97 साल पुरानी इस British फ़िल्म ने Hitchcock को भी पीछे छोड़ दिया था — जानिए कैसे

1920 के दशक का London Underground

एक नाम याद कीजिए — Alfred Hitchcock. Suspense का बादशाह। Thriller का पर्याय। जब भी British Cinema की बात होती है, Hitchcock का ज़िक्र सबसे पहले आता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1928 में एक और नौजवान British Director था, जिसने उसी दौर में एक ऐसी फ़िल्म बनाई थी जिसे देखकर खुद Film Critics ने कहा था — “यह Hitchcock से भी ज़्यादा साहसी काम था।”

वो Director था — Anthony Asquith.

और वो फ़िल्म थी — Underground (1928).

आज से 97 साल पहले बनी यह Black & White, Silent Drama Film आज भी उतनी ही दमदार है। उतनी ही असली। उतनी ही ज़िंदगी से भरी हुई। बल्कि जब आप इसे देखते हैं, तो पहला ख़याल यह नहीं आता कि “यह पुरानी फ़िल्म है।” पहला ख़याल आता है — “यह तो आज की कहानी लग रही है।”

तो चलिए, आज इस भुलाई हुई Masterpiece की परतें खोलते हैं।

1920s के Film Set

वो ज़माना, वो London, वो माहौल

1928 का London सोचिए। Metro यानी Tube system चल रही थी। Double-decker Buses थीं। Department Stores थे। Radio और Telephone आ चुके थे। Working class के लोग — दुकानदार, कारखाने में काम करने वाले, Metro के Guard — यही लोग थे जो London की असली रीढ़ थे।

Anthony Asquith इन्हीं लोगों की कहानी कहना चाहते थे।

फ़िल्म की शुरुआत में ही एक Title Card आता है जो कहता है — “यह उन साधारण लोगों की कहानी है जिनके नाम बस Nell, Bill, Kate और Bert हैं।”

सिर्फ़ यही चार लाइनें पूरी फ़िल्म का मिज़ाज बयान कर देती हैं। यह किसी राजा की कहानी नहीं। किसी अमीर घर की कहानी नहीं। यह उन लोगों की कहानी है जो हर सुबह Tube में चढ़ते हैं, काम पर जाते हैं, और शाम को थके-हारे घर लौटते हैं।

चार किरदार, एक उलझी हुई दुनिया

कहानी शुरू होती है London Underground की भीड़भाड़ वाली Train से।

Bill (Brian Aherne) एक Metro Guard है। सीधा-सादा, शरीफ़ इंसान। एक दिन Tube में उसकी मुलाक़ात Nell (Elissa Landi) से होती है जो एक दुकान में काम करती है। Nell के दस्ताने खो जाते हैं, Bill उन्हें वापस लौटाता है — और बस, यहीं से एक प्यारी सी प्रेम कहानी शुरू हो जाती है।

लेकिन कहानी इतनी सरल होती तो यह फ़िल्म याद नहीं रहती।

असली पेंच है Bert (Cyril McLaglen) में। Bert एक Power Station में काम करने वाला मज़दूर है। दिखने में दबंग, मिज़ाज से बदमाश, और Nell पर उसकी नज़र है। लेकिन Nell को Bert में कोई दिलचस्पी नहीं। वो Bill को पसंद करती है।

और फिर है Kate (Norah Baring)। एक अकेली, मानसिक रूप से टूटी हुई Seamstress। Kate Bert से प्यार करती है — एकतरफा, बेबस, दर्दनाक प्यार। लेकिन Bert उसे सिर्फ़ इस्तेमाल करता है।

यही चार लोग — यही दो प्रेम-त्रिकोण — मिलकर एक ऐसा Drama बनाते हैं जो पहले Comedy जैसा लगता है, फिर Romance बनता है, और अंत में एक Dark Thriller में तब्दील हो जाता है।

Anthony Asquith — एक 26 साल का जीनियस

यहाँ एक बात जाननी ज़रूरी है।

जब Anthony Asquith ने यह फ़िल्म बनाई थी, उनकी उम्र थी — सिर्फ़ 26 साल।

और यह कोई मामूली 26 साल का लड़का नहीं था। वो Britain के तत्कालीन Prime Minister H.H. Asquith के बेटे थे। Oxford में पढ़े थे। Hollywood में Douglas Fairbanks और Mary Pickford के Studio में रहकर Filmmaking सीखी थी। Germany के UFA Studios की फ़िल्में देखी थीं — Fritz Lang की, F.W. Murnau की। Soviet Russian Cinema के Techniques को समझा था।

Underground 1928 फ़िल्म का वो Climax जिसने 1920s के British Cinema में एक नया इतिहास लिख दिया

और यह सब कुछ उन्होंने एक फ़िल्म में उड़ेल दिया।

वो अपने Set पर हमेशा Blue Boiler Suit पहनकर आते थे — एक Socialist की तरह, अपने Crew के साथ कंधे से कंधा मिलाकर। Class की दीवारें उन्होंने पहले अपनी ज़िंदगी में तोड़ीं, फिर अपनी फ़िल्मों में।

जो Camera ने किया, वो किसी ने नहीं किया था

Underground (1928) को सिर्फ़ कहानी की वजह से नहीं जाना जाता। इसे याद रखा जाता है उसके Cinematic Technique की वजह से।

Asquith ने अपना Camera वहाँ-वहाँ ले गए जहाँ 1928 में कोई सोच भी नहीं सकता था।

Tube की Escalator पर Camera चढ़ाया। चलती Train की छत पर Shot लिया। Pub की लड़ाई में जब कोई Punch मारता है, तो Camera को ही Punch खाते हुए दिखाया — यानी POV Shot, जो आज के Action Films में आम है, लेकिन 1928 में यह Revolutionary था।

Silent Film Historian Bryony Dixon ने लिखा है कि इस Pub Fight में जो Punch-to-camera moment है, वो Alfred Hitchcock की उसी साल की Boxing Film के उस Scene से कहीं बेहतर Execute हुआ था। यानी Technical रूप से, Asquith ने Hitchcock को पीछे छोड़ा।

German Expressionism का असर साफ़ दिखता है — Kate के कमरे की अंधेरी, तिरछी रोशनी, सीढ़ियों की भारी परछाइयाँ, और वो लंबा एकल Shot जब Kate धीरे-धीरे पागल होने लगती है। यह Scene Fritz Lang की Mabuse Series की याद दिलाता है — लेकिन British आत्मा के साथ।

Soviet Montage का जादू भी है। Film के Climax में Lots Road Power Station की छत पर जो Chase Sequence है, उसमें लगभग दो मिनट में 40 Shots हैं। पकड़ने वाला और भागने वाला — छत पर, Crane पर, नदी में — और फिर वापस Underground Tunnel में। यह Sequence आज भी किसी Modern Thriller को मात देता है।

Kate का वो Scene — जो रुला देता है

फ़िल्म में एक Scene है जो शायद Underground की सबसे बड़ी ताक़त है।

Kate — जो पहले से अकेली और टूटी हुई है — जब Bert उसे पूरी तरह अकेला छोड़ देता है, तो उसका दिमाग़ टूट जाता है। Norah Baring ने इस Scene को जिस तरह अभिनय से जिया है, वो Silent Film Acting की सबसे ऊँची मिसालों में से एक है।

कोई आवाज़ नहीं। कोई Dialog नहीं। बस एक चेहरा। और उस चेहरे पर दर्द की इतनी परतें कि देखने वाले का दिल भारी हो जाए।

Asquith ने इस Scene को बड़े ही धैर्य से Film किया है। Camera हिलता नहीं। कट नहीं होता। बस Kate है, उसका टूटना है, और हम हैं — बेबस, देखते हुए।

यह वो चीज़ है जो Cinema को Literature से ऊँचा बना देती है।

London Underground Station

London का दर्पण — इंसानों की भीड़ में अकेलापन

एक और बात जो Underground को बाकी Films से अलग करती है, वो है इसका Social Realism.

1920s का London जिस तरह इस Film में दिखता है — Tube की भीड़, Park में पिकनिक, Public Library, Pub की शाम, बेड-Sitting Room की तंगी — यह सब देखकर लगता है जैसे किसी ने 1928 के London की असली ज़िंदगी को Film पर उतार दिया है।

एक बेहद मार्मिक Scene है — Bill और Nell Park में बैठे हैं, प्यारी सी बात कर रहे हैं, और एक भूखा बच्चा आकर उनके खाने में से कुछ उड़ा लेता है। कोई नाटक नहीं। कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं। बस एक छोटा सा क्षण — जो 1920s के London की असमानता को बिना कुछ कहे कह देता है।

Asquith खुद एक Socialist थे। और उनकी यह सोच हर Frame में दिखती है।

BFI ने क्यों Restore किया इसे?

दशकों तक यह फ़िल्म लगभग खोई हुई थी। 80% British Silent Films की तरह इसके Prints भी बर्बाद हो गए थे। पुराने ज़माने में Negatives को पिघला दिया जाता था — उनमें से Silver निकालने के लिए।

2009 में British Film Institute (BFI) को Brussels के Cinémathèque Royale में एक अधूरा Print मिला। साथ में दो Reels Camera Negative भी बचे थे। Digital Technology की मदद से एक बेहतरीन Restoration हुई।

2013 में यह BFI DVD और Blu-ray पर आई। Neil Brand ने नया Orchestral Score compose किया जिसे BBC Symphony Orchestra ने perform किया। और तब जाकर दुनिया ने दोबारा इस भुलाई हुई Masterpiece को देखा।

2017 में Philippines के International Silent Film Festival में इसे Screen किया गया। वहाँ Live Music के साथ इसे देखकर Audience हैरान रह गई।

Hitchcock vs Asquith — असली मुक़ाबला क्या था?

यह सवाल ज़रूर उठता है — दोनों एक ही दौर के थे। दोनों British थे। दोनों German और Russian Cinema से Inspired थे। तो फिर Hitchcock इतना मशहूर हुआ और Asquith क्यों भुला दिया गया?

इसका जवाब सीधा है।

Hitchcock ने अपनी Style विकसित की और उसे दशकों तक Hollywood में लगातार आगे बढ़ाया। उनके पास एक Personal Brand था — Suspense, Voyeurism, Blonde Heroines, MacGuffin

Asquith ने बाद में अपनी दिशा बदल ली। उन्होंने Stage Adaptations की तरफ़ रुख किया — Pygmalion, The Importance of Being Earnest, The Winslow Boy। उनकी Silent Film वाली बेबाकी कहीं पीछे छूट गई।

लेकिन 1928 में? उस एक साल में? Asquith किसी से कम नहीं था।

BFI की Silent Film Curator Bryony Dixon ने साफ़ शब्दों में कहा है — “Asquith उन बहुत कम British Directors में से एक थे जो Hitchcock की बराबरी कर सकते थे — और कुछ मामलों में उनसे आगे भी निकले।”

1920s की London Tube Carriage

आज देखें तो क्या लगेगा?

यह सवाल ज़रूरी है।

आज 2025 में जब हम यह Film देखते हैं, तो सबसे पहला ख़याल आता है — “Metro में यह सब आज भी होता है।” लोग एक-दूसरे को देखते हैं। प्यार हो जाता है। जलन होती है। धोखा होता है।

Human Nature नहीं बदली।

और Asquith ने यही तो दिखाया था — कि Technology बदलती है, शहर बदलते हैं, ज़माना बदलता है। लेकिन इंसान की भावनाएँ? वो वहीं खड़ी रहती हैं।

प्यार वही। जलन वही। अकेलेपन का दर्द वही।

अंतिम बात

Underground (1928) कोई सिर्फ़ “पुरानी फ़िल्म” नहीं है जिसे Film History की किताबों में पढ़ा जाए और भुला दिया जाए।

यह एक ऐसा अनुभव है जो आपको 1928 के London की Tube में बैठा देता है। भीड़ में। शोर में। और उस शोर के बीच — चार इंसानों के दिलों की धड़कन सुनाता है।

Anthony Asquith के बारे में कम लोग जानते हैं। यह भी एक तरह का Injustice है।

लेकिन जब भी आप Silent Films की बात करें, जब भी British Cinema के Golden Era की बात हो — इस नाम को याद रखिएगा। और अगर कभी मौका मिले, तो यह Film ज़रूर देखिएगा।

सिर्फ़ 84 मिनट की है। आवाज़ नहीं है। लेकिन जो कह देती है — वो बहुत कुछ है।


Film: Underground (1928) Director: Anthony Asquith Cast: Brian Aherne, Elissa Landi, Cyril McLaglen, Norah Baring Duration: 84 Minutes | Black & White | Silent Drama Available: BFI Blu-ray / DVD | Restored Version

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