पसीने और खून से लिखी गई मूक सिनेमा की कहानी: शुरुआती दौर की खतरनाक हकीकत
जब हम आज की सिनेमाई जादूगरी—हरे पर्दे के सामने एक्शन करते सुपरहीरो या वायर रिग्स पर झूलते कलाकार—को देखते हैं,…
Movie Reviews – Connect to Life
जब हम आज की सिनेमाई जादूगरी—हरे पर्दे के सामने एक्शन करते सुपरहीरो या वायर रिग्स पर झूलते कलाकार—को देखते हैं,…
कल रात की बात है। मेरे एक दोस्त ने, जो खुद को ‘जेन-ज़ी सिनेफाइल’ कहता है, मुझसे पूछा, “यार तुम…
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसी धुंध (fog) जो लंदन की सड़कों को सफेद चादर से ढक देती…
कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा के पर्दे पर उतरती हर तस्वीर एक सपने जैसी लगती थी। चेहरे पर…
सिनेमा हमेशा से ही चेहरों की कहानी रहा है। एक ऐसी कहानी जो बिना शब्दों के, सिर्फ़ नज़रों के इशारों…
आज का दौर है डॉल्बी एटमॉस साउंड का। अभिनेता की हर साँस, फुसफुसाहट, तलवार की हर झनकार हमारे कानों तक…
साइलेंट फिल्मों का युग (1890s-1920s) विजुअल इफेक्ट्स का स्वर्णिम काल था, लेकिन एक ऐसा काल जिसे इतिहास ने अक्सर ‘आदिम’…
एक पुराने, धूल भरे स्टोररूम की कल्पना कीजिए। हवा में प्रोजेक्टर के बल्ब की गंध और पुराने सेल्युलॉइड की महक।…
आज से करीब बीस-पच्चीस साल पहले की बात है। मुंबई के एक पुराने फिल्म आर्काइव में गहरी धूल दिख रही…
साइलेंट सिनेमा की बात हो और चार्ली चैपलिन व बस्टर कीटन का नाम न आए, ऐसा लगभग नामुमकिन है। चैपलिन…