फ्लोटिंग वीड्स (1959): जब जापान के महानतम निर्देशक ने रचा प्रेम, ईर्ष्या और त्याग का अमर काव्य

क्या कोई फिल्म एक साथ इतनी शांत और इतनी तूफानी हो सकती है? क्या एक बूढ़ा अभिनेता, एक ईर्ष्यालु प्रेमिका, और एक अनजान बेटे की […]

टोक्यो मार्च (1929): मिज़ोगुची की खोई हुई कृति जिसमें बसा है 1920 के दशक का जापान

क्या कोई फिल्म सिर्फ 28 मिनट के टुकड़ों में भी पूरी दुनिया समेट सकती है? क्या एक अधूरी फिल्म भी दर्शकों के दिलों पर वैसा […]

द एडवेंचर्स ऑफ रॉबर्ट मैकेयर (1925): फ्रांसीसी सिनेमा का वह अनमोल खजाना जो बच्चों के दिलों में बस गया

कल्पना कीजिए, 1820 के दशक की फ्रांसीसी ग्रामीण सड़कें, घने जंगल, और उन रास्तों पर घूमता एक ऐसा बदमाश जिसका दिल सोने से भी ज्यादा […]

1950 के दशक का हॉलीवुड: ‘सॉफ्ट फोकस’ लाइटिंग तकनीक जिसने सिनेमा को बदल दिया

कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा के पर्दे पर उतरती हर तस्वीर एक सपने जैसी लगती थी। चेहरे पर पड़ती रोशनी इतनी मुलायम होती […]

ब्लाइंड स्पॉट (1947): शराब के नशे में खोई याददाश्त और एक अनोखी हत्या की कहानी

क्या हो अगर आप नशे में धुत होकर एकदम सही हत्या की साजिश रच दें, और अगली सुबह उठें तो पाएं कि वह हत्या असल […]

विटोरियो डी सिका की ‘बाइसिकल थीव्स’: इतालवी नवयथार्थवाद (Neorealism) की एक उत्कृष्ट कृति

फिल्में अक्सर हमें एक अलग दुनिया में ले जाती हैं – रोमांच, फंतासी, या शानदार जीवन की दुनिया में। लेकिन कभी-कभी कोई फिल्म हमें हमारे […]

Aquanauts 1980: सोवियत साइंस-फिक्शन फिल्म रिव्यू

कई वर्षों से अधिक समय से, मेरा जुनून— एक ही मिशन के साथ: उन फिल्मों को उजागर और प्रासंगिक बनाना जिन्हें समय भूल गया है। […]

“वूमन ऑफ फायर 1971”: एक ऐसी ज्वाला जिसने कोरियाई सिनेमा की दिशा बदल दी

कोरियन सिनेमा की बात करते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग में “पैरासाइट”, “ओल्डबॉय” या हाल की नेटफ्लिक्स सीरीज़ का नाम आता है, लेकिन 1970 के […]

Yang Naiwu (1930) Chinese Film Review: न्याय, साज़िश और समाज—एक ऐतिहासिक केस की सिनेमा-यात्रा

ज़्यादातर फिल्म रिव्यू इस सवाल से शुरू होते हैं कि “फिल्म कैसी लगी?”—लेकिन Yang Naiwu and Xiao Baicai (1930) के केस में पहला सवाल ही बदल जाता […]

Tokyo Story 1953 – खामोश फ्रेम्स में छिपी ज़िंदगी की पूरी कहानी

क्लासिक वर्ल्ड सिनेमा पर कई सालों से लिखते हुए हमेशा यह महसूस हुआ है कि कुछ फिल्में “स्टोरी” से ज़्यादा “अनुभव” होती हैं। जापानी निर्देशक यासुजिरो […]