1950 के दशक का हॉलीवुड: ‘सॉफ्ट फोकस’ लाइटिंग तकनीक जिसने सिनेमा को बदल दिया

कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा के पर्दे पर उतरती हर तस्वीर एक सपने जैसी लगती थी। चेहरे पर पड़ती रोशनी इतनी मुलायम होती […]

ब्लाइंड स्पॉट (1947): शराब के नशे में खोई याददाश्त और एक अनोखी हत्या की कहानी

क्या हो अगर आप नशे में धुत होकर एकदम सही हत्या की साजिश रच दें, और अगली सुबह उठें तो पाएं कि वह हत्या असल […]

द किड ब्रदर (1927): हेरोल्ड लॉयड की वह अमर कृति जिसने मूक सिनेमा को नई ऊंचाई दी

कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा में आवाज़ नहीं थी, सिर्फ हाव-भाव थे। एक ऐसा दौर जब हंसी के लिए संवादों की नहीं, बल्कि […]

निम्मी: ‘अनकही’ दास्तां और हिंदी सिनेमा की वो ‘शोख’ अदाकारा जिसे दुनिया भूल गई

हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग की वो मासूम चेहरे वाली शोख लड़की, जिसकी बड़ी-बड़ी आंखें और सहज मुस्कान ने लाखों दिलों को बांध लिया था। […]

चार्ली चैपलिन की ‘द ग्रेट डिक्टेटर’: जब कॉमेडी बनी तानाशाही के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार

सिनेमा के इतिहास में ऐसी फिल्में बहुत कम बनी हैं जिन्होंने न सिर्फ मनोरंजन किया, बल्कि एक पूरे युग को चुनौती दे दी। ऐसी ही […]

विटोरियो डी सिका की ‘बाइसिकल थीव्स’: इतालवी नवयथार्थवाद (Neorealism) की एक उत्कृष्ट कृति

फिल्में अक्सर हमें एक अलग दुनिया में ले जाती हैं – रोमांच, फंतासी, या शानदार जीवन की दुनिया में। लेकिन कभी-कभी कोई फिल्म हमें हमारे […]

गुमनाम सितारे: मास्टर विट्ठल — भारत की पहली सवाक फिल्म ‘आलम आरा’ के नायक

भारतीय सिनेमा का इतिहास जब भी लिखा जाता है, उसमें एक नाम अक्सर धुंधला सा रह जाता है। एक ऐसा चेहरा जिसने पहली बार भारत […]

क्लोज-अप शॉट का जादू: क्लासिक फिल्मों में भावनाओं को उभारने की पुरानी तकनीक

सिनेमा हमेशा से ही चेहरों की कहानी रहा है। एक ऐसी कहानी जो बिना शब्दों के, सिर्फ़ नज़रों के इशारों से, होंठों की मुस्कुराहट से […]

साइलेंट फ़िल्मों में आवाज़ का जादू: 1920 के दशक के वे ‘बेंशी’ (Benshi) जो परदे के पीछे से कहानी सुनाते थे

आज का दौर है डॉल्बी एटमॉस साउंड का। अभिनेता की हर साँस, फुसफुसाहट, तलवार की हर झनकार हमारे कानों तक सीधे पहुँचती है। लेकिन एक […]

सुरैया: वह सुपरस्टार जिसके पीछे दीवानी थी दुनिया, पर अपनी ही ज़िंदगी में अकेली रह गईं

बॉम्बे के एक श्मशान घाट में असामान्य सन्नाटा पसरा हुआ था। जनवरी की ठंडी हवा में सैकड़ों लोग खड़े थे, लेकिन किसी की आँखें सूखी […]