइलेंट सिनेमा और लोकेशन का अनोखा रिश्ता: पर्दे के पीछे की कहानी
1920 के दशक की एक सर्द शाम, मुंबई के चांदनी चौक में एक भीड़ जमा है। बीच सड़क पर एक विशाल सफेद कैनवास लटका हुआ […]
उड़िया सिनेमा का उदय: एक नई फिल्म क्रांति की शुरुआत
एक सुबह, भुवनेश्वर के एक सिनेमा हॉल के बाहर कतार लगी थी। टिकट खिड़की पर युवाओं का हुजूम “सिनेमा हॉल झुक जाएगा” के नारे लगा […]
1940 का दशक: बॉलीवुड सिनेमा की वह उथल-पुथल जिसने रचा इतिहास
साल 1942 की एक गर्म रात, बम्बई के मोहन स्टूडियो के सेट पर बल्बों की रोशनी में एक कैमरामैन पसीना पोंछते हुए बुदबुदाया, “फिल्म स्टॉक […]
मार्च ऑफ़ द फूल्स (1975): वो कोरियाई फिल्म जिसने युवाओं के दर्द को ‘बेवकूफ़ी’ का नाम दे दिया
साल 1975, दक्षिण कोरिया में सैन्य तानाशाही का दौर। युवाओं के सपनों पर लोहे के जूते चल रहे हैं, विरोध की आवाज़ें जेल की सलाखों […]
कलकत्ता 71 (1972): जब सिनेमा ने दिखाया समाज का आईना
1971 का साल, जब पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम की आग भड़क चुकी थी, और पश्चिम बंगाल की सड़कों पर नक्सलवादी आंदोलन का […]