बिना बोले बोल गईं ये फिल्में: मूक सिनेमा के 5 नायाब रत्न
सोचिए, बिना एक शब्द बोले… बिना गानों के… बिना डायलॉग के… सिर्फ़ चेहरे के हाव-भाव, शरीर की भाषा, और आँखों…
Movie Reviews – Connect to Life
सोचिए, बिना एक शब्द बोले… बिना गानों के… बिना डायलॉग के… सिर्फ़ चेहरे के हाव-भाव, शरीर की भाषा, और आँखों…
क्या आपने कभी कोई पुरानी हिंदी फिल्म देखते हुए सोचा है, “अरे! यह तो आज भी वैसा ही है!”? फिर…
कल्पना कीजिए… साल 1937 है। सिनेमाघरों में लोग बैठे हैं। स्क्रीन पर रंग नहीं, सिर्फ़ काले-सफेद छायाचित्र। तभी शुरू होती…
सोचिए वो ज़माना… जब फिल्मों में न तो हीरो की आवाज़ गूँजती थी, न हीरोइन के डायलॉग सुनाई देते थे,…
क्या आपको वो पुरानी कन्नड़ फिल्में याद हैं? जहां कहानी की गहराई होती थी, संगीत दिल को छू जाता था,…
ये सवाल अक्सर दिमाग में आता है: “क्या साइलेंट फिल्मों के दौर में भी महिला अभिनेत्रियां या फिल्म निर्माता थीं?”…
क्या आपने कभी सोचा है कि एक चुप्पी, टूटी-फूटी टोपी पहने और बंदर जैसी चाल चलने वाला आदमी दुनिया का…
साल 1975, दक्षिण कोरिया पर सैन्य शासन की लोहे की मुट्ठी कसी हुई है। हवा में डर का सन्नाटा, आँखों…
याद है वो बचपन की दोपहर? पंखे की आवाज़, खिड़की से आती गर्म हवा, और टीवी पर चलती कोई ऐसी…
किसी अभिनेता की महानता का पैमाना क्या है? क्या वो हिट फ़िल्में हैं, पुरस्कारों का ढेर, या फिर दर्शकों के…
कल्पना कीजिए एक घर जहाँ दीवारों पर पुराने चित्र लटके हैं, हवा में हल्की खुशबू है गुलाबजल की, और बैठक…
1970 का दशक हो या आज का समय, राजेश खन्ना का नाम सुनते ही दिल में एक अजीब सी धड़कन…
एक सुबह, भुवनेश्वर के एक सिनेमा हॉल के बाहर कतार लगी थी। टिकट खिड़की पर युवाओं का हुजूम “सिनेमा हॉल…
1980 का दशक मलयालम सिनेमा के इतिहास में एक स्वर्णिम युग के रूप में याद किया जाता है। यह वह…
सुबह के चार बजे। बंबई के दादर इलाके में एक मकान के बाहर बैलगाड़ी रुकी। ड्राइवर ने ढेर सारे लकड़ी…
साल 1942 की एक गर्म रात, बम्बई के मोहन स्टूडियो के सेट पर बल्बों की रोशनी में एक कैमरामैन पसीना…
साल 1975, दक्षिण कोरिया में सैन्य तानाशाही का दौर। युवाओं के सपनों पर लोहे के जूते चल रहे हैं, विरोध…
अगर आपसे कोई पूछे कि 1950 के दशक की वह बॉलीवुड फिल्म कौन सी है जिसमें मधुबाला की मासूमियत, गुरु…
1971 का साल, जब पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम की आग भड़क चुकी थी, और पश्चिम बंगाल की…
1981 सिनेमाघरों में एक फिल्म आई, जिसका नाम था—”चारियट्स ऑफ़ फायर”। इस फिल्म की शुरुआत हुई समंदर किनारे धीमी गति…