एडिसन के पेटेंट से भागे दीवाने: कैसे कैलिफ़ोर्निया के एक गाँव ने दुनिया की फ़िल्म राजधानी बनाई
सोचिए, साल है 1909, न्यूयॉर्क के एक तंग कमरे में कुछ लोग चुपचाप एक कैमरा सँभाले खड़े हैं। खिड़कियाँ बंद…
Movie Reviews – Connect to Life
सोचिए, साल है 1909, न्यूयॉर्क के एक तंग कमरे में कुछ लोग चुपचाप एक कैमरा सँभाले खड़े हैं। खिड़कियाँ बंद…
एक पल के लिए सोचिए। साल 1895, पेरिस का एक छोटा सा कमरा। दीवार पर कुछ हिलती-डुलती तस्वीरें। और सामने…
एक बात सोचिए। 1910 का साल है। एक फिल्मकार सुबह उठता है, आसमान की तरफ देखता है, और तय करता…
जब सिनेमा बनाना एक जुनून था, पेशा नहीं — और हर फ्रेम के पीछे थी एक पूरी जंग मेरे एक…
मेरे एक दोस्त ने एक बार मुझसे पूछा था — “यार, पुरानी फ़िल्मों में Paris का वो Eiffel Tower वाला…
मुंबई, 1931, रात के दो बज रहे हैं। जयोती स्टूडियो के अंदर रोशनी अभी भी जल रही है। कैमरा लगा…
बात करें 1930 के दशक की, तो सिनेमा का पूरा नशा स्क्रीन पर था। हीरो था, हीरोइन थी, खलनायक था,…
1944 की एक काली रात। बारिश से भीगी सड़कें। एक थका हुआ Detective अपने Office में बैठा है — सिगरेट…
सितंबर 1921 की एक रात। San Francisco के सबसे शानदार Hotel में Party चल रही थी। शराब बह रही थी,…
जब हम आज की सिनेमाई जादूगरी—हरे पर्दे के सामने एक्शन करते सुपरहीरो या वायर रिग्स पर झूलते कलाकार—को देखते हैं,…
कल रात की बात है। मेरे एक दोस्त ने, जो खुद को ‘जेन-ज़ी सिनेफाइल’ कहता है, मुझसे पूछा, “यार तुम…
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसी धुंध (fog) जो लंदन की सड़कों को सफेद चादर से ढक देती…
कल्पना कीजिए, एक ऐसा दौर जब सिनेमा के पर्दे पर उतरती हर तस्वीर एक सपने जैसी लगती थी। चेहरे पर…
सिनेमा हमेशा से ही चेहरों की कहानी रहा है। एक ऐसी कहानी जो बिना शब्दों के, सिर्फ़ नज़रों के इशारों…
आज का दौर है डॉल्बी एटमॉस साउंड का। अभिनेता की हर साँस, फुसफुसाहट, तलवार की हर झनकार हमारे कानों तक…
साइलेंट फिल्मों का युग (1890s-1920s) विजुअल इफेक्ट्स का स्वर्णिम काल था, लेकिन एक ऐसा काल जिसे इतिहास ने अक्सर ‘आदिम’…
एक पुराने, धूल भरे स्टोररूम की कल्पना कीजिए। हवा में प्रोजेक्टर के बल्ब की गंध और पुराने सेल्युलॉइड की महक।…
आज से करीब बीस-पच्चीस साल पहले की बात है। मुंबई के एक पुराने फिल्म आर्काइव में गहरी धूल दिख रही…
साइलेंट सिनेमा की बात हो और चार्ली चैपलिन व बस्टर कीटन का नाम न आए, ऐसा लगभग नामुमकिन है। चैपलिन…
सोचिए ज़रा… 1930 का दशक। बॉम्बे टॉकीज़ का ज़माना। सिनेमा घरों में ब्लैक एंड वाइट फिल्मों का जादू सिर चढ़कर…