बंगाली सिनेमा कैसे बना? वो अनकही दास्तान जो इतिहास की किताबों में नहीं है
कलकत्ता। 1890 का दशक। शहर में उस वक़्त दो चीज़ें एक साथ चल रही थीं — अंग्रेज़ों की हुकूमत और…
Movie Reviews – Connect to Life
कलकत्ता। 1890 का दशक। शहर में उस वक़्त दो चीज़ें एक साथ चल रही थीं — अंग्रेज़ों की हुकूमत और…
लेखक की कलम से: कुछ फ़िल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बनती। कुछ फ़िल्में एक दर्पण होती हैं — जिसमें…
एक सुबह अमिताभ बच्चन अपनी गाड़ी में बैठे मुंबई के सांताक्रूज इलाके से गुज़र रहे थे। तभी उनकी नज़र एक…
कभी-कभी इतिहास की सबसे बड़ी बातें सबसे छोटी जगहों से शुरू होती हैं। एक थिएटर, एक कहानी, और एक सपना…
बात करें 1930 के दशक की, तो सिनेमा का पूरा नशा स्क्रीन पर था। हीरो था, हीरोइन थी, खलनायक था,…
कुछ हफ्ते पहले की बात है। मैं बेवजह इंटरनेट पर भटक रहा था — वो वाला भटकना जब नींद नहीं…
एक सवाल पूछता हूँ। अगर मैं कहूं कि 1930s में एक ऐसी अभिनेत्री थी जिसकी फिल्में पूरे सोवियत संघ के…
एक सवाल पूछना चाहता हूं आपसे। क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री को फिल्म में काम…
रात के करीब आठ बजे हैं। एक Insurance Agent अपने किसी client का routine काम निपटाने के लिए एक घर…
आप अभी भी वो पल याद कर सकते हैं — जब पहली बार किसी कार्टून ने आपको हँसाया था। शायद…
एक सवाल पूछिए खुद से — अगर आपके घर का सबसे बड़ा सहारा अचानक चला जाए, तो क्या आपका परिवार…
1944 की एक काली रात। बारिश से भीगी सड़कें। एक थका हुआ Detective अपने Office में बैठा है — सिगरेट…
सितंबर 1921 की एक रात। San Francisco के सबसे शानदार Hotel में Party चल रही थी। शराब बह रही थी,…
जब हम आज की सिनेमाई जादूगरी—हरे पर्दे के सामने एक्शन करते सुपरहीरो या वायर रिग्स पर झूलते कलाकार—को देखते हैं,…
वो आदमी जिसने कभी लाखों सैनिकों को हुक्म दिया था — आज एक फ़िल्मी सेट पर भीड़ का हिस्सा था।…
वो एक लम्हा जब कोरिया ने पहली बार खुलकर सांस ली कल्पना कीजिए — 35 साल की गुलामी। 35 साल…
रात के बारह बज रहे हैं। पूरा घर सन्नाटे में डूबा है, बाहर सड़क पर कभी-कभार कोई गाड़ी गुज़रती है…
क्या आप कभी उस सिनेमाघर में बैठे हैं जहाँ लाइट बुझते ही पर्दे पर एक दुनिया जागती है? ये जो…
रविवार की रात है, आप पूरे हफ्ते की थकान उतारने के लिए Netflix खोलकर बैठे हैं। स्क्रीन पर एक तरफ…
कभी-कभी जब रात के सन्नाटे में रेडियो पर अचानक “लग जा गले” की धुन बजती है या टीवी पर “शोले”…