द 39 स्टेप्स (1935): अल्फ्रेड हिचकॉक की रहस्य और रोमांच से भरी क्लासिक थ्रिलर का विस्तृत विश्लेषण
सन 1935, ब्रिटिश सिनेमा अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहा था, और हॉलीवुड का जादू दुनिया भर पर छाया…
Movie Reviews – Connect to Life
सन 1935, ब्रिटिश सिनेमा अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहा था, और हॉलीवुड का जादू दुनिया भर पर छाया…
कल रात की बात है। मेरे एक दोस्त ने, जो खुद को ‘जेन-ज़ी सिनेफाइल’ कहता है, मुझसे पूछा, “यार तुम…
क्या कोई फिल्म एक साथ इतनी शांत और इतनी तूफानी हो सकती है? क्या एक बूढ़ा अभिनेता, एक ईर्ष्यालु प्रेमिका,…
क्या किसी औरत का बदला सिर्फ उसके जीवन तक सीमित होता है, या वह मौत के बाद भी जारी रह…
क्या कोई फिल्म सिर्फ 28 मिनट के टुकड़ों में भी पूरी दुनिया समेट सकती है? क्या एक अधूरी फिल्म भी…
हॉलीवुड के स्वर्णिम युग में कई ऐसे सितारे हुए जिनकी चमक आज भी बरकरार है, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं…
कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा के पर्दे पर उतरती हर तस्वीर एक सपने जैसी लगती थी। चेहरे पर…
क्या हो अगर आप नशे में धुत होकर एकदम सही हत्या की साजिश रच दें, और अगली सुबह उठें तो…
कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा में आवाज़ नहीं थी, सिर्फ हाव-भाव थे। एक ऐसा दौर जब हंसी के…
हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग की वो मासूम चेहरे वाली शोख लड़की, जिसकी बड़ी-बड़ी आंखें और सहज मुस्कान ने लाखों…
सिनेमा के इतिहास में ऐसी फिल्में बहुत कम बनी हैं जिन्होंने न सिर्फ मनोरंजन किया, बल्कि एक पूरे युग को…
फिल्में अक्सर हमें एक अलग दुनिया में ले जाती हैं – रोमांच, फंतासी, या शानदार जीवन की दुनिया में। लेकिन…
भारतीय सिनेमा का इतिहास जब भी लिखा जाता है, उसमें एक नाम अक्सर धुंधला सा रह जाता है। एक ऐसा…
सिनेमा हमेशा से ही चेहरों की कहानी रहा है। एक ऐसी कहानी जो बिना शब्दों के, सिर्फ़ नज़रों के इशारों…
आज का दौर है डॉल्बी एटमॉस साउंड का। अभिनेता की हर साँस, फुसफुसाहट, तलवार की हर झनकार हमारे कानों तक…
बॉम्बे के एक श्मशान घाट में असामान्य सन्नाटा पसरा हुआ था। जनवरी की ठंडी हवा में सैकड़ों लोग खड़े थे,…
साल 1911 था। मुंबई के एक सिनेमाघर में अँधेरा छाया हुआ था। पर्दे पर एक विदेशी फिल्म चल रही थी…
आज के दौर में जब स्पेशल इफेक्ट्स की बमबारी और स्टाइलिश एंटी-हीरोज़ का बोलबाला है, मेरा दिल अक्सर उस जमाने…
वह पहली बार जब अपु ने मेरे दिल को छुआ 2015 कि बात ही, मैं एक छोटे शहर कि लाइब्रेरी…
वह समय जब फिल्में बोलती नहीं, दिलों में उतर जाती थीं कई साल से मैं क्लासिक सिनेमा पर लिख रहा…